{"_id":"6a075b5b20950cc2680e57e0","slug":"meerut-big-update-in-kapsaad-case-accused-party-will-challenge-the-order-of-medical-examination-2026-05-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Meerut: कपसाड़ कांड में सामने आया बड़ा अपडेट, मेडिकल परीक्षण के आदेश को चुनौती देगा आरोपी पक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut: कपसाड़ कांड में सामने आया बड़ा अपडेट, मेडिकल परीक्षण के आदेश को चुनौती देगा आरोपी पक्ष
Fri, 15 May 2026 11:14 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Fri, 15 May 2026 11:14 PM IST
सार
Meerut News: मेरठ के सरधना स्थित कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या कर उनकी बेटी को अगवा कर लिया गया था। इस मामले में आरोपी जेल में है और उसके बालिग या नाबालिग होने को लेकर असमंजस बना हुआ है।
विज्ञापन
कपसाड़ में पुलिस ने सीमाएं कर दी थीं सील। फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सरधना के कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या और उनकी बेटी के अपहरण के आरोपी की आयु का असमंजस अब तक समाप्त नहीं हुआ है। किशोर न्याय बोर्ड ने आयु निर्धारण के लिए उसका मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया है। इसके बाद आरोपी के एक्सरे कराकर मेडिकल परीक्षण की भी शुरू कर दी गई है। अब प्रतिवादी पक्ष ने किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के खिलाफ शनिवार को जिला न्यायालय में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल करने का दावा किया है।
विज्ञापन
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम का कहना है कि मेडिकल परीक्षण के आदेश को कानूनी आधारों पर चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 94 के तहत यदि स्कूल से संबंधित मान्य प्रमाणपत्र उपलब्ध हों तो मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य नहीं होता।
विज्ञापन
विज्ञापन
उनका तर्क है कि मेडिकल परीक्षण के जरिए जन्मतिथि या वास्तविक आयु का सटीक निर्धारण करना भी हमेशा संभव नहीं माना जाता। आरोपी की कक्षा पांच और कक्षा दस के शैक्षणिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि एक समान दर्ज है। उसके आधार पर वह नाबालिग है। ऐसे में मेडिकल परीक्षण की आवश्यकता नहीं है।
हाल ही में आए प्रदीप कोहली बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्णय का भी हवाला न्यायालय में दिया जाएगा। उस मामले में कक्षा पांच और कक्षा दस के दस्तावेजों में उम्र अलग-अलग होने के बावजूद अदालत ने कक्षा दस के रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी थी।