डेनमार्क प्रकरण: पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की जमानत खारिज, सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ देने की थी घोषणा
डेनमार्क प्रकरण : पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की जमानत खारिज कर दी गई है। याकूब ने मोहम्मद पैगंबर का विवादित कार्टून बनाने पर डेनमार्क के कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ देने की घोषणा की थी।
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मेरठ में 16 साल पुराने मुकदमे में पुलिस ने पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी के खिलाफ दोबारा से केस डायरी बनाकर चार्जशीट तैयार की है। आरोप था कि 2006 में याकूब ने मोहम्मद पैगंबर का विवादित कार्टून बनाने पर डेनमार्क के कार्टूनिस्ट का सिर कलम करने वाले को 51 करोड़ देने की घोषणा की थी। जिसे लेकर शहर में अशांति का माहौल गर्माया था। इस मुकदमे में याकूब की जमानत अर्जी को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
अभियोजन अधिकारी शालू वर्मा ने बताया कि सुनील भराला ने आठ अगस्त, 2007 को देहली गेट मेरठ में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी पर दो समुदाय के बीच अशांति फैलाने का आरोप लगाया था। अभियोजन अधिकारी ने न्यायालय में कहा कि आरोपी द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रवृत्ति का है। अभियुक्त सात जनवरी, 2023 से न्यायिक अभिरक्षा में जेल में बंद है। न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
31 मार्च, 2022 को याकूब और उनके दोनों बेटों सहित 17 लोगों पर अवैध तरीके से मीट फैक्टरी चलाने का आरोप लगाकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। उसके बाद नवंबर में पुलिस ने याकूब, दोनों बेटों इमरान, फिरोज सहित सात लोगों पर गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया था। इमरान और फिरोज को दोनों मुकदमों में जमानत मिल गई। हालांकि अभी तीनों पिता-पुत्र जेल में हैं।
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याकूब की फैक्टरी से पकड़े मीट को सशर्त रिलीज करने के आदेश
जिला जज रजत सिंह जैन की अदालत ने हाजी याकूब की फैक्टरी अल फहीम मीटेक्स प्राइवेट लिमिटेड से जब्त किए गए मीट को सशर्त रिलीज करने के आदेश पारित किए हैं। आदेश के अनुसार, पूर्व में जिला जज ने मीट का पुन: परीक्षण करने के आदेश दिए थे। उसकी रिपोर्ट 13 फरवरी, 2023 तक अदालत में प्रस्तुत करनी थी। अदालत में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री द्वारा मीट की रिपोर्ट 21 फरवरी तक दी जाएगी और आगे समय बढ़ाने का निवेदन किया।
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अदालत ने मामले को देखते हुए कहा कि सात मार्च, 2023 को उक्त मीट एक्सपायर हो जाएगा। इसके बाद न्यायालय के आदेश का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। वहीं, इस बात को भी ध्यान में रखना जरूरी है कि यदि जांच रिपोर्ट में मिलावट पाई जाती है तो ऐसी स्थिति में वह मीट इंसान के खाने योग्य नहीं होगा। इन परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए उत्तरदाता फैक्टरी मालिक से इस बात का अंडरटेकिंग लेकर कि वह 21 फरवरी तक रिलीज हुए मीट को बाजार में विक्रय नहीं करेगा एवं यदि लेबोरेट्री की रिपोर्ट में मीट खाने योग्य नहीं पाया जाता तो संबंधित अधिकारियों के समक्ष उक्त मीट को नष्ट कर देगा। इन शर्तों के साथ अदालत ने मीट रिलीज करने के आदेश पारित किए हैं।