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EXCLUSIVE: यूरोप में भारतीय बासमती की चाहत को कीटनाशक कर रहे आहत

Wed, 14 Nov 2018 02:16 PM IST
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 14 Nov 2018 02:16 PM IST
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Meerut, making pesticide damage to the taste of Indian Basmati rice in European countries
यूरोप से आए दल को जानकारी देते बीईडीएफ के प्रभारी डॉ. रितेश शर्मा - फोटो : अमर उजाला

यूरोपियन देशों को निर्यात की जाने वाले बासमती चावल पर पेस्टीसाइड की मार पड़ रही है। सेहत के लिए घातक इस कीटनाशक का निर्यात होने वाले बासमती में प्रयोग न हो इसके लिए विदेशी दल शहर में पहुंच गया है। ये दल पेस्टीसाइड रोकने के लिए वैज्ञानिकों, अफसरों, किसानों और व्यापारियों के साथ मंथन करेगा।

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भारतीय बासमती चावल के स्वाद और खुशबू के यूरोपियन देश दीवाने हैं। इसीलिए हर साल इसका निर्यात बढ़ रहा है। यूरोप में खाद्यान्न में पेस्टीसाइड पर प्रतिबंध है, लेकिन यहां से भेजी जाने वाली बासमती में पेस्टीसाइड की मात्रा पाई जा रही है। यहां के बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा पेस्टीसाइड को कम करने के लिए पिछले एक साल से बासमती पैदा करने वाले राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, यूपी, जम्मू कश्मीर में कार्यक्रम चला रहे हैं। गोष्ठी और प्रशिक्षण के माध्यम से हालांकि पेस्टीसाइड के प्रयोग में कुछ कमी हुई है, लेकिन निर्यात के अनुरूप नहीं है। 
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यूरोपियन हाईकमीशन से तीन सदस्यीय एक्सपर्ट टीम यहां पहुंची। टीम ने वैज्ञानिक डॉ. शर्मा, बासमती उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधियों और किसानों के साथ इस समस्या को खत्म करने को लेकर मंथन किया। टीम ने खेतों में भी जाकर बारीकी से स्थलीय अध्ययन किया और पेस्टीसाइड के प्रयोग को शून्य करने की दिशा में सुझावों का आदान-प्रदान किया।

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डॉ. शर्मा ने बताया कि टीम में फ्लोरेंस कैथरीना, दारा ओशेरा और गोनजलो ग्रेंडो ल्यूस ने हरियाणा, पंजाब, वेस्ट यूपी में हो रही बासमती की फसल का खेतों में जाकर अध्ययन किया और किसानों से भी बात की। 

इन यूरोपियन देशों में जाता है बासमती  
यूरोप, आस्ट्रिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, नीदरलैंड, स्वीडन, इंग्लैंड, डेनमार्क, इटली, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन समेत कई देशों में बासमती का निर्यात किया जाता है। यूरोपियन यूनियन के नए नियम के मुताबिक आयात की जाने वाली बासमती में पेस्टीसाइड का प्रभाव नहीं होना चाहिए।

यूपी के इन जिलों में होती है फसल 
यूपी के मेरठ, आगरा, अलीगढ़, बदायूं, बागपत, बरेली, बिजनौर, बुलदंशहर, एटा, इटावा, फरुखाबाद, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हाथरस, जेपी नगर, कन्नौज, मैनपुरी, मथुरा, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, औरेया, पीलीभीत, रामपुर, शाहजांहपुर, सहारनपुर, शामली, हापुड और संभल आदि में बासमती की फसल होती है। 

अच्छी क्वालिटी के कारण बढ़ी मांग
यूरोप में हर साल करीब चार लाख टन बासमती का निर्यात होता है। इसकी मांग बढ़ रही है और क्वालिटी भी अच्छी है, लेकिन वहां पर पेस्टीसाइड की समस्या है, जिसे कम या खत्म करने को लेकर टीम ने मंथन किया है और यह टीम अध्ययन रिपोर्ट यूरोपियन यूनियन को देगी। -डॉ. रितेश शर्मा, प्रभारी व प्रधान वैज्ञानिक, बीईडीएफ मोदीपुरम।

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