{"_id":"6001ee4a295c76535569c61d","slug":"meerut-news-private-studies-will-continue-at-ccsu","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेरठः सीसीएसयू में जारी रहेगी प्राइवेट की पढ़ाई, पीएचडी में दूसरे विषयों में करें शोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरठः सीसीएसयू में जारी रहेगी प्राइवेट की पढ़ाई, पीएचडी में दूसरे विषयों में करें शोध
Sat, 16 Jan 2021 01:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 16 Jan 2021 01:04 AM IST
विज्ञापन
सीसीएसयू फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में प्राइवेट परीक्षा की पढ़ाई बंद नहीं होगी। छात्र-छात्राओं की मांग और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए विवि ने यह निर्णय लिया है। शुक्रवार को कैंपस में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में यह प्रस्ताव पास करते हुए राजभवन को भेजा जा रहा है। पीएचडी में अब दूसरे विषयों को मिलाकर भी शोध किए जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विवि के कुलपति ने राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे प्रदेश में प्राइवेट परीक्षा बंद कराने की अपील की थी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा था कि दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से राजर्षि टंडन मुक्त विवि से ही फार्म भरवाए जाएं। इसको लेकर राजभवन से सभी विवि से प्रस्ताव मांगा गया था। शुक्रवार को कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में एकेडमिक काउंसिलिंग की ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें सभी सदस्यों ने कहा कि सीसीएसयू का परिक्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में काफी है। निर्धन, कृषक परिवारों तथा कन्या शिक्षा को
विज्ञापन
प्राइवेट परीक्षा प्रोत्साहित करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी इसका प्रावधान दिया गया है। विवि दूरस्थ शिक्षा घटक व्यक्तिगत शिक्षा को प्रोत्साहित करता है, जो सामाजिक व आर्थिक परिप्रेक्ष्य में भी क्षेत्र के लिए उचित हैं। इसका पाठ्यक्रम पूरी तरह से संस्थागत शिक्षा की तरह है। हर साल हजारों महिला अभ्यर्थी घर पर रहकर ही व्यक्तिगत शिक्षा का लाभ उठा रही हैं। ऐसे में इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है। बैठक में कुलपति प्रो. एनके तनेजा, प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा, वित्त नियंत्रक सुशील कुमार गुप्ता, प्रो. हरे कृष्णा, प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, प्रो. एसएस गौरव और प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र गुप्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन
स्नातक में भी पढ़ सकेंगे श्री रामचरित मानस
विवि में शुरू होने वाले श्री रामचरित मानस एवं श्रीमद्भागवत गीता में डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जाने के लिए समिति की रिपोर्ट में निर्णय लिया गया है। दोनों कोर्सों में संस्कृति एवं विज्ञान विषय पर एक प्रश्नपत्र स्नातक स्तर पर आगामी शैक्षिक सत्र 2020-21 से शुरू कराया जाएगा। यह एक वैकल्पिक प्रश्न के रूप में होगा।
पीएचडी के नियमों में हुआ संशोधन
पीएचडी के ऑर्डिनेंस 2020 के मुताबिक संशोधन किया गया है। अगर कोई इतिहास का छात्र है और भारत के आर्थिक इतिहास विषय पर शोध करना चाहता है तो वह राजनीति विज्ञान विषय के शिक्षकों अपना गाइड चुन सकता है। दूसरे विषयों में भी इस तरह से यह व्यवस्था लागू रहेगी।
विवि में पाठ्यक्रमों विषयों के सिलेबस, ऑर्डिनेंस आदि के संबंध में बोर्ड ऑफ स्टडीज द्वारा लिए गए निर्णयानुसार भूगोल पाठ्यक्रम में संशोधन किया गया। इसमें नियमानुसार कला संकाय में स्नातक को एमए स्नातकोत्तर एवं विज्ञान-अभियांत्रिकी संकाय के विद्यार्थियों को एमएससी स्नातकोत्तर की उपाधि दी जाएगी।
विवि में नए कोर्स पीजी डिप्लोमा इन इनटैक्चुअली प्रॉपर्टी राइट, पीजी डिप्लोमा वाटर ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी एवं बीटेक इन फूड टेक्नोलॉजी अगले सत्र से शुरू किए जाएंगे।