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मेरठ षड्यंत्र मामला: 27 आंदोलनकारियों को सुनाई गई थी सजा, विरोध देख ब्रिटिश शासकों में फैल गई थी घबराहट

Mon, 16 Jan 2023 05:46 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 16 Jan 2023 05:46 PM IST
सार

मेरठ षड्यंत्र मामला : 90 साल पहले 27 आंदोलनकारियों को एक साथ सजा सुनाई गई थी।वहीं विरोध देख ब्रिटिश शासकों में घबराहट फैल गई थी।

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Meerut Conspiracy Case: 27 agitators were sentenced but Panic spread among British rulers after seeing protest
मेरठ में जेल के बाहर बैठे बंदी बनाए गए क्रांतिधरा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

1857 क्रांति की धरा मेरठ ने आजादी की लड़ाई में कई बार अलख जगाई है। 90 साल पहले आज ही के दिन (16 जनवरी 1933) मेरठ षड्यंत्र मामले (कान्सप्रेसी केस) में 27 श्रमिक आंदोलनकारियों को सजा सुनाई गई थी। इसमें बड़ी और कड़ी सजा मुजफ्फर अहमद को आजीवन काले पानी की दी गई थी, जबकि एसए डांगे को 12 साल की सजा सुनाई गई थी।

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श्रमजीवी वर्गों में कम्युनिस्टों के बढ़ते हुए प्रभाव और विरोध को देखकर ब्रिटिश शासकों में घबराहट फैल गई थी, जिस कारण मार्च 1929 में ब्रिटिश सरकार ने 32 श्रमिक नेताओं को बंदी बना लिया था। इन्हें कमिश्नरी आवास चौराहे के पास जेल बनाकर रखा गया था। इनमें मेरठ से प्रोफेसर धर्मवीर चौधरी और गौरीशंकर भी थे, जबकि तीन ब्रिटिश साम्यवादी फिलिप स्प्रेड, बेन ब्रेडले और लेस्टर हचिंसन थे। 
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प्रो. धर्मवीर को कुछ दिन बाद ही छोड़ दिया गया था, जबकि बाकी 31 पर मेरठ में मुकदमा चलाया गया। इन्हें बचाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, एम ए अंसारी, कैलाश नाथ काटजू और एमजी छागला ने पैरवी की थी। बंगाली ट्रेड यूनियन नेताओं शिबनाथ बनर्जी, किशोरी घोष और बीएन मुखर्जी को बरी कर दिया गया था। डॉ. आर ठेंगडी की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो गई थी। 27 आंदोलनकारियों को दो साल से लेकर आजावीन काले पानी तक की सजा दी गई थी।

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