सावधान! वेब सीरीज पर अश्लीलता देख बदली बच्चों की जिंदगी, लग रही ये खतरनाक बीमारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना काल में ओटीटी नेटवर्क पर मनोरंजन के नाम पर दिखाई गई अश्लीलता और कत्लेआम ने बच्चों की दुनिया पूरी तरह बदल दी है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों और बड़ों से लेकर सभी में आनंद रसायन या डोपामाइन केमिकल बहुत बढ़ गया है। मनोचिकित्सकों के अनुसार बच्चे अभिभावकों पर शक कर रहे हैं तो बड़ों में 'किसी चीज को खोने का डर' की भावना घर कर गई हैं।
साइकोलोजिस्ट एवं हिप्नोथिरेपिस्ट डॉ. कशिका जैन ने बताया कि सभी समस्याओं का बड़ा कारण वेब सीरीज हैं। टीवी पर सीरियल देखने के बाद उसके दूसरे पार्ट को देखने के लिए हफ्ते भर या कम से कम 24 घंटे इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में उनका ध्यान अन्य चीजों में लग जाता है। वेब सीरीज में ऐसे नहीं होता है। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि वेब सीरीज 8 से 10 घंटे जोड़कर कर रखती है और इसे देखने वाले वास्तविक्ता से दूर चले जाते हैं।
सरकारी और निजी चिकित्सकों के पास पहले प्रतिदिन ऐसे 3-4 मामले आते थे। अब रोजाना 35 से 40 केस आ रहे हैं। ऐसे बच्चों की संख्या में ज्यादा बढ़ी है। मेडिकल में हर रोज 100-120 मरीज आ रहे हैं और इनमें अधिकांश डिप्रेशन के हैं। इसी तरह जिला अस्पताल में 80 से 90 मरीज आ रहे हैं। ज्यादातर नींद न आने और डिप्रेशन के हैं।
यह भी पढ़ें: यूपी: फाइलों में ही दम तोड़ गई महायोजना-2021, विकास कार्यों में अड़ंगा बनी ये बड़ी वजह
इस तरह करें बचाव
- अपने प्रियजनों के संपर्क में रहें और जितना संभव हो, खुद को व्यस्त रखें
- परिवार के जिम्मेदार लोग बच्चों और बड़ों से बातचीत करते रहें
- हर कार्य को करने के लिए समय का निर्धारण होना चाहिए
- बच्चों को अनुशासित रखें और थोड़ी-थोड़ी पाबंदी लगाएं
- बच्चों और बड़ों संग नियमित रूप से प्राणायाम और मेडिटेशन करें
ये आती हैं समस्याएं
डोपामाइन या आनंद रसायन बढ़ने से बच्चों और बड़ों में आपराधिक प्रवृत्ति आ जाती है। ये गालियां देने और चीखने को अपना स्टेटस सिंबल समझ लेते हैं। दूसरे को नीचा दिखाने के लिए हर तरह के प्रयास करते हैं। इसके चलते नींद नहीं आती है और दिनचर्या बिगड़ जाती है। हृदय व श्वांस संबंधी रोग हो जाते हैं। मोटापा बढ़ जाता है। आंखें भी कमजोर हो जाती हैं।
- अभिभावकों को भूले बच्चे
एडिक्शन बढ़ने के कारण बच्चा अपनी ही दुनिया में खोया रहता था। काउंसलिंग के दौरान एक बच्चे ने बताया कि माता-पिता अगर उसे सुविधा नहीं दे सकते तो जन्म ही क्यों दिया। बच्चों ने काउंसलिंग के दौरान कई बार गाली-गलौज और किसी भी बात पर चिल्लाने लगते हैं।
- अपराध की तरफ जा रहे युवा
युवा सामने वाले को कूल डूड बनकर दिखाने का प्रयास करते हैं। वह मूवीज में इस्तेमाल शब्द बेझिझक प्रयोग करते हैं। पाबंदी लगाने पर लैपटॉप डबल स्क्रीन खोलकर चोरी-छिपे आपत्तिजनक चीजें देखते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए।
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/