Meerut: स्मॉग में लिपटा शहर, AQI 340 पहुुंचा, सांस लेना दूभर, चिकित्सक दे रहे ये काम करने की सलाह
वायु प्रदूषण से सांसों पर संकट गहराने लगा है। शनिवार को मेरठ का एक्यूआई 384 से घटकर 340 के स्तर पर पहुंच गया, लेकिन स्मॉग से राहत नहीं मिली। इस कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत व आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वायु प्रदूषण से सांसों पर संकट गहराने लगा है। शनिवार को मेरठ का एक्यूआई 340 के स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद अस्थमा के मरीजों को सांस में तकलीफ, लोगों को आंखों में जलन की समस्या होने लगी है। डॉक्टरों ने सांस के मरीजों को समय से दवा लेने और धुंध से बचने की सलाह दी है। इसके अलावा मास्क या रूमाल के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।
तेजी से बढ़ रहे वायु गुणवत्ता सूचकांक के कारण शहर पर स्मॉग की चादर छाने लगी है। मेरठ में शनिवार को सूचकांक 340 दर्ज किया गया। जिले के भीतर सबसे अधिक प्रदूषित इलाका पल्लवपुरम रहा। यहां सूचकांक 383 के स्तर पर पहुंच गया। जयभीमनगर में 313, गंगानगर में 323 एक्यूआई दर्ज किया गया।
गिरा तापमान, बढ़ने लगी ठंड
शनिवार को दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इससे ठंड का अहसास बढ़ने लगा है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि तापमान में गिरावट का दौर बना रहेगा। शनिवार को दिन का तापमान 29.1 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
स्मॉग खतरनाक...रोगी हो सकते हैं फेफड़े, करें बचाव
मेरठ में सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि स्मॉग चिंता का विषय है। इस मौसम में सांस के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। अस्थमा, साइनोसाइटिस और सांस के अन्य रोगों के अलावा छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग भी इसका शिकार होते हैं।
सांस के मरीज अपनी दवाएं समय से लें। जहां तो हो सके धुंध में जाने से बचें। फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि स्मॉग धुएं और प्रदूषण का मिश्रण होता है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इससे आंखों में जलन, स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़ों संबंधी बीमारी हो सकती है।