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Meerut News: मेडिकल अस्पताल में प्रशिक्षुओं के सहारे दवा काउंटर
Fri, 19 Jul 2024 04:15 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Fri, 19 Jul 2024 04:15 AM IST
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बिजनौर। मेडिकल अस्पताल में दवा लिखने वाले तो बहुत हो गए हैं। मगर दवा देने वाले फार्मासिस्टों की संख्या घट गई है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि एक फार्मासिस्ट चार दवा काउंटर अकेले ही संभाल रहा है। फार्मासिस्ट की निगरानी में ही प्रशिक्षु दवाई बांट रहे हैं। जानकारी नहीं होने पर वह कई बार मरीजों को गलत दवा देते हैं।
जिला संयुक्त पुरुष एवं महिला अस्पताल को मेडिकल अस्पताल में संबद्ध कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार दोनों अस्पतालों को मिलाकर फार्मासिस्ट के कुल 20 पद हैं। जिनमें से 11 पदों पर फार्मासिस्ट तैनात हैं। अस्पताल में हर दवा काउंटर एक फार्मासिस्ट होना अनिवार्य है। नियम तो यह है कि एक फार्मासिस्ट रिकॉर्ड पूरा कर 75 मरीजों को दवाई दे सकता है।
मगर फार्मासिस्ट की कमी होने से एक फार्मासिस्ट ही डीफार्मा और बीफार्मा के बाद प्रशिक्षण लेने आए प्रशिक्षु के सहयोग से दवाई दिला रहा है। दवाई की जानकारी कम होने पर प्रशिक्षु देर में दवाई दे रहे हैं। जिससे मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। भीड़ होने पर मरीजों को करीब आधे घंटे में दवाई मिलती है। इतना ही नहीं, कभी-कभी गलत दवाई दे देते हैं। जिससे मरीज बाद में दवाई बदलवाने के लिए चक्कर लगाते हैं।
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- 140 प्रकार की दवाई अस्पताल में दी जा रही
फार्मासिस्ट राजेश रवि के अनुसार मेडिकल अस्पताल में 140 प्रकार की दवाई हैं। दवाई वितरित करने के लिए चार काउंटर बने हुए हैं। बीमारी के हिसाब से मरीजों को दवाई देते हैं। मगर सभी दवाइयों को समझने में समय लगता है। साथ ही मरीजों की अधिक भीड़ रहती है।
- अस्पताल में करीब 1500 मरीज पहुंच रहे दवाई लेने
मेडिकल अस्पताल में रोजाना करीब 1500 मरीज दवाई लेने पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज नए पर्चे बनवाते हैं। जबकि करीब 500 मरीज पुराने रहते हैं। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
- केस नंबर एक
मरीज हरस्वरूप ने बताया कि उसके पेट में दर्द हो रहा था। जिसकी वह अस्पताल में दवाई लेने आया। चिकित्सक ने दवाई लिख दी। मगर काउंटर से दवाई लेने में उसे करीब आधा घंटा लगा। इसके बाद उसे दवाई मिली।
- केस नंबर दो
मरीज सलमान का कहना है कि पहले तो लाइन में लगकर काउंटर से घंटों में दवाई मिली। दवाई लेने के बाद जब वह चिकित्सक को दिखाने गया तो उन्होंने एक टेबलेट गलत बता दी। जिसके चलते वह दोबारा काउंटर से पर्चा दिखाकर दवाई लाया।
- वर्जन : अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी चल रही है। फार्मासिस्ट की तैनाती के लिए हर माह मुख्यालय को मांग पत्र भेजा जा रहा है। दवाई देने की जिम्मेदारी डिस्पेंसरी में तैनात फार्मासिस्ट की होती है। वह अपनी निगरानी में ही प्रशिक्षुओं से मरीजों को दवाई दिलाते हैं। - डॉ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर
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जिला संयुक्त पुरुष एवं महिला अस्पताल को मेडिकल अस्पताल में संबद्ध कर दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार दोनों अस्पतालों को मिलाकर फार्मासिस्ट के कुल 20 पद हैं। जिनमें से 11 पदों पर फार्मासिस्ट तैनात हैं। अस्पताल में हर दवा काउंटर एक फार्मासिस्ट होना अनिवार्य है। नियम तो यह है कि एक फार्मासिस्ट रिकॉर्ड पूरा कर 75 मरीजों को दवाई दे सकता है।
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मगर फार्मासिस्ट की कमी होने से एक फार्मासिस्ट ही डीफार्मा और बीफार्मा के बाद प्रशिक्षण लेने आए प्रशिक्षु के सहयोग से दवाई दिला रहा है। दवाई की जानकारी कम होने पर प्रशिक्षु देर में दवाई दे रहे हैं। जिससे मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है। भीड़ होने पर मरीजों को करीब आधे घंटे में दवाई मिलती है। इतना ही नहीं, कभी-कभी गलत दवाई दे देते हैं। जिससे मरीज बाद में दवाई बदलवाने के लिए चक्कर लगाते हैं।
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- 140 प्रकार की दवाई अस्पताल में दी जा रही
फार्मासिस्ट राजेश रवि के अनुसार मेडिकल अस्पताल में 140 प्रकार की दवाई हैं। दवाई वितरित करने के लिए चार काउंटर बने हुए हैं। बीमारी के हिसाब से मरीजों को दवाई देते हैं। मगर सभी दवाइयों को समझने में समय लगता है। साथ ही मरीजों की अधिक भीड़ रहती है।
- अस्पताल में करीब 1500 मरीज पहुंच रहे दवाई लेने
मेडिकल अस्पताल में रोजाना करीब 1500 मरीज दवाई लेने पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर मरीज नए पर्चे बनवाते हैं। जबकि करीब 500 मरीज पुराने रहते हैं। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
- केस नंबर एक
मरीज हरस्वरूप ने बताया कि उसके पेट में दर्द हो रहा था। जिसकी वह अस्पताल में दवाई लेने आया। चिकित्सक ने दवाई लिख दी। मगर काउंटर से दवाई लेने में उसे करीब आधा घंटा लगा। इसके बाद उसे दवाई मिली।
- केस नंबर दो
मरीज सलमान का कहना है कि पहले तो लाइन में लगकर काउंटर से घंटों में दवाई मिली। दवाई लेने के बाद जब वह चिकित्सक को दिखाने गया तो उन्होंने एक टेबलेट गलत बता दी। जिसके चलते वह दोबारा काउंटर से पर्चा दिखाकर दवाई लाया।
- वर्जन : अस्पताल में फार्मासिस्ट की कमी चल रही है। फार्मासिस्ट की तैनाती के लिए हर माह मुख्यालय को मांग पत्र भेजा जा रहा है। दवाई देने की जिम्मेदारी डिस्पेंसरी में तैनात फार्मासिस्ट की होती है। वह अपनी निगरानी में ही प्रशिक्षुओं से मरीजों को दवाई दिलाते हैं। - डॉ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर