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नवजात से रूठी मां, जंगल में फेंका
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 16 Jan 2016 02:03 AM IST
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मां मेरा क्या कसूर जो मेरे जन्म पर तुम खुश न हुईं। कलेजे पर पत्थर रख तुमने अपने दिल के टुकड़े को यूं कांटों में फेंक दिया...मैं तुम्हारे गर्भ में आई। ये मेरी भूल है तो मां मेरी छोटी सी भूल को भुलाकर तुम मुझे गले लगा लो। तुमने सात माह तक मुझे कोख में संभाले रखा। मगर जब दुनिया देखने की बात आई तो मुझे खुद से यूं दूर कर दिया।
आंखें खुलने से पहले किसी नन्हीं जान के ये शब्द समाज को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी हैं। जहां एक बार फिर एक नवजात को मां की गोद से दूर होना पड़ा। न जाने हमारे समाज की रवायतों की वो क्या वजह होगी, जो एक मां अपनी एक दिन की नवजात को खेत में फेंक कर चली गई। नवजात पूछती भी है कि मां तुम्हें समाज का डर था या मेरी परवरिश से परेशानी थी। जो मेरे पैदा होते ही तुम मुझे छोड़कर चली गईं। मां, मन के ये सवाल मैं कभी तुमसे नहीं पूछूंगी। मगर एक बार आकर मुझे गले लगा लो। जैसे सात माह तुमने मुझे दुनिया से छुपाकर अपने सीने से लगाए रखा। वैसे ही मां एक बार आकर मुझे गोद में उठा लो।
दरअसल, शुक्रवार को झिटकरी सरधना के जंगल में रजवाहे की पटरी के निकट खेत में एक दिन की जन्मी नवजात मिली। अज्ञात व्यक्ति ने 102 एंबुलेंस के चालक रवि सिंह को इसकी सूचना दी तो चालक नवजात को सीएचसी लेकर आया। रवि के अनुसार सूचना देने वाला वहां नहीं मिला, लेकिन मार्ग से गुजर रहे सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए थे। बाद में नवजात को जिला अस्पताल की आईसीयू में रखा गया है।
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हालांकि वह पूरी तरह स्वस्थ बताई गई। चिकित्सकों के अनुसार नवजात का जन्म बृहस्पतिवार या फिर शुक्रवार देर रात हुआ होगा और उसकी मां उसे जंगल में फेंक गई। वहीं, चाइल्ड लाइन की टीम भी नवजात को देखने जिला अस्पताल पहुंची। निदेशिका अनीता राणा के अनुसार चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची का जन्म एक दिन पहले ही हुआ है। बच्ची ठीक होने पर चाइल्ड लाइन में रहेगी।
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आंखें खुलने से पहले किसी नन्हीं जान के ये शब्द समाज को कटघरे में खड़ा करने के लिए काफी हैं। जहां एक बार फिर एक नवजात को मां की गोद से दूर होना पड़ा। न जाने हमारे समाज की रवायतों की वो क्या वजह होगी, जो एक मां अपनी एक दिन की नवजात को खेत में फेंक कर चली गई। नवजात पूछती भी है कि मां तुम्हें समाज का डर था या मेरी परवरिश से परेशानी थी। जो मेरे पैदा होते ही तुम मुझे छोड़कर चली गईं। मां, मन के ये सवाल मैं कभी तुमसे नहीं पूछूंगी। मगर एक बार आकर मुझे गले लगा लो। जैसे सात माह तुमने मुझे दुनिया से छुपाकर अपने सीने से लगाए रखा। वैसे ही मां एक बार आकर मुझे गोद में उठा लो।
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दरअसल, शुक्रवार को झिटकरी सरधना के जंगल में रजवाहे की पटरी के निकट खेत में एक दिन की जन्मी नवजात मिली। अज्ञात व्यक्ति ने 102 एंबुलेंस के चालक रवि सिंह को इसकी सूचना दी तो चालक नवजात को सीएचसी लेकर आया। रवि के अनुसार सूचना देने वाला वहां नहीं मिला, लेकिन मार्ग से गुजर रहे सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए थे। बाद में नवजात को जिला अस्पताल की आईसीयू में रखा गया है।
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हालांकि वह पूरी तरह स्वस्थ बताई गई। चिकित्सकों के अनुसार नवजात का जन्म बृहस्पतिवार या फिर शुक्रवार देर रात हुआ होगा और उसकी मां उसे जंगल में फेंक गई। वहीं, चाइल्ड लाइन की टीम भी नवजात को देखने जिला अस्पताल पहुंची। निदेशिका अनीता राणा के अनुसार चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची का जन्म एक दिन पहले ही हुआ है। बच्ची ठीक होने पर चाइल्ड लाइन में रहेगी।