रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, हर माह मिल रहे एचआईवी के 41 मरीज, ऐसे करें बचाव
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ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) का वार लोगों को बीमार कर रहा है। मेडिकल कॉलेज के एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटर की इस साल एक जनवरी 2018 से 31 अगस्त 2018 तक 235 दिनों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इस दौरान 334 लोगों को एचआईवी की पुष्टि हुई है। यानि हर माह 41 से ज्यादा लोगों को एचआईवी वायरस ने चपेट में लिया है। इनमें 110 महिलाएं भी शामिल हैं। इन लोगों का एआरटी सेंटर में इलाज चल रहा है। जनवरी से अगस्त तक 7339 मरीज मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर पहुंचे, जिनमें एचआईवी का संदेह था, इनकी जांच की गई तो उनमें से 334 एचआईवी ग्रस्त निकले।
शक्तिवर्धक कणों को नष्ट करता है एचआईवी
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफीसिएंसी वायरस) की एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफीसिएंसी सिंड्रोम) को अंतिम स्टेज माना जाता है। स्वस्थ शरीर में 800-1200 सीडी फॉर (शक्तिवर्धक कण) होते हैं, एचआईवी इन कणों को नष्ट करने लगता है, 350 सीडी फॉर होने पर कई बीमारी जकड़ लेती हैं। इलाज से मर्ज ठीक नहीं होता, यह स्टेज एड्स रहती है।
ऐसे हो सकता है एचआईवी
एक से अधिक लोगों से असुरक्षित यौन संबंध से
संक्रमित सुईं एवं सिरिंज के इस्तेमाल से
एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने से
एचआईवी संक्रमित गर्भवती मां से उसके होने वाले बच्चे को
मेडिकल में एचआईवी की जांच निशुल्क कराएं
स्वैच्छिक जांच एवं परामर्श केंद्र (ओपीडी-18)
माता-पिता एवं नवजात शिशु सुरक्षा केंद्र (ओपीडी-13)
एचआईवी के लक्षण
वजन कम होना और किसी भी बीमारी में दवा का असर न होना
गले-मुंह में लगातार छाले रहना और उल्टी व दस्त की समस्या
खुजली, हरपीज और गुप्त रोग होना
ये हैं नए मानक
शादी से पहले युवक-युवती एचआईवी जांच कराएं
असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुई से बचें
पौष्टिक भोजन और स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं
धूम्रपान, मद्यपान, नशीली दवाओं का सेवन न करें
व्यायाम करें, शारीरिक स्वच्छता पर ध्यान दें
| माह | संदिग्ध एचआईवी
मरीज |
एचआईवी
की पुष्टि |
| जनवरी | 922 | 30 |
| फरवरी | 867 | 28 |
| मार्च | 957 | 33 |
| अप्रैल | 903 | 50 |
| मई | 998 | 42 |
| जून | 927 | 61 |
| जुलाई | 1008 | 49 |
| अगस्त | 757 | 41 |
10 हजार से ज्यादा लोग आ चुके इलाज कराने
मेडिकल कॉलेज उप अधीक्षक डॉ. दिनेश राणा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के एआरटी सेंटर की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। पहले साल महज तीन मरीज आए थे, लेकिन जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ी है और लोग एचआईवी टेस्ट करा रहे हैं, वैसे-वैसे तादाद बढ़ती जा रही है। अब तक यहां करीब 10 हजार लोगों का एचआईवी का इलाज कराने आ चुके हैं।
न घबराएं, इलाज कराएं
प्राचार्य और विभागाध्यक्ष डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने बताया कि एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) एचआईवी के वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकता है, जिससे वायरस की मात्रा कम हो जाती है। घबराना नहीं चाहिए, इलाज कराना चाहिए। उन्होंने बताया कि लोगों के लापरवाही बरतने से एचआईवी के मरीज बढ़ रहे हैं।
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