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Meerut: 15 साल के तहेरे भाई ने ढाई साल की मासूम से किया दुष्कर्म, लहूलुहान हालत में रोती हुई मिली बच्ची
Thu, 26 Sep 2024 11:39 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Thu, 26 Sep 2024 11:39 PM IST
सार
इस शर्मनाक घटना के बाद पंचायत ने पीड़ितों का साथ देने के बजाय रिपोर्ट दर्ज न कराने का दबाव डाला। कभी डराया तो कभी पैसों का लालच दिया।
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बच्ची से दुष्कर्म।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
परतापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में बुधवार दोपहर 15 साल के तहेरे भाई ने ढाई साल की मासूम के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर परिजन कमरे में पहुंचे तो वह लहूलुहान हालत में मिली। परिजनों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई की। बृहस्पतिवार को परिजन बालिका को लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने मासूम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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परतापुर थाना क्षेत्र के एक गांव में दोपहर के समय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान रिश्ते का भाई बच्ची को अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची को घर के बाहर से गायब देखकर परिजनों ने तलाश की तो उसकी चीख सुनाई दी। परिजन कमरे में पहुंचे तो बच्ची खून से लथपथ थी। बच्ची के परिजन आरोपी के खिलाफ तहरीर देने के लिए थाने जाने लगे तो कुछ लोगों ने आपस में मामला निपटाने की बात कहकर रोक लिया। परिजनों पर समझौते का दबाव बनाया, लेकिन वे नहीं माने।
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बृहस्पतिवार सुबह परिजन परतापुर थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी देते हुए आरोपी के खिलाफ तहरीर दी। आरोपी ने पुलिस को बताया कि बच्ची रो रही थी। चुप नहीं हुई तो उसको उठाकर गुस्से में बेड पर फेंक दिया। इस दौरान उसको नाखून लग गया, जिससे खून बहने लगा। एएसपी अंतरिक्ष जैन ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर बालिका को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
16 घंटे तक मामले को दबाने में लगे रहे आरोपी पक्ष के लोग
मासूम से दरिंदगी की घटना से भी कुछ लोगों का कलेजा नहीं पसीजा। इस जघन्य अपराध के बाद भी आरोपी के परिजन और पड़ोस के लोग बालिका के परिजनों पर मामले को दबाने का दबाव डालते रहे। इस मामले में बुधवार दोपहर से लेकर बृहस्पतिवार सुबह तक कई बार पंचायत होती रही। मामला पारिवारिक होने के कारण लोग बच्ची के परिजनों को समझाने का प्रयास करते रहे। परिजन बच्ची को लेकर थाने पहुंचे तो उन्हें समाज में बदनामी का डर दिखाया गया। पैसों का लालच दिया गया। कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ने तक की हिदायतें दी गईं। लेकिन मां-बाप का मन नहीं माना और आरोपी के खिलाफ तहरीर दी।
मासूम से दरिंदगी की घटना से भी कुछ लोगों का कलेजा नहीं पसीजा। इस जघन्य अपराध के बाद भी आरोपी के परिजन और पड़ोस के लोग बालिका के परिजनों पर मामले को दबाने का दबाव डालते रहे। इस मामले में बुधवार दोपहर से लेकर बृहस्पतिवार सुबह तक कई बार पंचायत होती रही। मामला पारिवारिक होने के कारण लोग बच्ची के परिजनों को समझाने का प्रयास करते रहे। परिजन बच्ची को लेकर थाने पहुंचे तो उन्हें समाज में बदनामी का डर दिखाया गया। पैसों का लालच दिया गया। कोर्ट कचहरी के चक्कर में नहीं पड़ने तक की हिदायतें दी गईं। लेकिन मां-बाप का मन नहीं माना और आरोपी के खिलाफ तहरीर दी।
किशोरों को समय दें, मोबाइल नहीं
माता-पिता अपने बच्चों को 12–14 साल की उम्र से ही स्मार्ट फोन दे देते हैं। बच्चा उसमें क्या देख रहा है, इसकी कोई निगरानी नहीं करता है। इसका ही परिणाम होता है कि समय मिलने पर बच्चे उसमें कुछ भी देखते हैं। मानसिक विकार से ग्रसित बच्चे इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देते हैं। माता-पिता के व्यस्त होने के कारण भी बच्चे गलत रास्ते पर चल रहे हैं। अपने बच्चों को समय दें। उन्हें छोटी उम्र से ही अच्छे और बुरे की जानकारी दें।
- प्रो. संजय कुमार, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष, सीसीएसयू
माता-पिता अपने बच्चों को 12–14 साल की उम्र से ही स्मार्ट फोन दे देते हैं। बच्चा उसमें क्या देख रहा है, इसकी कोई निगरानी नहीं करता है। इसका ही परिणाम होता है कि समय मिलने पर बच्चे उसमें कुछ भी देखते हैं। मानसिक विकार से ग्रसित बच्चे इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम देते हैं। माता-पिता के व्यस्त होने के कारण भी बच्चे गलत रास्ते पर चल रहे हैं। अपने बच्चों को समय दें। उन्हें छोटी उम्र से ही अच्छे और बुरे की जानकारी दें।
- प्रो. संजय कुमार, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष, सीसीएसयू