मेरठ में किसानों का धरना: त्योहार पर भी नहीं गए घर, बोलेखोखले वादों में न आएंगे, मेडा परिसर में मनाएंगे दिवाली
मेरठ में गंगानगर, लोहियानगर और वेदव्यासपुरी के किसान बढ़े प्रतिकर की मांग पर अड़े हैं। पांचवें दिन भी मेडा परिसर में धरना जारी रहा। किसानों ने वहीं दिवाली मनाने का ऐलान किया।
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बढ़े हुए प्रतिकर की मांग को लेकर गंगानगर, लोहियानगर और वेदव्यासपुरी के किसानों का मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) परिसर में धरना शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना और सचिव बृजेश सिंह की ओर से दिए गए आश्वासनों के बावजूद किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। किसानों ने साफ कर दिया है कि इस बार वे अधिकारियों के खोखले वादों में नहीं आएंगे और दिवाली भी प्राधिकरण परिसर में धरने पर बैठकर मनाएंगे।
25 नवंबर तक मुलाकात के प्रस्ताव पर नहीं बनी सहमति
किसान सोमवार से मेडा मुख्यालय में डेरा डाले हुए हैं। बृहस्पतिवार को मेडा उपाध्यक्ष, सचिव और सीओ सिविल लाइंस ने किसान प्रतिनिधियों को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 30 मिनट तक बातचीत की थी। इस दौरान मेडा सचिव ने 25 नवंबर तक किसानों की मुलाकात प्रमुख सचिव नगर विकास से कराने का प्रस्ताव रखा था।
शुरुआत में किसान इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया। किसानों का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि बढ़े हुए प्रतिकर का वास्तविक लाभ चाहिए।
बोले- हर बार मिलता है धोखा, अब आर-पार की लड़ाई
किसान नेता गौरव गुर्जर काजीपुर ने कहा कि अधिकारी केवल झूठे वादे करते हैं और किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं करते। बार-बार आश्वासन मिलने के बाद भी मांग पूरी नहीं होने से किसानों में भारी आक्रोश है। अब किसान आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक जमीन का बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों के खातों में नहीं पहुंच जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। किसान इस बार किसी भी आश्वासन पर धरना खत्म करने को तैयार नहीं हैं।
मेडा प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी
शुक्रवार को धरने के दौरान किसानों ने मेडा प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने दिवाली भी मेडा परिसर में ही मनाने का ऐलान किया है।
धरने में किसान नेता जसवीर प्रधान, अज्जू बैसला, विनोद पुठा, पार्षद प्रशांत कसाना, मंगत सिंह, जगेश्वरी, अनुदेव, विमला और ईश्वरी सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।