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खास रिपोर्ट: नगर निगम को अपनों ने ही लगाया 2 करोड़ का फटका

Mon, 28 Jan 2019 09:19 PM IST
कपिल kapil राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 28 Jan 2019 09:19 PM IST
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Meerut, Due to the employees the Nagar Nigam has suffered a loss of 2 crores
नगर निगम के बाहर निगम की दुकानों को रोड पटरी में दर्शाया गया - फोटो : अमर उजाला

मेरठ नगर निगम में शासन के आदेश को भी नहीं माना जा रहा है। निगम के कर्मचारी 14 साल से पटरी की दुकानों से किराया नहीं वसूलकर विभाग को दो करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान पहुंचा चुके हैं, जबकि इन दुकानों के मालिक अब तक करोड़ों का कारोबार कर चुके हैं। इसके बाद भी अफसर इस तरफ ध्यान देने के लिए तैयार नहीं हैं।

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शासनादेश की आड़ में खेल
शासन के 2004 में जारी किए गए आदेश की आड़ में यह पूरा खेल हो रहा है। सड़कों को चौड़ी करने के लिए शासन ने रोड पटरी पर बनी दुकानों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। उस समय नगर निगम प्रशासन ने शहर में विभिन्न स्थानों पर बनी निगम की 70 दुकानों को रोड पटरी पर दर्शाया था। दुकानें तो ध्वस्त नहीं की र्गइं, लेकिन इनसे किराया वसूलना बंद कर दिया। निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक दुकानों की सूची तो बनी है, लेकिन उस पर किसी भी लिपिक और निगम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

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निगम की एक हजार से अधिक दुकानें
महानगर में नगर निगम की एक हजार से अधिक दुकानें हैं। इनमें नगर पालिका मार्केट, भगत सिंह मार्केट, नगर निगम मार्ग पर मार्केट, देहली गेट चौराहा मार्केट, जेल चुंगी, बच्चा पार्क, सूरजकुंड सहित विभिन्न स्थानों पर निगम की दुकानें हैं। नगर निगम के अधिकारियों ने 2004 में निगम के मुख्य गेट के पास सड़क किनारे बनी दुकानों को रोड पटरी में दर्ज कर दिया। एक भी दुकान को शासनादेश के मुताबिक न तो ध्वस्त किया और न ही ताला लगाया गया। 

सूची से शुरू हो गया भ्रष्टाचार 
सूची में जिन दुकानों को रोड पटरी पर लिया गया है, उनके बराबर में संचालित प्राइवेट दुकानें भी हैं। नियमानुसार इन्हें भी रोड पटरी में शामिल होना चाहिए, लेकिन जानबूझकर ऐसा नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार निगम के कुछ अधिकारी आए दिन इन दुकानदारों को शासनादेश का हवाला देकर डराते रहते हैं।

अब किराए की तैयारी 
नगर निगम प्रशासन ने निगम की आय बढ़ाने के लिए अपनी दुकानों का किराया भूमि सर्किल रेट के अनुसार रिवाइज करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव बोर्ड बैठक में भी रखा था, लेकिन हंगामे के कारण चर्चा नहीं हो पाई। हालांकि अब से पहले भी पार्षदों ने दुकानों का किराया बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन किराया बढ़ाया नहीं गया। अब माना जा रहा है कि यदि रोड पटरी में दर्ज 70 दुकानों पर भूमि सर्किल रेट के आधार पर किराया तय किया जाता है, तो एक दुकान का किराया कम से दो हजार रुपये और अधिक से अधिक चार हजार रुपये हो सकता है। 

अभिलेख खंगाले तो खुल गई पोल 
नगर निगम प्रशासन ने बोर्ड बैठक से पहले नगर निगम की दुकानों के किराए की फाइलें खंगालीं तो पूर्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल खुल गई। एफसी संतोष शर्मा ने पूरी फाइल को लेकर लिपिक से रिपोर्ट मांगी है।

जवाब-तलब किया जाएगा
हमारे सामने पूरा मामला नहीं आया है। यदि ऐसा है, तो दिखवाया जाएगा। 14 साल से फाइलों को क्यों दबाया गया। संबंधित अधिकारी, लिपिकों से जवाब तलब किया जाएगा। निगम के राजस्व से जुड़ा मामला है, जिसको लेकर निगम बेहद गंभीर है। - मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त

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