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Christmas 2025: मेरठ का 100 साल पुराना ‘रम केक’, स्कॉच जैसा स्वाद, हर बाइट में सुनाता है एक सदी की कहानी

Sat, 06 Dec 2025 12:11 PM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Sat, 06 Dec 2025 12:11 PM IST
सार

मेरठ में 100 साल पुरानी पारंपरिक तकनीक से बनने वाला रम केक क्रिसमस और नए साल पर खास आकर्षण बना रहता है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही यह परंपरा आज भी सिर्फ पांच पुरानी बेकरियों में जीवित है। स्वाद, खुशबू और परंपरा का अनोखा संगम इसे खास बनाता है।

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Meerut: hundred-year-old Rum Cake, A century-old Christmas tradition continues
रम केक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अगर स्कॉटलैंड अपनी सदियों पुरानी स्कॉच के लिए मशहूर है तो मेरठ भी किसी से कम नहीं। यहां 100 साल पुराना ऐसा रम केक बनता है। इसका स्वाद जो एक बार चख ले, उसके जायके का कायल हो जाए। 

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अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही यह परंपरा आज भी शहर की केवल पांच पुरानी बेकरियों में ही जीवंत है। दिलचस्प यह कि डिमांड हमेशा सप्लाई से ज्यादा और लोग साल भर पूछते रहते हैं भैया, रम केक कब बनेगा। क्रिसमस और नववर्ष के नजदीक आते ही इसकी डिमांड और बढ़ गई है।
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इस केक की कहानी किसी दंतकथा से कम नहीं। जाहिर है कि स्कॉटलैंड की स्कॉच वर्षों बैरल में पड़ी रहती है, वहीं मेरठ का रम केक सिर्फ 18 दिन में अपना जादू तैयार कर लेता है।

काजू, बादाम, पिस्ता, चेरी, किशमिश, संतरा और अनानास के छिलकों को साधारण रम में डुबोकर, फिर कीकर की लकड़ी की भट्टी में सलीके से सेका जाता है। कीकर का हल्का-सा धुआं ब्रेड और ड्राई फ्रूट्स में ऐसी खुशबू भर देता है कि पहली स्लाइस खाते ही दिल कह उठता है- वाह, यही तो असली क्रिसमस की महक है।

क्रिसमस के उल्लास में तैरने लगती है खुशबू
क्रिसमस के आसपास शहर का माहौल बदल जाता है। जहां हर बेकरी रेड वेलवेट और फ्रूट केक की चमक-दमक में लगी रहती है, वहीं असली रौनक इन परंपरागत रम केक की होती है।

मेरठ का क्रिसमस मतलब सांता केक, रम केक और कीकर की महक। यही यहां की असली पहचान है। शहर के हजारों लोग तो आज भी अपने घरों में बना केक लेकर बेकरियों की भट्टी पर सिकवाने आते हैं।

10 दिसंबर से ईसाई परिवारों में केक का आदान-प्रदान शुरू हो जाता है और हर घर में वही पुरानी खुशबू तैरने लगती है जो दशकों से मेरठ की गलियों में क्रिसमस की दस्तक बनकर फैलती रही है।

एक सदी की कहानी सुनाता है यह केक 
बेकरी संचालक संदीप बताते हैं कि 1923 में अंग्रेजों के दौर में शुरू हुई यह तकनीक आज भी जस की तस है। न कोई आर्टिफिशियल फ्लेवर, न कोई एसेंस। खालिस परंपरा, शुद्ध लकड़ी की भट्टी और भरपूर ड्राई फ्रूट्स। वे हंसते हुए कहते हैं, हमारे रम केक का मुकाबला तो स्कॉटलैंड में भी नहीं मिलेगा।

इसमें रम का नशा नहीं, लेकिन स्कॉच की सी खुशबू जरूर है। एक स्लाइस गर्म दूध के साथ खाइए। ताजगी भी, ताकत भी और ठंड भी गायब। सच पूछा जाए तो यह सिर्फ केक नहीं, असल में मेरठ का स्वाद, इतिहास और परंपरा का मीठा संगम है, जो हर लुकमे में एक सदी की कहानी सुनाता है।
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