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जिला पंचायत चुनाव परिणाम : किसान आंदोलन और भितरघात, भाजपा को पड़ सकते हैं भारी 

Mon, 03 May 2021 03:08 AM IST
Dimple Sirohi अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 03 May 2021 03:08 AM IST
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Meerut District Panchayat Election Results: Kisan agitation and fratricide can cause to BJP
यूपी पंचायत चुनाव रिजल्ट 2021: मुजफ्फरनगर में पुलिस ने लाठियां फटकार कर भीड़ को हटाया। - फोटो : amar ujala
मेरठ जिला पंचायत सदस्यों के परिणाम पर सभी की नजर टिकी हुई हैँ। परिणाम तो सोमवार दोपहर बाद से ही आने शुरू होंगे। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद भाजपा के लिए यूपी के पंचायत चुनाव भी कोई खास उत्साहजनक होते नजर नहीं आ रहे हैं। भितरघात और किसानों आंदोलन से उपजी नाराजगी भाजपा को भारी पड़ सकती है।
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जनपद की सभी 33 सीटों पर भाजपा ने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। पिछले चुनाव में भाजपा के 10 सदस्य जीते थे। इस बार भाजपा का दावा था कि वह 20 से ज्यादा सदस्यों के जीतकर आने का था। मतगणना शुरू होने के बाद से जो रुझान आने शुरू हुए हैं, वह भाजपा के लिए बहुत ही चौंकाने वाले हैं। जिले की सबसे चर्चित सीट वार्ड 13 से दो बार से लगातार निर्वाचित होती आ रही भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री डा. मीनाक्षी भराला मैदान में थी। यहां पर विपक्षियों के बीच उनकी अपनी ही पार्टी के लोगों ने ऐसी व्यू रचना की कि वह कभी भी बढ़त बनाती नजर नहीं आई और देर रात तक मतगणना के रुझान में तीसरे नबंर पर रही।  
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वार्ड 32 में भाजपा ने रोहताश पहलवान को प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन भीतरीघात और विपक्षी चाल के आगे वह भी संकट कें फंसे नजर आ रहे हैं। उन्हें इस सीट पर भाजपा के बागी विकास उपाध्याय तगड़ी टक्कर देकर बढत बनाए हुए हैं।  
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हस्तिनापुर सीट पर अधिकांश प्रत्याशी विधायक दिनेश खटीक की पसंद से तय हुए हैं, लेकिन यहां पर किसी भी वार्ड में भाजपा का कोई प्रत्याशी मजबूती के साथ जीत की तरफ बढ़ता नजर नहीं आ रहा है। खरखौदा भी भाजपा प्रत्याशी दौड़ में पिछड़े हैं तो किठौर में भी यही स्थिति है। सिवालखास में सिर्फ एक सीट पर भाजपा प्रत्याशी एक तरफ जीत करता नजर आ रहा है। जबकि सरधना क्षेत्र में तीन प्रत्याशी जीती की तरफ कदम बढ़ाते नजर आ रहे हैँ।  
 

रालोद सपा को मिल रही संजीवनी 
देर रात तक के रुझान पर अगर नजर डालें तो चुनाव परिणाम बहुत ही चौंकाने वाले नजर आ रहे हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सपा और रालोद के साथ बसपा को भी मजबूती मिल रही है। लेकिन भाजपा को तगड़ा झटका मिलता नजर आ रहा है। 

जिला पंचायत अध्यक्ष सीट भी होगी प्रभावित
यदि भाजपा के 10 से भी कम सदस्य जीत कर आए तो भाजपा के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है। अध्यक्ष पद को लेकर सभी विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ एकजुट होकर खड़े नजर आएंगे। ऐसे में धन बल और सरकारी तंत्र की ताकत से भी अध्यक्ष पद को हासिल करना भाजपा के लिए बहुत ही मुश्किल भरा होगा।

आसपास के जिलों में भी कड़ा मुकाबला
सहारनपुर जिले में जिला पंचायत सदस्यों की 49 सीटों में रविवार रात दस बजे दो राउंड की गिनती के बाद चार सीटों पर भाजपा और 17 बसपा समर्थित प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए हैं। पांच सीटों पर आजाद समाज पार्टी समर्थित प्रत्याशी भी बढ़त बनाए हुए हैं।

बागपत जिला पंचायत चुनाव में यहां रालोद और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। प्राप्त रुझानों के मुताबिक यहां वार्ड छह और 19 पर भाजपा, वार्ड 15 में रालोद और 16 में सपा समर्थित प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए हैं। दो पर निर्दलीय प्रत्याशी आगे चल रहे हैं। 

 मुजफ्फरनगर जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भाजपा, रालोद, बसपा और सपा के समर्थित प्रत्याशी कई सीटों पर मुकाबले में बने थे। यहां भाकियू भी दो सीटों पर दम दिखा रही है। एक सीट पर आसपा समर्थित प्रत्याशी भी मुकाबले में है। 

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