मेरठ : कोरोना कर्फ्यू में कई राज्यों में सामान की आपूर्ति प्रभावित, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश नहीं जा रहे ट्रक
पिछले वर्ष जिन ट्रांसपोर्ट कंपनियों के पास 125 ट्रक थे, उनके पास 70 ट्रक रह गए। इस साल फिर कोरोना संक्रमण ने कारोबार की कमर तोड़ दी है। मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि अब फुटकर में ट्रक नहीं जा रहे हैं। इन ट्रकों में मिलाजुला माल जाता है।
इसमें मशीनों के पार्ट्स, ट्रैक्टर पार्ट्स, किताबें, स्पोर्ट्स गुड्ड, कपड़ा, कैंची आदि आवश्यक वस्तु जाती हैं। किसी भी व्यापारी के लिए फुल ट्रक लोड भेजना मुश्किल होता है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं के साथ अन्य सामान की सप्लाई हो जाती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में प्रतिदिन 450 ट्रकों का माल प्रभावित हो रहा है।
25 की जगह दो ट्रक ही भेज रहे
गांधी ट्रांसपोर्ट के संचालक दीपक गांधी ने बताया कि जो पहले जो ट्रांसपोर्टर 25 ट्रक तक भेज रहे थे, उनके ट्रक दो तक सिमट गए हैं। दिल्ली से माल आने भी समस्या आ रही है।
भाड़े में नहीं हुआ इजाफा
डायमंड ट्रांसपोर्ट के संचालक दीपक रहलन ने बताया कि फरवरी 2021 में माल भाड़ा बढ़ाया गया था। इसलिए अब भाड़ा नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन ट्रांसपोर्टरों को नुकसान हो रहा है। वर्तमान में दिल्ली में 10 टायरा ट्रक भेजने का भाड़ा नौ हजार रुपये है। जयपुर के लिए भाड़ा 23 हजार, मुंबई के लिए 55 हजार, अहमदाबाद के लिए 40 हजार और चेन्नई के लिए भाड़ा औसतन एक लाख रुपये है।
लॉकडाउन बढ़ा तो ठप हो जाएगा कारोबार
गायत्री ट्रांसपोर्ट के संचालक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि पिछले साल से ट्रकों की संख्या कम हो गई है। ज्यादातर ट्रक फाइनेंस पर हैं। कुछ ट्रक की 80 हजार रुपये प्रतिमाह तक किश्त जाती है। प्रतिदिन वर्ष 10 टायरा ट्रक का 12 हजार रोड टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा मेंटीनेंस, इंश्योरेंस, परमिट, डीजल सहित अन्य खर्च से काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
आवश्यक वस्तु हुई महंगी, सप्लाई में देरी
एक तरफ जम्मू, हिमाचल, बिहार और पूर्वांचल के मजदूर संपूर्ण लॉकडाउन की आशंका से लौट रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्ट में लोडिंग अनलोडिंग की समस्या बढ़ रही है। खाद्यान सहित फल, सब्जी और दवाओं की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। पहले सामान की आपूर्ति तीन से चार दिन में हो रही थी तो अब 10 से 15 दिन तक लग रहे हैं।