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खतरनाक है ये बीमारी: मेरठ में ऐसे छह हजार मरीज, विशेषज्ञों ने दी ये राय, हर व्यक्ति के लिए जानना जरूरी

Wed, 21 Sep 2022 05:58 PM IST
कपिल kapil अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 21 Sep 2022 05:58 PM IST
सार

यह एक ऐसी खतरनाक बीमारी है, जिससे लोग चीजों को भूलने लगते हैं। वहीं विशेषज्ञों ने इस बीमारी से बचाब के लिए कुछ राय दी है। 

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Meerut Amar Ujala Report: Alzheimer disease is dangerous and experts give opinion
अल्जाइमर रोग - फोटो : istock

विस्तार

अल्जाइमर, भूलने की एक ऐसी बीमारी है, जिसके होने की सही वजह के बारे में अभी तक पता नहीं लग सका है। यह बीमारी ज्यादातर 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों में होती है, जिसमें लोग डिमेंशिया यानि भूलने की आदत के शिकार हो जाते हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बढ़ती उम्र में भी व्यक्ति अपने छोटे छोटे काम खुद करें तो इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है।

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अल्जाइमर के शिकार लोग घर, परिवारवालों के नाम और यहां तक की नित्य क्रिया जैसे बहुत सारी बातें भूल जाते हैं। इससे उनकी जिंदगी खासा प्रभावित होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ इस बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और शहर के निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास इस तरह के काफी लोग पहुंच रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, अल्जाइमर के मेरठ जिले में करीब छह हजार मरीज हैं। 
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केस स्टडी - एक
जागृति विहार के रहने वाले 70 वर्षीय व्यक्ति को अल्जाइमर है। उनके बेटे का कहना है कि वह अक्सर किचिन और बाथरूम का अंतर भूल जाते हैं। उन्हें यह भी याद नहीं रहता खाना खाया था या नहीं। बच्चों से भी ज्यादा उनकी देखभाल करनी पड़ती है। मेडिकल कॉलेज में उनका इलाज चल रहा है।
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केस स्टडी - दो 
दिल्ली रोड पर रहने वाली 67 साल की महिला अल्जाइमर पीड़ित हैं। इनके पुत्र बताते हैं कि उनकी माता अपने फोटो तक नहीं पहचान पाती हैं। दवाओं के जरिए थोड़ी राहत रहती है। परिवार के एक सदस्य को हमेशा उनकी देख-रेख में रहना पड़ता है। उनकी नानी को भी यह बीमारी थी, शायद यह आनुवंशिक है। जिला अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।

मरीज की सारी चीजों की जगह तय कर दें
मरीज की सारी चीजों की जगह तय कर दें। नाश्ते और खाने का समय बिल्कुल निश्चित रखें। पुराने फोटोग्राफ  उनके पास रखने चाहिए। अल्जाइमर का मरीज अपने पड़ोस में भी खो जाता है। वह यह भूल जाता है कि वह कहां है, वहां वह कैसे आया और घर वापस कैसे जाना है। अमूमन यह 60 से 65 साल की उम्र में शुरू हो सकता है। - डॉ. अमित बिंदल, न्यूरोलॉजिस्ट

स्मरण शक्ति हो रही हो कमजोर तो चिकित्सक से करें परामर्श
अगर बढ़ती उम्र में लोग अपना काम खुद करते हैं तो उन्हें अल्जाइमर रोग होने का खतरा कम होता है और स्मरणशक्ति तेज होती है। ड्राई फ्रूट्स खाना दिमाग के लिए अच्छा होता है और याददाश्त बढ़ती है। फूलगोभी का सेवन भी लाभकारी है। स्मरण शक्ति में ज्यादा दिक्कत हो तो चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। - डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक

रोगी का कमरा हवादार हो 
रोगी का कमरा खुला व हवादार हो और आवश्यकता की वस्तुएं एक स्थान पर रखें। मरीजों के इलाज के लिए कुछ ऐसी दवाएं उपलब्ध हैं, जिनके सेवन से ऐसे रोगियों की याददाश्त और उनकी सूझबूझ में सुधार होता है। ये दवाएं रोगी के लक्षणों की तीव्रता को कम करने या दूर करने में सहायक होती हैं। - डॉ. कमलेंद्र किशोर, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल

1906 में पता चली थी बीमारी
1906 में इस बीमारी का पता जर्मनी के डॉ. ओलोए अल्जीमीर ने लगाया था। उन्होंने भूलने की आदत से पीड़ित एक महिला के दिमाग के परीक्षण में पाया कि उसमें कुछ गांठें पड़ गई हैं, जिन्हें चिकित्सक प्लेट कहते हैं। यही रोग उन्हीं डॉक्टर के नाम पर अल्जाइमर रोग कहलाया जाने लगा। इस रोग से प्रभावित रोगी की मस्तिष्क की कोशिकाओं का एक-दूसरे से संपर्क टूटने लगता है और धीरे-धीरे मृत स्थिति में आ जाता है।

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