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यूपी: दरोगा-सिपाही पर हमला, जांबाज अफसरों ने आरोपी बदमाश को मारी गोली, गिरफ्तार

Tue, 01 Jan 2019 05:34 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Priyesh Mishra Updated Tue, 01 Jan 2019 05:34 PM IST
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Meerut, attack on police, and officials shot the accused and arrested
अस्पताल में भर्ती पुलिसकर्मियों को देखने पहुंचे अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में दरोगा सुनील कुमार और सिपाही उपेंद्र सिरोही को चाकू घोंपने के आरोपी युवक को 12 घंटे बाद ही पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया। नौचंदी ग्राउंड में हुई मुठभेड़ के दौरान आरोपी के पैर में गोली लगी। उससे एक तमंचा भी पुलिस ने बरामद किया है।

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नौचंदी थाने में तैनात दरोगा सुनील कुमार एल-ब्लॉक चौकी इंचार्ज हैं। रविवार रात वह सिपाही उपेंद्र सिरोही के साथ गश्त पर थे। रात करीब 12 बजे वापस चौकी जाते वक्त रास्ते में पड़ने वाली जैदी सोसायटी के बाहर एक युवक हाथ में चाकू लिए खड़ा दिखा।
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दरोगा सुनील कुमार ने कार रोकी और सिपाही उपेंद्र सिरोही की मदद से युवक को दबोचकर चाकू छीन लिया। युवक ने अपना नाम जैदी सोसायटी निवासी आतिफ बताया। इसी दौरान युवक का पिता नजमुद्दीन उर्फ नजमू भी आ गया।

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एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि आतिफ का पिता पहले कोर्ट में पेशकार था। करीब दो साल पहले ही वह रिटायर हुआ है। परिजनों ने पुलिस को बताया कि आतिफ का पहले अपने परिवार में झगड़ा हुआ था। वह परिजनों से मारपीट कर घर से निकला था। उसके पास चाकू कहां से आए, उसका पता लगाया जा रहा है।

परिजनों ने पुलिस को बताया कि आतिफ नशे की लत में पड़ चुका है। उसकी इस आदत से पूरा परिवार परेशान है। कुछ दिन पहले वह नशामुक्ति केंद्र से आया है। आते ही फिर से नशा शुरू कर दिया।

सीओ सिविल लाइन राम अर्ज ने बताया कि पिता ने आतिफ को नशेड़ी बताते हुए उसे छोड़ने की गुहार लगाई। सिपाही ने जैसे ही पकड़ ढीली की तो युवक ने अंटी से दूसरा चाकू निकालकर सिपाही को घोंपना शुरू कर दिया। दारोगा ने पकड़ने की कोशिश की तो युवक ने उन पर भी हमला बोल दिया। चाकू के कई वारों से सिपाही व दरोगा को लहूलुहान कर आरोपी फरार हुआ था। घायल दरोगा व सिपाही अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं।

ये था पूरा मामला
चौकी इंचार्ज सुनील कुमार और सिपाही उपेंद्र ने सिरफिरे को दबोचने के लिए साहस तो दिखाया। लेकिन सिरफिरे की तलाशी न लेने की लापरवाही भारी पड़ गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने बड़ी वारदात होने से बचा ली। लेकिन सवाल यह भी है कि पुलिसकर्मियों ने वही फिर लापरवाही दोहराई, जो पूर्व में कई बार अनहोनी का कारण बन चुकी है। 

सोमवार देर रात करीब 12:30 बजे का समय था। उस समय शहर नए साल के स्वागत में डूबा था। इस बीच एल ब्लॉक चौकी इंचार्ज सुनील कुमार को सूचना मिली थी कि जैदी फार्म चौकी के पास एक व्यक्ति हाथ में चाकू लेकर घूम रहा है। यह सूचना आसपास के लोगों ने पुलिस को दी थी। यह भी कहा था कि वह सिरफिरा इधर-उधर घूमते हुए बड़बड़ा रहा है कि ‘कोई भी सामने आया तो आज कत्ल ही कर दूंगा’।

इस सूचना पर दरोगा सुनील अपने साथ सिपाही उपेंद्र को लेकर मौके पर पहुंचे तो बिना देरी किए उस सिरफिरे को पकड़ लिया। लेकिन लापरवाही में गच्चा खा गए। वह सिरफिरा पूरी तैयारी से था और पुलिसकर्मी उसे कमजोर मानकर उस पर झपट पड़े। उसके हाथ से चाकू तो छीन लिया। लेकिन तलाशी लेने में लापरवाही कर दी। सिरफिरे को यही मौका मिला और उसने जींस से दूसरा चाकू निकालकर दरोगा पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। बीच-बचाव में सिपाही भी घायल हो गया।

एसपी सिटी रणविजय सिंह का कहना था कि हमलावर नशे में था। वह किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की कोशिश में था। कई बार वह जैदीफार्म सोसायटी के गेट तक भी पहुंचा था। एसपी सिटी ने बताया कि सिपाही और दरोगा की हालत ठीक है। लेकिन दोनों काफी घायल हुए हैं। आरोपी किसी की जान भी ले सकता था। जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लेंगे।

लगातार बढ़ रहे पुलिस पर हमले
नौचंदी क्षेत्र में दरोगा और सिपाही पर हमले की यह पहली घटना नहीं है इससे पहले भी शहर और देहात में पुलिसकर्मियों पर हमले होते रहे हैं। करीब तीन साल पहले सूरजकुंड स्थित किशोर संरक्षण गृह में किशोरों ने तलाशी का विरोध करने पर नौचंदी थाने के सिपाही ओमप्रकाश पर चाकू से हमला बोल दिया था। किशोरों ने सिपाही को पीट-पीटकर मार डाला था। वहीं, लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में ही करीब तीन साल पहले आधी रात को गश्त कर रहे फैंटम सिपाही एकांत यादव पर भी बदमाशों ने हमला बोल दिया था।

मुठभेड़ के दौरान सिपाही एकांत की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मुठभेड़ में नूरा नाम का बदमाश भी मारा गया था। करीब डेढ़ साल पहले परीक्षितगढ़ में बदमाशों ने सिपाही और दरोगा पर हमला कर दिया था। बदमाशों ने दो मुलजिम भी छुड़ा लिए थे। करीब एक साल पहले बदमाशों ने हस्तिनापुर पुलिस पर हमला कर एसओ के साथ मारपीट की। दिल्ली पुलिस की टीम को भी पीटा, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। खरखौदा क्षेत्र में पांच माह पहले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल की भी हत्या कर दी गई थी।

शासन तक पहुंचा मामला
गनीमत रही कि सिपाही और दरोगा की जान बच गई। नहीं तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। सिपाही उपेंद्र सिरोही के सीने में भी चाकू लगा है। सिपाही और दरोगा पर हमले की जानकारी मिली तो लखनऊ से भी उच्च अधिकारियों द्वारा जानकारी ली गई। पूरे मामले में पुलिस हमलावर की गिरफ्तारी के लिए देर रात तक दबिश दे रही थी।

एसएसपी ने हाल जाना
दरोगा और सिपाही पर हमले की जानकारी मिलने पर एसएसपी अखिलेश कुमार एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक के साथ जसवंत राय अस्पताल पहुंचे। एसएसपी ने घायल सिपाही और दरोगा का हाल जाना। पूरे मामले की जानकारी एसपी सिटी से ली।

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