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लूट के मोबाइल खपाने का अड्डा बना यूपी का ये जिला, हर रोज चोरी होते हैं 10 से 12 स्मार्टफोन

Thu, 11 Jul 2019 03:34 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 11 Jul 2019 03:34 PM IST
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Meerut district became a spot of selling looted mobile phone
लखनऊ क्राइम ब्रांच टीम - फोटो : अमर उजाला

चोरी-लूट के मोबाइल खपाने के मामले में यूपी का मेरठ जनपद एक खास अड्डा बन गया है। लखनऊ से पहले हरियाणा और पंजाब में  शोरूमों में हुई चोरी के मोबाइल भी यहां से बरामद हुए थे। आईएमईआई नंबर बदलने वाले गैंगों का भी पुलिस पर्दाफाश कर चुकी है। जिले में रोजाना 10 से 12 मोबाइल चोरी होते हैं या लूट लिए जाते हैं। 

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तत्कालीन एसएसपी अखिलेश कुमार ने मोबाइल रिकवरी सेल बनाया था, जो फिलहाल फेल है। चोरी-लूट के मोबाइल नेता या फिर पुलिस वाले ज्यादा चला  रहे हैं। बुधवार दोपहर लखनऊ पुलिस ने इसका खुलासा कर  दिया। लखनऊ से चोरी 36 मोबाइलों की लोकेशन मेरठ के नेताओं के घरों में मिली।

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एसपी क्राइम ने लगाई टीम 
लखनऊ क्राइम ब्रांच प्रभारी देवेंद्र सिंह के मिलने पर एसपी क्राइम ने देहलीगेट व लिसाड़ीगेट पुलिस को बरामदगी के निर्देश दिए। 36 मोबाइल देहली गेट, लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी और सदर बाजार क्षेत्र में होने बताए। पुलिस ने मोबाइलों की लोकेशन निकाली। 

फोन पहुंचाए, खुद नहीं आए 
चोरी के 36 मोबाइलों की लोकेशन मिलने के बाद पुलिस के फोन घनघनाए हैं। चोरी का नाम सुनते ही फोन को थाने पहुंचाया गया, लेकिन वह खुद नहीं आए। जिसमें पुलिस के पास भाजपा नेताओं ने फोन करके कहा कि उनको फोन चोरी की जानकारी नहीं थी। उन्होंने दुकान या फिर एजेंट से फोन खरीदा है। इसका वह सुबूत भी देने को तैयार हैं। अलग-अलग जगहों से आठ फोन आ गए। जिसमें चार भाजपा नेताओं के घर से आए। 

Meerut district became a spot of selling looted mobile phone
मोबाइल फोन बरामद - फोटो : अमर उजाला

तीन दिन से चल रहा सिलसिला 
लखनऊ क्राइम ब्रांच प्रभारी और पारा थाने के दरोगा विमल सिंह तीन दिन से मेरठ में डेरा डाले थे। मोबाइलों की बरामदगी के लिए पुलिस टीम लगातार उनकी लोकेशन ट्रेस कर रही थी। 36 मोबाइल में सिम थे और वह ऑपरेट थे। जिसके चलते पुलिस ने उनके मोबाइलों पर कॉल की, जोकि रिसीव हुए। चोरी का फोन सुनते ही कई फोन बंद हो गए, लेकिन पुलिस ने उनको ट्रेस कर लिया। 

सस्ते के चक्कर में फंसे भाजपाई 
पुलिस की जांच में सामने आया कि मोबाइल चोरी के थे, इसकी जानकारी खरीदने वालों को नहीं थी। लेकिन वह सस्ते मोबाइल मिलने के चक्कर में भाजपाई फंसे हैं। दुकानदारों ने उन्हीं को फोन दिए हैं, जिनका पुलिस से अच्छा तालमेल है। इसको लेकर अलग अलग चर्चाएं चल रही है। पुलिस का दावा है कि सभी मोबाइल जल्द बरामद कर लिए जाएंगे। 

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किसने बेचे मेरठ में मोबाइल 
तीन दिन से चोरी के मोबाइल बरामद करने का सिलसिला चल रहा है। जहां से फोन आए, उन्होंने तर्क  दिया कि उन्होंने दुकान से खरीदा है। बिल भी दिखाया। कोई दोस्त द्वारा गिफ्ट देना बता रहा है। लेकिन बड़ा सवाल है कि आखिर ये चोरी के मोबाइल लखनऊ से लाकर मेरठ में किसने बेचे हैं। वे कौन बदमाश हैं, जिसने मोबाइल चोरी किये थे। इसका अभी तक पुलिस खुलासा नहीं कर सकी। 

लखनऊ क्राइम ब्रांच शहर में आई है। चोरी के मोबाइलों की लोकेशन मिल गई हैं। चोरी के मोबाइलों को बरामद कराने में मेरठ पुलिस उनका सहयोग कर रही है। जिसमें कई मोबाइल मिल भी गए है। पुलिस अभी मोबाइलों को बरामद करने में जुटी हुई है। -रामअर्ज, एसपी क्राइम मेरठ 

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