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मेरठ: अवैध निर्माण की जद में आया पूरा शहर, 16,726 मकान होंगे सील, बेगमपुल, ब्रह्मपुरी समेत यहां गिरेगी गाज

Mon, 21 Sep 2026 09:33 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Mon, 21 Sep 2026 09:33 PM IST
सार

सेंट्रल मार्केट मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केवल एक ही जोन की रिपोर्ट दाखिल करने पर खंडपीठ ने नाराजगी जताई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा, तारापुरी समेत कई इलाकों में 16,726 भवन अनाधिकृत हैं, जिन्हें सील करने के आदेश दिए गए। 

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Meerut: Entire city in the grip of illegal construction; 16,726 houses to be sealed; areas including Begumpul
सेंट्रल मार्केट में ध्वस्तीकरण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शास्त्रीनगर में चल रही ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई अब केवल सेंट्रल मार्केट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरा शहर इसकी जद में आ सकता है। सेंट्रल मार्केट मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने अवैध निर्माण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि अवैध निर्माण 25 साल पुराना हो या 50 साल पुराना, वह अवैध ही रहेगा।
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मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की ओर से सुनवाई के दौरान जोन ए की सर्वे रिपोर्ट दाखिल की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि शहर के जोन ए (बेगमपुल, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, भगवतपुरा, तारापुरी समेत कई इलाके) में 16,726 भवन अनाधिकृत हैं। इस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने इन सभी निमार्ण को सील करने के आदेश दिए। 
वहीं, बाकी तीन जोन बी, सी और डी की रिपोर्ट दाखिल नहीं किए जाने पर अदालत ने मेडा सचिव अर्पित गुप्ता पर नाराजगी जताई। मामले में 9 दिसंबर की तारीख तय करते हुए तब तक अनुपालन आख्या दाखिल करने के निर्देश दिए गए।
 
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आवास एवं विकास परिषद के अधिवक्ता की ओर से 44 सील भवनों की अनुपालन आख्या भी दाखिल की गई। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सरकारी वकील नवीन पाहवा ने पक्ष रखा।
 
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सभी 44 भवनों को करें सील
कोर्ट को बताया गया कि 44 आवासीय भवनों में व्यावसायिक निर्माण के मामले में छह भवन ऐसे थे, जो बिना नक्शे के बनाए गए थे। इन्हें पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है। वहीं 38 संपत्तियों के पास आवासीय स्वीकृति है, लेकिन इनमें अतिरिक्त निर्माण कर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। इन 44 संपत्तियों में से 24 के अवैध निर्माण को आवंटियों की ओर से पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका है, जबकि बाकी 20 में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट ने सभी 44 सील भवनों को ध्वस्त कर नए सिरे रिपोर्ट पेश करने को कहा।
 

201 संपत्ति के सेटबैक में अवैध निर्माण
परिषद की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 201 संपत्तियां ऐसी पाई गई थीं, जिनमें सेटबैक में अवैध निर्माण था। इनमें से 63 संपत्तियों के अवैध निर्माण पूरी तरह हटा दिए गए हैं जबकि शेष 138 पर कार्रवाई की जा रही है। खंडपीठ ने प्रमुख सचिव आवास एवं शहर नियोजन, चेयरमैन आवास एवं विकास परिषद तथा प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद को स्पष्ट निर्देश दिए और कहा कि वे कार्रवाई की निगरानी करें। मामले में 9 दिसंबर की तारीख तय करते हुए नए सिरे से अनुपालन आख्या दाखिल करने के आदेश दिए गए।
 

सुरक्षा का खतरा है तो शहर छोड़ दें
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता को लगातार धमकियां मिल रही हैं और उसे जान का खतरा है। इस पर कोर्ट ने उन्हें पुलिस स्टेशन जाने को कहा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सुरक्षा का खतरा है तो वे शहर छोड़ दें। इस पर छोटे व्यवसाय की दलील दी गई। इसके बाद कोर्ट ने प्रदेश सरकार को लोकेश खुराना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
 

14 जुलाई के आदेश का करें पालन
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि सील किए गए अवैध निर्माणों पर पूरी तरह से कार्रवाई नहीं हुई है। इस पर खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि 44 सील भवनों को ध्वस्त किया जाए। साथ ही पूर्व में 14 जुलाई को दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के निर्देश दिए। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के संबंध में भी कोर्ट ने कहा कि सरकार इनके लिए पुनर्वास की नीति बनाए।
 

इसी बीच व्यापारियों के अधिवक्ता सूरत सिंह की ओर से भी पक्ष रखने की गुहार लगाई गई, जिसे कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान रविंद्र गुर्जर, एडवोकेट अंजनेय सिंह, एडवोकेट राहुल मलिक, नितेष पंवार आदि भी मौजूद रहे। उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि अदालत के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।

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