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कैंट में हटाया टावर, 14 हजार मोबाइल ठप
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:48 AM IST
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छावनी क्षेत्र के मोबाइल उपभोक्ताओं को और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। शनिवार को कैंट बोर्ड ने आबूलेन स्थित विद्या लक्ष्मी कांप्लेक्स पर लगा इनडस कंपनी का मोबाइल टावर उतरवा दिया।
मोबाइल टावर कंपनी के कर्मचारियों ने विरोध किया, जिसे दरकिनार करते हुए कैंट बोर्ड कर्मचारियों ने यह कार्रवाई की। इस टावर के हटने से कैंट क्षेत्र के करीब 14 हजार मोबाइल्स ठप हो गए। कैंट बोर्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के सीयूजी नंबर भी प्रभावित हुए हैं।
आबूलेन स्थित विद्या लक्ष्मी कांप्लेक्स पर 1996 में एसकोटेल कंपनी ने यह टावर लगाया था। तत्कालीन जिलाधिकारी ने तब टावर लगाने पर आपत्ति जताई थी। काफी विवाद के बाद टावर की अनुमति दी गई थी। कुछ साल बाद यह टावर इनडस कंपनी ने ले लिया।
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कैंट बोर्ड एक्ट 2006 के नियमों में परिवर्तन होने के बाद 2008 में मोबाइल टावर पर केंद्र सरकार की नई रूलिंग आ गई। जिसके तहत छावनी क्षेत्र में जो टावर लगे हैं, उनकी अनुमति यहां की लोकल ऑथोरिटी से लेना अनिवार्य कर दिया गया।
कैंट बोर्ड का दावा है कि कंपनी को इस संबंध में कई बार नोटिस भेजे गए। कोई जवाब न आने पर शनिवार को सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने सहायक अभियंता पीयूष गौतम के नेतृत्व में इंजीनियरिंग टीम भेजी। सुबह 10.30 बजे टावर उतारने का काम शुरू होते ही कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और विरोध कर दिया।
कैंट बोर्ड कर्मचारियों से उनकी तीखी झड़प भी हुई। लेकिन, विरोध के बीच टीम ने शाम छह बजे तक तक टावर हटा दिया। कंपनी के पदाधिकारी कैंट बोर्ड कार्यालय में सीईओ राजीव श्रीवास्तव से मिले और अपना विरोध दर्ज कराया। लेकिन उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिली।
14 हजार मोबाइल प्रभावित
इस टावर पर मुख्य रूप से आइडिया कंपनी का नेटवर्क संचालित होता है। टावर हटने से आइडिया के करीब 6 हजार मोबाइल ठप हो गए। इसके अलावा एयरटेल और वोडाफोन के भी कुल 8 हजार मोबाइल उपभोक्ता प्रभावित हुए।
कैंट बोर्ड के नंबर भी ठप
खास बात ये रही कि कैंट बोर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के सीयूजी नंबर आइडिया कंपनी के हैं। इस कारण शाम होते ही सभी के मोबाइल ठप हो गए। इससे कैंट बोर्ड कर्मी और उनके परिजन परेशान नजर आए।
मेरठ का सबसे पहला टावर था
विद्या लक्ष्मी कांप्लेक्स में लगा यह टावर मेरठ का सबसे पहला मोबाइल टावर बताया जाता है। इसी टावर के जरिये सबसे पहले मेरठ के लोगों ने मोबाइल पर हेलो बोला था। हालांकि समय-समय पर इस टावर को लेकर विवाद चलता रहा। आखिरकार इसे हटा ही दिया गया।
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मोबाइल टावर कंपनी के कर्मचारियों ने विरोध किया, जिसे दरकिनार करते हुए कैंट बोर्ड कर्मचारियों ने यह कार्रवाई की। इस टावर के हटने से कैंट क्षेत्र के करीब 14 हजार मोबाइल्स ठप हो गए। कैंट बोर्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के सीयूजी नंबर भी प्रभावित हुए हैं।
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आबूलेन स्थित विद्या लक्ष्मी कांप्लेक्स पर 1996 में एसकोटेल कंपनी ने यह टावर लगाया था। तत्कालीन जिलाधिकारी ने तब टावर लगाने पर आपत्ति जताई थी। काफी विवाद के बाद टावर की अनुमति दी गई थी। कुछ साल बाद यह टावर इनडस कंपनी ने ले लिया।
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कैंट बोर्ड एक्ट 2006 के नियमों में परिवर्तन होने के बाद 2008 में मोबाइल टावर पर केंद्र सरकार की नई रूलिंग आ गई। जिसके तहत छावनी क्षेत्र में जो टावर लगे हैं, उनकी अनुमति यहां की लोकल ऑथोरिटी से लेना अनिवार्य कर दिया गया।
कैंट बोर्ड का दावा है कि कंपनी को इस संबंध में कई बार नोटिस भेजे गए। कोई जवाब न आने पर शनिवार को सीईओ राजीव श्रीवास्तव ने सहायक अभियंता पीयूष गौतम के नेतृत्व में इंजीनियरिंग टीम भेजी। सुबह 10.30 बजे टावर उतारने का काम शुरू होते ही कंपनी के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और विरोध कर दिया।
कैंट बोर्ड कर्मचारियों से उनकी तीखी झड़प भी हुई। लेकिन, विरोध के बीच टीम ने शाम छह बजे तक तक टावर हटा दिया। कंपनी के पदाधिकारी कैंट बोर्ड कार्यालय में सीईओ राजीव श्रीवास्तव से मिले और अपना विरोध दर्ज कराया। लेकिन उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिली।
14 हजार मोबाइल प्रभावित
इस टावर पर मुख्य रूप से आइडिया कंपनी का नेटवर्क संचालित होता है। टावर हटने से आइडिया के करीब 6 हजार मोबाइल ठप हो गए। इसके अलावा एयरटेल और वोडाफोन के भी कुल 8 हजार मोबाइल उपभोक्ता प्रभावित हुए।
कैंट बोर्ड के नंबर भी ठप
खास बात ये रही कि कैंट बोर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों के सीयूजी नंबर आइडिया कंपनी के हैं। इस कारण शाम होते ही सभी के मोबाइल ठप हो गए। इससे कैंट बोर्ड कर्मी और उनके परिजन परेशान नजर आए।
मेरठ का सबसे पहला टावर था
विद्या लक्ष्मी कांप्लेक्स में लगा यह टावर मेरठ का सबसे पहला मोबाइल टावर बताया जाता है। इसी टावर के जरिये सबसे पहले मेरठ के लोगों ने मोबाइल पर हेलो बोला था। हालांकि समय-समय पर इस टावर को लेकर विवाद चलता रहा। आखिरकार इसे हटा ही दिया गया।