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बंदी डिप्रेशन में न आए, इसके लिए तैयार हुआ नया प्लान, उम्रदराज कैदियों को मिली ये जिम्मेदारी

Fri, 20 Sep 2019 06:31 PM IST
कपिल kapil अश्वनी जौहरी, अमर उजाला, मेरठ
अश्वनी जौहरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 20 Sep 2019 06:31 PM IST
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Meerut News: Now the aged prisoners in jail will remove the tension of the prisoners
प्रतीकात्मक तस्वीर

मेरठ जेल में बंद सजायाफ्ता कैदी अब विचाराधीन बंदियों से बात कर उनका डिप्रेशन दूर करेंगे। इस काम की जिम्मेदारी उम्रदराज कैदियों को सौंपी गई है। कैदी बंदियों को अपराध के दलदल से दूर ले जाते हुए मार्गदर्शन करेंगे। 

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जेल का नाम आते ही हर किसी के मन में एक नकारात्मक छवि तैयार हो जाती है। इसकी वजह यहां हत्या, चोरी, लूट, डकैती के अपराधों में सजा काट रहे कैदी हैं, लेकिन बीते कुछ सालों में जेल के हालात बदले हैं। यहां बंदियों को रोजगारपरक शिक्षा दी जा रही है। इसी कड़ी में चौधरी चरण सिंह जिला कारागार प्रशासन ने एक और कदम बढ़ाया है। जेल में विचाराधीन बंदियों की काउंसिलिंग की व्यवस्था की जा रही है। काउंसिलिंग का दायित्व उम्रदराज कैदियों को मिला है। 
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- ताकि डिप्रेशन में न जाए बंदी
पूर्व में जेल प्रशासन के सामने ऐसे कई मामले आ चुके हैं, जिनमें बंदी के जेल आने के बाद परिजनों ने उससे दूरी बना ली। कई मामलों में तो परिजनों ने पैरवी तक नहीं की। ऐसे बंदी धीरे-धीरे डिप्रेशन में चले गए। बाद में जेल से निकलकर वो बड़े अपराधी बन गए। सजायाफ्ता कैदी इन बंदियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि को जानते हुए उनका ब्रेनवाश करेंगे। इसकी रिपोर्ट जेल प्रशासन को भी सौंपी जाएगी।

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- मिले काउंसिलिंग के टिप्स
जेल प्रशासन ने काउंसलर्स को ट्रेनिंग भी दिलाई है। कौन सा बंदी किस अपराध में जेल में आया है? उसके अपराध करने के पीछे की वजह क्या रही? भविष्य की उसकी क्या योजना है? इन सब बातों को किस तरह से बंदियों के जहन से बाहर लाना है। काउंसलर अपने द्वारा काउंसलिंग किए गए हर बंदी का विवरण रजिस्टर में तैयार करता है। गंभीर मामलों में अफसरों तक मामले साझा होते हैं। एक चीफ काउंसलर तैनात किया गया है, जिसके अंतर्गत दर्जनभर से अधिक काउंसलर बनाए गए हैं। 

बंदी को अवसाद व भ्रम की स्थिति से बाहर लाने के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है। निश्चित तौर पर इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। - डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक

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