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मेरठ: 700 करोड़ की जमीन पर डेवलपमेंट का प्लान धड़ाम, MDA की तीन योजनाएं फंसीं

Fri, 25 Jan 2019 04:20 PM IST
कपिल kapil अतिम मुदगल, अमर उजाला, मेरठ
अतिम मुदगल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 25 Jan 2019 04:20 PM IST
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Meerut, Development Plan fail on MDA's 700 Crore Land
मेरठ विकास प्राधिकरण कार्यालय - फोटो : अमर उजाला

मेरठ विकास प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में लोगों के कब्जे में फंसी छह लाख वर्ग मीटर जमीन पर डेवलपमेंट का प्लान धड़ाम हो गया है। इसी जमीन में से एमडीए को किसानों को भी प्लाट देने हैं और समायोजन भी करना था। यहां कॉलोनी, कॉलेज, व्यावसायिक भवन बनाए जाने थे। त्रिकोण में फंसी जमीन पर सही प्लान बनेगा, तभी तीन योजनाओं में विकास होगा। 

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एमडीए ने अपनी जमीन के कब्जों की पैमाइश कराई है। दरअसल, लोहियानगर, वेदव्यासपुरी और गंगानगर में एमडीए ने प्रतिकर लेना शुरू कर दिया है। समझौता हुआ था कि एमडीए यहां प्रतिकर के बदले भूखंड देगा, पर जिन किसानों के भूखंड 30 मीटर से कम बन रहे हैं उन्हें धनराशि दी जा रही है। चूंकि इससे कम माप के भूखंड एमडीए के पास हैं ही नहीं। एमडीए ने साफ कहा है कि जहां-जहां किसान कब्जे नहीं दे रहे हैं, वहां समझौता लागू नहीं माना जा जाएगा।

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होने हैं तीन काम
इस जमीन पर तीन काम होने हैं। पहला काम यह है कि इसी जमीन में नियोजन किया जाना है। यानी एमडीए इसमें कॉलोनी, कॉलेज, व्यावसायिक भवन आदि क्या करेगा, इसकी पूरी प्लानिंग होनी है। दूसरा, यहां किसानों को भी भूखंड दिए जाने हैं, जिसका काफी भाग इसी जमीन से जाना है। तीसरा, जिन किसानों को भूखंड मिलने हैं और उन्होंने जमीन कब्जा रखी है, उनके प्लाट का समायोजन इसी जमीन पर होना है। शर्त यह रहेगी कि समायोजन के बाद जो जमीन बचेगी, वह किसानों को छोड़नी होगी।

नहीं हो सका नियोजन
एमडीए की बनाई पूरी प्लानिंग धड़ाम हो गई है। दरअसल एमडीए ने यहां डेवलेपमेंट के लिए प्लानिंग तो बना ली, पर अभी यह तय ही नहीं हुआ है कि कितनी जमीन यहां भूखंड में जाएगी और कितनी का समायोजन होगा। योजना बनाने वालों का कहना है कि जो भी काम होगा, वह विस्तृत रूप से करना पड़ेगा। यह नहीं हो सकता कि जमीन के बड़े भाग के बीच में किसी को भूमि समायोजन कर दे दी जाए या छोटे भूखंड काट दिए जाएं। ऐसे में सारी प्लानिंग नए सिरे से करनी होगी।

ज्यादा है रेट
एमडीए की योजनाओं में रेट 10 से 20 हजार वर्ग मीटर को पार कर रहा है। औसत भाव 10 से 15 हजार रुपये वर्ग मीटर ही मानें, तो यह जमीन 700-800 करोड़ की है। एमडीए अधिकारी इस जमीन पर प्लान बना रहे हैं कि कैसे इस पर कब्जा लिया जाए और कैसे इसका इस्तेमाल किया जाए।

किसान बनकर कब्जाई जमीन
एमडीए के सर्वे में सामने आया है कि तीनों योजनाओं की 68 हेक्टेयर यानी छह लाख 80 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जे हैं। कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने ऐसी जमीन पर किसान बनकर कब्जा किया है। जबकि उनका इस जमीन से कोई लेना-देना नहीं हैं। इसके अलावा ऐसी जमीन भी काफी है, जो किसानों ने ही कब्जा रखी है। कई योजनाओं में किसानों ने अधिगृहीत जमीन पर ही बाउंड्री बना रखी है। हालांकि किसानों का दावा है कि उन्होंने इस जमीन का मुआवजा नहीं उठाया है, पर एमडीए अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा एडीएम एलए कार्यालय में जमा कराया जा चुका है। यह जमीन अर्जन से मुक्त नहीं है और नियोजन में शामिल है। ऐसे लोगों की अलग से सूची बनाई जा रही है।

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लगभग इतने हेक्टेयर पर हैं कब्जे
- सैनिक विहार    :    10
- शताब्दीनगर    :    16
- लोहियानगर    :    15
- डिफेंस एन्क्लेव :    13
- वेदव्यासपुरी    :     14
वर्ग गज में अधिगृहीत जमीन
- सैनिक विहार    :     1210036
- शताब्दीनगर    :     4704000
- लोहियानगर    :     2937108
- डिफेंस एन्क्लेव    :1305600
- वेदव्यासपुरी    :     3897281
- गंगानगर    :     451.51

नए सिरे से सर्वे करा रहे हैं। यह काफी जमीन है। इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में नहीं बांट सकते हैं। जमीन कब्जा मुक्त होगी, तभी समझौता मानेंगे। - साहब सिंह , वीसी एमडीए

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