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Meerut: कपसाड़ कांड में सेशन कोर्ट ने भी पारस को माना बालिग, जेजे बोर्ड का फैसला बरकरार

Sat, 08 Aug 2026 11:16 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 08 Aug 2026 11:16 AM IST
सार

मेरठ के कपसाड़ कांड में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी रूबी के अपहरण के आरोपी पारस सोम को सेशन कोर्ट ने भी बालिग माना है। अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद बाबर खान ने जेजे बोर्ड के फैसले के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी।

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Meerut Kapsad Case: Sessions Court Upholds Juvenile Board's Decision, Declares Paras Adult
आरोपी पारस सोम का फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मेरठ के बहुचर्चित कपसाड़ कांड में आरोपी पारस सोम की उम्र को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सेशन कोर्ट ने जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा है। अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) मोहम्मद बाबर खान ने आरोपी को बालिग मानते हुए उसके वकील की अपील खारिज कर दी।

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अब पारस पर बालिग के तौर पर मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है। आरोपी के वकील बलराम सोम ने कहा है कि वह 10वीं की मार्कशीट में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर उम्र निर्धारण को लेकर हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

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10वीं की मार्कशीट में 11 मई 2008 जन्मतिथि
कपसाड़ गांव में आठ जनवरी 2026 को हुई वारदात के बाद आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया गया था। आरोपी की 10वीं की मार्कशीट के आधार पर उसकी जन्मतिथि 11 मई 2008 बताई गई थी। पुलिस ने आरोपी को बालिग मानते हुए आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद उम्र निर्धारण को लेकर मामला जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पहुंचा।

मेडिकल जांच के आधार पर जेजे बोर्ड ने माना था बालिग
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी की मेडिकल ऑसिफिकेशन जांच कराई थी। रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने पारस को बालिग माना था। इस फैसले के खिलाफ आरोपी के वकील ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। अब सेशन कोर्ट ने भी जेजे बोर्ड के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी है।

निजी स्कूल के रजिस्टर में दर्ज उम्र पर उठे सवाल
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी का कोई आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र नहीं बना था। स्कूल में दाखिले के समय उसके पिता ने मौखिक रूप से उम्र बताई थी, जिसे निजी स्कूल के रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया।

अदालत ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि निजी स्कूल या बिना मान्यता वाले कोचिंग सेंटर के रजिस्टर सार्वजनिक दस्तावेज नहीं माने जाते। उन्हें तैयार करने वाले लोग भी लोक सेवक की श्रेणी में नहीं आते।

मार्कशीट का साक्ष्य मूल्य कम, मेडिकल जांच को माना उचित
अदालत के अनुसार जब शुरुआती जन्मतिथि ही पिता के मौखिक दावे के आधार पर निजी रजिस्टर में दर्ज हुई थी, तो उसी रिकॉर्ड के आधार पर तैयार 10वीं की मार्कशीट की कानूनी अहमियत भी कम हो जाती है।

इसी आधार पर अदालत ने मेडिकल जांच के जरिये उम्र निर्धारित किए जाने को न्यायसंगत माना और जेजे बोर्ड के फैसले को बरकरार रखा। अब आरोपी पक्ष इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी में है।

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