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अमर उजाला की खास रिपोर्ट: मेडिकल में 38 फीसदी बेड खाली, फिर भी भर्ती करने में हीलाहवाली

Tue, 29 Jan 2019 01:36 PM IST
कपिल kapil अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिज़वी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 29 Jan 2019 01:36 PM IST
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Meerut, 38 percent of beds in Medical College are empty, but patients are not being recruited
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

मेरठ मेडिकल कॉलेज के स्टाफ पर आए दिन मरीज भर्ती न करने के आरोप लगते हैं। इसको लेकर तीमारदार भी हंगामा करते हैं। मेडिकल स्टाफ कभी इसकी वजह बेड फुल होना बताता है, तो कभी मरीज की हालत गंभीर बताकर हीलाहवाली करता है। जबकि सच्चाई यह है कि करीब 38 फीसदी बेड खाली रहते हैं। यह खुलासा खुद एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की गोपनीय रिपोर्ट में हुआ है।

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पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 50 हजार 424 मरीज आए। इनमें 92 हजार 128 मरीज दिसंबर माह में आए। मेडिकल कॉलेज में कुल स्वीकृत बेड की संख्या 750 (एमसीआई स्वीकृत) है, जबकि 1040 बेड तक इन्हें बढ़ाए जाने की स्वीकृति है। पिछले साल 12 महीनों में 33 हजार 289 मरीज भर्ती कराए गए, जबकि दिसंबर माह में 2852 मरीज भर्ती कराए गए थे। बेड ओक्यूपेंसी (फार्मूला सहित) के जरिये आंकड़ा निकाला गया तो पिछले 12 माह में सिर्फ 62 प्रतिशत बेड ही फुल रहे, 38 प्रतिशत बेड खाली रहे, जबकि दिसंबर माह में 64 प्रतिशत बेड फुल थे।

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पांच वेंटिलेटर पड़े हैं ठप
कॉलेज में 24 वेंटिलेटर हैं, जिनमें से पांच खराब पड़े हैं। पिछले दिनों वेंटिलेटर पर भर्ती रहे मरीजों में से सात की तीन दिन के भीतर मृत्यु हो गई थी। लाइट जाने पर एंबू बैग से ऑक्सीजन दी गई थी।

असाध्य रोगों के इलाज में मेडिकल कॉलेज लाचार
असाध्य रोगों के निशुल्क इलाज में दिल और लिवर के एक भी मरीज को इलाज नहीं मिला है। रिपोर्ट में इन दोनों बीमारियों केसामने शून्य लिखा है। कैंसर और किडनी के भी सिर्फ 30 मरीजों को मिला उपचार है। इनमें कैंसर के 24 मरीज हैं, जबकि किडनी के छह मरीजों को उपचार दिया हुआ लिखा है। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज में 45 से ज्यादा चिकित्सकों की कमी चल रही है।

आवंटित की गई थी 10 करोड़  रुपये की धनराशि
इस वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2018 से मार्च 2019 तक) में दवाओं के लिए 10 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। इनमें से आठ करोड़ 74 लाख 4 हजार 567 रुपये की दवाइयां मंगाई गई हैं। 1 करोड़ 35 लाख 95 हजार 433 रुपये इस बजट के बाकी हैं। पांच करोड़ रुपये और बजट की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा एक अप्रैल 2018 से दिसंबर 2018 तक एक करोड़ 34 लाख 3 हजार 372 रुपये यूजर चार्ज जमा कराया गया है।

73 पद चल रहे रिक्त
प्राचार्य डॉ. आरसी  गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कालेज में चिकित्सकों के 73 पद रिक्त हैं। जिनके अभाव में भी महाविद्यालय और चिकित्सालय की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाई जाने में कठिनाई होती है। यहां 204 पद स्वीकृत हैं और सिर्फ 131 पद ही भरे हुए हैं। यदि इन पदों पर भी डॉक्टरों की भर्ती हो जाए, तो सभी वार्डों में व्यवस्था बनाई जा सकती है। इसके अलावा मरीजों का और अच्छे तरीके से इलाज किया जा सकेगा। 

व्यवस्था में सुधार की कोशिश जारी
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था में सुधार की लगातार कोशिश की जा रही है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तैयार किया जा रहा है, जो जल्द ही शुरू हो जाएगा। इसके बाद गंभीर मरीजों को भी इलाज मिलने लगेगा। ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज आते हैं, जिनके लिए दवाओं की कमी न रहे, इसलिए बजट की मांग की जाती है। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

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