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पश्चिमी यूपी में इस बार कम रहेगी ठंड, 'अलनीनो' है बड़ी वजह

Sat, 01 Dec 2018 02:47 PM IST
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ
मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 01 Dec 2018 02:47 PM IST
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Meerut, cold will remain low in western UP and elnino is the reason
फाइल फोटो

वायुमंडल में अलनीनो की स्थिति कमजोर होने के कारण इस बार नार्थ वेस्ट रीजन में ठंड सामान्य रहने के आसार हैं। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है।

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मौसम विशेषज्ञों की माने तो इस बार मौसम में बदलाव का कारण बनने वाले अलनीनो की स्थिति नार्थ वेस्ट रीजन में कमजोर है। इस कारण दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश पंजाब और यूपी में इस बार ठंड सामान्य ही रहेगी। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि कड़ाके की ठंड का असर एक-दो हफ्ते ही रहेगा। बताया कि जम्मू कश्मीर में ठंड का असर सामान्य से अधिक देखने को मिलेगा। वहां पर अलनीनो की स्थिति मजबूत है। अलनीनो की कमजोर स्थिति से तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रह सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में जो स्थिति है, उससे सर्दी सामान्य ही रहने के आसार हैं।  
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क्या है अलनीनो
प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से पूरे एशिया और पूर्वी अफ्रीका के मौसम में परिवर्तन हो जाता है। इसी वजह से दक्षिण अमेरिका में भारी बारिश के साथ बाढ़ की संभावना बनती है। भारत के पश्चिमी तट और मध्य भागों में अच्छी बारिश होती है। कभी-कभी यह समीकरण उलट जाता है। वायु दाब के एक बदलाव दक्षिणी कम्पन से भी अलनीनो का सीधा संबंध बताया जाता है। असल में हवाओं के बहाव में आने वाले बदलाव के लिए दिया गया यह भौगोलिक नाम है। अलनीनो स्पेनिश शब्द है।  
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जेट स्ट्रीम पर भी पड़ता है असर
प्रशांत महासागर के पूर्वी तथा पश्चिमी भाग के जल सतह पर तापमान में अंतर होने से हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर विरल वायुदाब क्षेत्र की ओर बढ़ती हैं। वायुमंडल में भी समुद्र तल के ऊपर हवाई धाराएं बहती रहती हैं। अलनीनो के कारण लगभग 10 से 25 किलोमीटर ऊपर तक वायुमंडल के बीच वाले स्तर में बहने वाली जेट स्ट्रीम पर भी असर पड़ता है।

दिखता है असर
जिस साल अलनीनो की सक्रियता बढ़ती है, उस साल दक्षिण पश्चिम मानसून पर उसका निश्चित असर पड़ता है। इससे पृथ्वी के कुछ हिस्सों में भारी वर्षा होती है, तो कुछ हिस्से अकाल की मार सहते हैं। भारत में यह मानसून सीजन में ही अपना असर दिखाता है।  

प्रशांत, हिन्द महासागर में असर
प्रशांत महासागर से लेकर हिन्द महासागर के भारतीय ऑस्ट्रेलियाई क्षेत्र के वायुदाब में होने वाला परिवर्तन ही अक्सर दक्षिणी कम्पन को जन्म देता है। जब प्रशांत महासागर में उच्च दाब की स्थिति होती है, तब अफ्रीका से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक हिन्द महासागर के दक्षिणी हिस्से में निम्न दाब की स्थिति पाई जाती है। 

इस बार अलनीनो की स्थिति कमजोर है। इसकी वजह से ठंड कम रहने के आसार दिख रहे हैं। हालांकि आने वाले समय में मौसम में कुछ बदलाव दिखाई दे सकता है। नॉर्थ रीजन में इसका असर ज्यादा रहेगा। -डॉ. यूपी शाही, मौसम विशेषज्ञ, कृषि विवि  

अलनीनो का असर जिस वर्ष रहता है, उस साल सर्दी का असर ज्यादा नहीं दिखता है। ठंड सामान्य रहती है। अभी सामान्य स्थिति चल रही है। आने वाले समय में इसका असर बढ़ने और मौसम बदलने के आसार हैं। -डॉ. एन सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, आईआईएफएसआर

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