फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Meerut, Dhaniram said Central Government will make laws in Parliament for construction of Ram Temple

संघ के प्रांत प्रचारक बोले- राम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाए केंद्र सरकार

Fri, 16 Nov 2018 12:28 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 16 Nov 2018 12:28 PM IST
विज्ञापन
Meerut, Dhaniram said Central Government will make laws in Parliament for construction of Ram Temple
आरएसएस व विहिप की बैठक को संबोधित करते प्रांत प्रचारक धनीराम - फोटो : अमर उजाला

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी भी तरह राम मंदिर के वादे को पूरा करना चाहती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में शीघ्र सुनवाई से इंकार के बाद लगे झटके से भाजपा को उभारने के लिए आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने साझा रणनीति तैयार की है। विहिप के आह्वान और संघ के निर्देशन में 9 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ा धरना होगा, जिसमें केंद्र सरकार पर राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने या संसद में कानून बनाने का दबाव बनाया जाएगा। 

विज्ञापन


संघ नेतृत्व के निर्देश पर गुरुवार को शताब्दीनगर स्थित माधवकुंज में पश्चिमी क्षेत्र की बैठक हुई। जिसमें मेरठ, मुरादाबाद और सहारनपुर मंडल के 14 जनपदों से आरएसएस, विहिप, बजरंगदल, भाजपा और उसके सभी अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों के अलावा प्रदेश सरकार के छह मंत्री और अधिकांश विधायक मौजूद रहे।
विज्ञापन


पहले सत्र में संघ के प्रांत प्रचारक धनीराम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास विवाह, वाह्य संबंध, समलैंगिकता जैसे विषयों के लिए समय है। आतंकी अफजल गुरू और कसाब के लिये देर रात सुनवाई की जा सकती है। शहरी नक्सलियों के बचाव में डाली गयी याचिकाएं प्राथमिकता के आधार पर सुप्रीम कोर्ट सुनती है, लेकिन सवा सौ करोड़ हिंदुओं के आराध्य राम की जन्मस्थली पर बनाए जाने वाला मंदिर उनकी प्राथमिकता में नहीं है। 29 अक्टूबर की हठधर्मिता के बाद अब जल्द न्याय की आशा बिल्कुल क्षीण हो चुकी है। इसलिए हिंदू समाज के जागरण द्वारा देश को जगाने का समय आ पहुंचा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

धनीराम ने कहा कि देर से मिले न्याय का अर्थ- न्याय की हत्या होने जैसा है। देश के तमाम न्यायालयों को जल्दी से जल्दी मुकदमे निपटाने का आदेश देने वाला सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे को अपील के सात साल बाद भी यदि इस प्रकार टालता है, तो क्या यह उचित समय नहीं है कि अध्यादेश अथवा संसद द्वारा कानून बनाने की मांग उठायी जाये? इंदिरा गांधी के चुनाव का मसला सुप्रीम कोर्ट में अटका था, तब भी उन्होंने संसद से अपने पक्ष में कानून बनवाकर मुकदमा जीता था। मंदिर मुद्दा कोर्ट में लंबित होते हुए भी उसके पक्ष में कानून क्यों नहीं बन सकता?

उन्होंने राम मंदिर के इतिहास और साक्ष्यों पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि अब संतों का धर्मादेश है कि अयोध्या में प्राचीन राम मंदिर का भव्य स्वरूप पुन: प्राप्त किया जाए। श्रीराम के समान ही श्रीराम जन्मस्थान हिंदुओं का आराध्य देव है। पूरे देश में अयोध्या, नागपुर और बैंगलूरु में 25 नवंबर और दिल्ली के रामलीला मैदान में 9 दिसंबर को रिकार्ड तोड़ भीड़ जुटाकर भावनाओं का प्रदर्शन करना होगा। हिंदू समाज के मान-सम्मान के साथ संघ और समविचारी संगठन कमर कसकर खड़े हैं, यह सिद्ध करना होगा।

ये हुईं घोषणाएं
- 9 दिसंबर को राम मंदिर निर्माण को 10 लाख हिंदू पहुंचेंगे दिल्ली 
- केंद्र सरकार पर बनाया जायेगा अध्यादेश लाने या कानून बनाने का दबाव 
- मेरठ प्रांत से 3.50 लाख लोगों को दिल्ली लेकर जाने का लक्ष्य हुआ तय 

पुन: पाना है राष्ट्रीय गौरव: टोंक
संघ के क्षेत्र संघचालक सूर्यप्रकाश टोंक ने समापन सत्र में कहा कि भारत के राष्ट्रीय गौरव को पुन: पाने के लिये राम मंदिर का पुनर्निर्माण जरूरी है। बाबर के सेनापति ने मंदिर तोड़कर भारत के गौरव पर चोट की थी। भारत की अस्मिता को कुचला था। भारतीयों को गुलाम होने का निरंतर आभास कराया था। अब समय है, वह राष्ट्रीय अपमान धो दिया जाए।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed