शस्त्र लाइसेंस के लिए मानसिक रूप से फिट होना अनिवार्य, लागू हुआ नया नियम
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अगर आप शस्त्र लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो सिर्फ शारीरिक फिटनेस से ही काम नहीं चलेगा। अब आपको मानसिक रूप से भी फिट होने का प्रमाणपत्र चाहिए होगा, तभी शस्त्र लाइसेंस बनेगा।
दरअसल, शस्त्र लाइसेंस के लिए मनोचिकित्सक का प्रमाण पत्र अनिवार्य किया जा चुका है। पिछले एक माह में करीब एक हजार लोग मानसिक रोग ओपीडी पहुंचे हैं। इनको शस्त्र लाइसेंस के लिए मानसिक प्रमाण पत्र चाहिए था। शस्त्र लाइसेंस की संख्या बढ़ने के कारण हाईकोर्ट ने प्रदेश में लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी थी। सिर्फ अपराध पीड़ित, जानलेवा हमले के पीड़ित और गवाह को ही लाइसेंस जारी किया जा रहा था। जिले में बाकी सभी आवेदनों को निरस्त कर दिया गया था। अब प्रदेश सरकार ने लाइसेंस जारी करने पर रोक हटा दी है।
अगर झगड़ा हो गया तो क्या करोगे?
शस्त्र लाइसेंस के लिए मानसिक रोग ओपीडी में आने वालों से सवाल पूछे जाते हैं। मसलन, वह शस्त्र लाइसेंस क्यों लेना चाहते हैं। लेने के बाद क्या करेंगे। अगर आपका किसी से झगड़ा हो गया और आपके पास शस्त्र है तो आप क्या करेंगे। मुख्य रूप से यह पता किया जाता है कि व्यक्ति डिप्रेशन, शराब की लत, मंदबुद्धि, सायकोटिक डिसऑर्डर (मनोविक्षिप्ति), स्कीजोफ्रेनिया (मन का टूटना), मल्टीपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (बहुव्यक्तित्व विकार) आदि से पीड़ित तो नहीं हैं। जल्दी गुस्सा तो नहीं आता और गुस्सा आने पर आपा तो नहीं खो देता।
कई-कई बार भी बुलाया जाता है
ऐसा नहीं है कि सिर्फ एक ही बार में मानसिक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। कई लोग ऐसे भी आते हैं, जिन्हें परखने के लिए कई बार बुलाना पड़ता है। कई ऐसे प्रश्न पूछकर उनके जवाब का आकलन किया जाता है। यदि जवाब सही रहता है तो इसके बाद ही उन्हें सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से मिसफिट का सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है।
समय निकालना हो रहा मुश्किल
इसका दूसरा पहलू यह है कि मानसिक रोग ओपीडी पर इससे अतिरिक्त भार पड़ रहा है। पहले से ही रोज 150 से 200 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं। शस्त्र लाइसेंस के लिए अतिरिक्त लोग आ रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों के लिए मरीजों के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है। दरअसल, मनोचिकित्सकों को मरीज की मानसिक स्थिति जानने के लिए एक-एक मरीज को ज्यादा समय देना होता है, ऐसे में उन्हें सामंजस्य बैठाने में परेशानी हो रही है।
हर रोज 25 से 30 लोगों को परख रहे
कुछ दिन पहले तक तो रोज 50 से ज्यादा लोग आ रहे थे। अब भी 25 से 30 लोग रोज मानसिक रोग ओपीडी में आ रहे हैं। इसमें उन्हें परखा जाता है कि वह शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं या नहीं। - डॉ. कमलेंद्र किशोर, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
किए जाते हैं सवाल-जवाब
शस्त्र लाइसेंस के लिए ओपीडी में आने वालों से सवाल-जवाब किए जाते हैं। देखा जाता है कि वह किसी विशेष स्थिति में मन पर नियंत्रण रख सकते या नहीं। उनका मानसिक स्तर कैसा है। वह शस्त्र लेने के बाद इसका सही इस्तेमाल कर पाएंगे या नहीं। - डॉ. विभा नागर, काउंसलर, मनोरोग विभाग
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