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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Meerut News: The work of Rapid Rail is going on fast and see the inside view of the tunnel in the video

Meerut News: देश की प्रथम रैपिड रेल का तेजी से चल रहा कार्य, वीडियो में देखिए टनल के अंदर का नजारा

Wed, 05 Apr 2023 09:59 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 05 Apr 2023 09:59 PM IST
सार

Meerut News : देश की प्रथम रैपिड रेल का कार्य तेजी से चल रहा है। यहां वीडियो में टनल के अंदर का नजारा देखिए।

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Meerut News: The work of Rapid Rail is going on fast and see the inside view of the tunnel in the video
रैपिड रेल की टनल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश की पहली रैपिड रेल का निर्माण तेजी से चल रहा है। रैपिड रेल के पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है, अब बाकी दो चरणों का कार्य भी तेजी के साथ किया जा रहा है। वहीं, मेरठ में गांधीबाग के सामने टनल के अंदर ट्रैक बिछाने का कार्य किया जा रहा है।

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बता दें कि गांधीबाग से लेकर बेगमपुल आरआरटीएस स्टेशन तक पहली टनल का निर्माण पिछले वर्ष अक्तूबर में सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया था। यह आरआरटीएस कॉरिडोर की पहली सुरंग है। 
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बेगमपुल आरआरटीएस स्टेशन से गांधीबाग चौराहे तक तैयार की गई टनल की लंबाई 750 मीटर है। टनल के अंदर ट्रैक बिछाने का कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है।

मेरठ के शताब्दीनगर के कास्टिंग यार्ड की ट्रैक स्लैब फैक्टरी में प्रीकास्ट ट्रैक स्लैब का निर्माण किया जा रहा है। देश में पहली बार ऐसी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिनसे उच्च क्षमता वाले बलास्टलैस ट्रैक स्लैब का उत्पादन हो रहा है। इनका जीवन काल लंबा होता है और इन्हें कम रखरखाव की आवश्यकता होती है।

एनसीआरटीसी के अफसरों ने बताया कि ये ट्रैक स्लैब आमतौर पर 4 मीटर x 2.4 मीटर आकार के होते हैं और इनके निर्माण में उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट का उपयोग किया जाता है। इन ट्रैक स्लैब को ट्रकों-ट्रेलरों के जरिये टनल की साइट पर लाया जा रहा है और टनल के अंदर इंस्टॉल करने का कार्य शुरू किया गया है।

गोलाकार टनल में ट्रैक को मजबूती देने के लिए सर्वप्रथम पीसीसी (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) का बेस बनाया जाता है। टनल के अंदर ट्रैक बिछाने की गतिविधियों के अंदर जहां-जहां जरूरत है, वहां विशेष प्रकार के रबर पैड भी इंस्टॉल किए जाते हैं, जो टनल के कंपन को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं।

ट्रैक स्लैब के बाद शुरू होगा सिग्नल सिस्टम
ट्रैक स्लैब के इंस्टॉल होने के बाद सिग्नल सिस्टम और ट्रैक्शन (ओएचई) लगाने की गतिविधियां शुरू की जाएंगी। इस ट्रैक तकनीक की मदद से एनसीआरटीसी हाई स्पीड और हाई फ्रीक्वेंसी आरआरटीएस ट्रेनें चलाने में सक्षम होगी और संचालन के दौरान क्रमशः 180 किमी प्रति घंटे और 100 किमी प्रति घंटे की औसत गति के साथ यात्रियों की सुरक्षा और आराम को सुनिश्चित करेगी।

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वहीं रैपिड रेल के चलने से जहां मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के युवाओं को दिल्ली-एनसीआर में नौकरी करना आसान होगा तो वहीं व्यापिरयों के लिए भी राहत की बात है। रैपिड रेल के चलने के बाद व्यापारियों को तीन-चार घंटे का सफर नहीं करना पड़ेगा। व्यापारी मेरठ से महज 55 मिनट में दिल्ली पहुंच जाएंगे।

रैपिड रेल का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में गाजियाबाद से किया था। तभी से एनसीआरटीसी इस प्रोजेक्ट पर तेजी से कार्य कर रही है। इस 82 किलोमीटर के प्रोजेक्ट पर 30,276 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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