क्यों उपयोगी है रजनीगंधा? किसान तीन वर्ष तक कमा सकते हैं लाभ, पढ़िए- कैसे
रजनीगंधा एक बहु उपयोगी पौधा है। किसान इससे तीन साल तक लाभ कमा सकते हैं।
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रजनीगंधा एक बहु उपयोगी पौधा है। जिसका पुष्प और सुगंध उद्योगों में महत्वपूर्ण स्थान है। मेरठ में सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के कृषि वैज्ञानिक (उद्यान विज्ञान) डॉ. अनंत ने बताया कि रजनीगंधा के फूल ऐसे समय उपलब्ध होते हैं, जब बाजार में अन्य सजावटी पुष्पों का अभाव होता है। इसके कटे फूल उत्तम गुणवत्ता व लंबे समय तक ताजा बने रहने और परिवहन में सुविधा के कारण पसंद किए जाते हैं।
चुनाव किए गए खेत की मिट्टी पलटने वाले हल से छह से आठ इंच गहरी जुताई फरवरी के अंतिम सप्ताह व मार्च के पहले सप्ताह में करें। दो से तीन जुताई हैरो या कल्टीवेटर अथवा देशी हल से करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें। आखिरी जुताई से पहले खाद और उर्वरक की संस्तुत मात्रा खेत में समान मात्रा में बुरका दें। यदि खेत में दीमक, निमेटोड अन्य कीटों के प्रकोप का भय हो तो फ्यूराडान या थिमेट का प्रयोग करें।
बीज दर, रोपाई व कंदों का चुनाव
एक हेक्टेयर में रोपण के लिए लगभग एक लाख कंदों की आवश्यकता होती है। जो वजन में लगभग 15 से 20 क्विंटल होते हैं। रजनीगंधा की रोपाई का उपयुक्त समय मार्च का पहला सप्ताह है। विशेष परिस्थितियों में इसे अप्रैल तक लगाया जा सकता है। रोपण के लिए दो से तीन सेंटीमीटर व्यास और लगभग 20 से 35 ग्राम वजन वाले स्पिंडिल (तकली के आकार के) कंद उपयुक्त होते हैं। बड़े आकार के कंद में अंकुरण देरी से होता है, लेकिन बढ़वार अच्छी होती है एवं फूल जल्दी आते हैं। कंदों की रोपाई कंद के आकार, भूमि एवं रोपी जा रही किस्म पर निर्भर करती हैं। पंक्ति में कंदों को 25 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपा जाता है। जबकि दो पंक्तियों के बीच 40 सेंटीमीटर दूरी रखी जाती है। पहली विधि में सात से आठ सेंटीमीटर गहरी लाइन खोदकर कंदों को रखकर मिट्टी से अच्छी तरह ढक दें। जबकि डिबलिंग विधि में उपरोक्त दूरी पर खुरपी से खोदकर कंदों को लगाकर मिट्टी से ढक दिया जाता है। एक स्थान पर एक ही कंद लगाया जाता है, लेकिन छोटे कंद होने पर दो कंदों को एक साथ लगाया जाता है।
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एक पुष्प वाली (सिंगल टाइप)- कलकत्ता सिंगल, रजतरेखा और मैक्सिकन सिंगल किस्में आती हैं।
दोहरे पुष्प वाली (डबल टाइप)- कलकत्ता डबल, पर्ल डबल और अलंकारिक पत्तियों वाली किस्म स्वर्ण रेखा प्रमुख हैं।
अर्ध दोहरे पुष्प वाली (मध्यम प्रकार)- वैभव, श्रृंगार और सुवासिनी किस्में सिंगल और डबल टाइप के संकरण से तैयार की गई हैं।
अलंकारिक पत्तियों वाली किस्म (दो रंगी)- रजतरेखा और स्वर्णरेखा प्रमुख हैं।
फूलों की कटाई, पैकिंग व पैदावार
रजनीगंधा की स्पाइक (पुष्प) को उस समय काटा जाना चाहिए, जब फूल पूर्णरूप से विकसित हो गए हों, लेकिन खुले न हों। स्पाइक काटने के लिए सूर्योदय एवं सूर्यास्त का समय उचित होता है। स्पाइक को जमीन से लगभग दो से तीन इंच ऊपर से तेज धार वाली छुरी से काटना चाहिए। काटी हुई स्पाइक को तुरंत पानी में डुबोकर रखना चाहिए। स्पाइकों को दर्जन अथवा सैकड़े के हिसाब से बंडल बनाकर अखबार के कागज से बांध दिया जाता है। स्पाइकों के तने का कटे सिरे वाला भाग पानी से नम कर देना चाहिए। बंडलों को गत्ते के डिब्बों में पैक करके स्थानीय बाजार या सुदूर क्षेत्रों में भेज सकते हैं। सिंगल किस्म से एक हेक्टेयर से लगभग 20 से 25 टन फूल तीन वर्ष की अवधि में प्राप्त होते हैं। दूसरे वर्ष में फूलों की उपज सर्वाधिक होती है, जो तीसरे वर्ष कम हो जाती है। एक हेक्टेयर क्षेत्र से लगभग 2.5 से 3.5 लाख स्पाइक प्राप्त होते हैं। वहीं, खुदाई के बाद 20 से 23 टन कंद प्रति हेक्टेयर प्राप्त होते हैं।
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