Meerut: चार पहियों पर दौड़ता भ्रष्टाचार..., निगम ने कमिश्नर को दी स्कूटी नंबर की गाड़ी
मेरठ नगर निगम में गाड़ियों के किराये और डीजल भुगतान में बड़ा घोटाला सामने आया है। कमिश्नर कार्यालय के नाम पर स्कूटी नंबर से फर्जी गाड़ी चलाई जा रही है, जिससे हर महीने लाखों रुपये का दुरुपयोग हो रहा है।
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यह तो भ्रष्टाचार की हद है। नगर निगम अफसरों ने कमिश्नर को भी नहीं बख्शा। लिखापढ़ी में कमिश्नर कार्यालय के नाम पर एक गाड़ी निगम द्वारा दे रखी है, जिस पर स्कूटी का नंबर है।
प्रतिमाह 27 हजार रुपये का भुगतान और डीजल अलग से खर्च होता है। इसके अलावा भी 19 गाड़ियां निगम अफसरों को दे रखी है, जिसमें ड्राइवरों के भुगतान और तेल का खेल होने का गड़बड़झाला है। जिस कंपनी से नगर निगम ने किराये पर गाड़ी ली है, उसके अनुबंध में भी बहुत सारी अनियमितता हैं।
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हुंडई की एक्सेंट, स्कार्पियो और बोलेरो सहित 20 गाड़ियां नगर निगम ने अफसरों के लिए एक ठेकेदार से किराए पर ले रखी हैं। उसमें 14 गाड़ी मय चालक 27 हजार रुपये माह और बिना चालक वाली गाड़ी के 22 हजार रुपये प्रतिमाह निगम देता है। एक नौकरी पर कई महीने से दो वेतन लेने वाले चालक मुजाहिद के अलावा भी अन्य चालक का कारनामा उजागर होना बाकी है।
निगम में चलने वाली उक्त 20 गाड़ी की अमर उजाला ने पड़ताल की, जिसमें एक गाड़ी (यूपी-15 ईएच 4244) कमिश्नर कार्यालय में देना निकला। उक्त गाड़ी का नंबर स्कूटी का मिला। सवाल उठता है कि क्या स्कूटी का नगर निगम पेट्रोल-डीजल सहित हर महीने करीब 50 हजार भुगतान कर रहा है।
उक्त गाड़ियों की सूची में मुख्य अभियंता निर्माण पीके सिंह का नाम तक नहीं है। मुख्य अभियंता निर्माण जिस गाड़ी से चल रहे है, उसका भुगतान कैसे हो रहा है। यह भी जांच का विषय है। इसके अलावा अन्य गाड़ियों और ड्राइवरों के भुगतान में गड़बड़झाला हो सकता है।
ठेकेदार के अनुबंध पर भी सवाल
भाजपा पार्षद उत्तम सैनी ने गाड़ी को किराए पर देने वाले पर भ्रष्टाचार और अनुबंध में अनियमितता करने का मामला दो महीने पहले पांडवनगर में होने वाली निगम की बोर्ड बैठक उठाया था। इस भ्रष्टचार के जिम्मेदार निगम अफसर है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अभी उन्होंने चुप्पी साधी हुई है।
केवल चालक मुजाहिद पर कार्रवाई करने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का प्रयास लगातार चल रहा है। जिस कंपनी से गाड़ी किराए पर ले रखी है, उसमें भी विभिन्न अनियमितता हैं। चार साल से एक ही ठेकेदार नगर निगम को गाड़ी किराए पर दे रहा है। जबकि जैम पोर्टल पर नई निविदा के तहत शासनादेश हैं। गाड़ियां टैक्सी में पंजीकृत तक नहीं हैं। जिससे परिवहन विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
मुजाहिद पर मुकदमे की तैयारी, चुप्पी साध रहे अधिकारी
नौकरी एक पर अलग-अलग दो जगह से वेतन लेने वाले गाड़ी चालक मुजाहिद पर मुकदमे की तैयारी नगर निगम ने शुरू कर दी। वरिष्ठ प्रभारी वाहन डिपो एवं अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार ने प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह को निर्देश दिए कि मुजाहिद पर मुकदमा दर्ज कराए। निगम की जितनी वित्तीय हानि हुई है, उसकी वसूली भी मुजाहिद से ही कराई जाए।
सवाल उठता है कि गाड़ी चालक की सेवा समाप्त कर उसके खिलाफ मुकदमा करने की तैयारी निगम ने कर दी, लेकिन जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई करने पर चुप्पी साध ली। जबकि अधिकारियों के हस्ताक्षर से ही दोनों जगह से वेतन की संस्तुति कई महीने से हो रही थी। हालांकि, नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने इस प्रकरण में विभागीय जांच कराने के भी निर्देश दिए है।
मामला गंभीर हैं और इसका जांच कराई जाएगी। नई निविदा जल्द कराएंगे। लिखापढ़ी में स्कूटी के नंबर पर गाड़ी चलने के मामले में जिसकी भी लापरवाही रही है, उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। कमिश्नर कार्यालय की गाड़ी पर स्कूटी का नंबर है, इसकी जांच कराई जाएगी। - सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त
जिलाधिकारी के माध्यम से सभी विभागों को नोटिस जारी कराकर गाडियों की पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। किसी भी प्राइवेट गाड़ी को कॉमर्शियल में इस्तेमाल नहीं किया सकता है। यह सीधे टैक्स की चोरी है। ऐसी सभी गाड़ियों को अभियान चलाकर जब्त किया जाएगा। - राजेश कर्दम, एआरटीओ।