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बजट पूरा, इलाज आधा अधूरा
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 24 Feb 2016 02:26 AM IST
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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के लंबे चौडे़ नियम और शासन के दावे सरकारी अस्पतालों में धड़ाम हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज और जिला महिला चिकित्सालय का हाल यह है कि यहां बजट तो पूरा मिल रहा है, लेकिन इलाज आधा अधूरा। स्वीकृत बेडों के मुकाबले करीब 60 फीसदी पर ही मरीज को चिकित्सा सुविधा मिल रही है। ऐसे में ये अस्पताल मामूली सर्जरी और इलाज करने तक ही सीमित रह गए हैं।
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हालात जानबूझकर खराब
पश्चिमी यूपी के सबसे बड़े लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज स्थित सरदार बल्लभ भाई पटेल राजकीय चिकित्सालय में सरकार से 1060 बेड स्वीकृत हैं, लेकिन मरीजों को इलाज करीब 650 बेडों पर ही मिल पा रहा है। क्योंकि कुछ बेड फंक्शन में ही नहीं है तो बाकी बचे बेडों को भरने के लिए उतनी बड़ी संख्या में मरीजों को एडमिट नहीं किया जा रहा है। जबकि हड्डी से लेकर सामान्य सर्जरी वार्ड तक में ऑपरेशन के लिए वेटिंग की स्थिति बनी हुई है।
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अभी तक खाली बेडों की स्थिति पर कॉलेज प्रशासन सफाई देता रहा है कि फैकल्टी की भारी कमी है, लेकिन यह समस्या भी काफी हद तक दूर हो चुकी है। कभी ऑपरेशन थियेटर खराब बताया जा रहा है तो कुछ बेसिक परेशानी गिनाई जा रही हैं, लेकिन आधारभूत सुविधाएं इतनी भी खराब नहीं हुई है कि मेडिसन से लेकर सर्जरी तक के तमाम वार्डों पर ताला लगा हो। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित अधिकांश वार्ड बंद हैं। जिनसे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति कैसी है।
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यहां स्टाफ नर्स से ओपीडी
महिला अस्पताल में स्वीकृत 116 बेडों में 93 पर ही मरीजों को इलाज चल रहा है। बाकी बेड फंक्शन में ही नहीं हैं। यानी मंडलीय चिकित्सालय में 23 बेड मरीजों को सेवा देने की स्थिति में नहीं है। उधर, चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर स्थिति उससे भी ज्यादा खराब है। बीते दिनों स्टाफ नर्सों को बैठाकर मरीजों को दिखाया जा रहा था। क्योंकि एक साथ तीन चिकित्सकों को छुट्टी पर भेज दिया गया। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीजों की जान के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है?