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मेडिकल कॉलेज की एमआरआई मशीन ‘गुम’

Fri, 26 Feb 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला मेरठ Updated Fri, 26 Feb 2016 01:49 AM IST
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medical college news
लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज में तीन साल से एमआरआई (मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग) मशीन लगाने के दावे धराशायी होते रहे हैं। अब फिर से दावा खोखला साबित होता दिखाई दे रहा है।
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क्योंकि मेडिकल कालेज को दी जाने वाली एमआरआई मशीन रास्ते में ही गायब हो गई है। वहीं, कालेज दावा कर रहा है कि एमआरआई मशीन कहीं गायब नहीं हुई, बल्कि रोड परमिट गलत पते का तैयार होने की वजह से उसे लाने में दिक्कत हो रही है।
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एमआरआई को लेकर आशंका पैदा होने के कई सारे वाजिब कारण हैं। कालेज प्रशासन ने जुलाई 2015 में दावा किया था कि फिलिप्स कंपनी को टेंडर जारी किया जा चुका है और नवंबर- दिसंबर तक मशीन लग जाएगी। उसके बाद कहा गया कि नए साल में मरीजों को एमआरआई जांच की सौगात मिलेगी।
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इन दावों के बीच साल 2016 का जनवरी महीना भी गुजर गया। लेकिन जैसे ही खबरें आई कि 14 फरवरी को मुख्यमंत्री का मेरठ दौरा हो सकता है, तो कालेज प्रशासन ने कहा कि हर हाल में 14 फरवरी से पहले मशीन लग जाएगी। इसके लिए कंपनी को मशीन के लिए एनएमसी की पुरानी बिल्डिंग दे दी गई है, बाकी सारा सेटअप भी तैयार कर लिया गया है। अब फरवरी खत्म होने को है, लेकिन मशीन का कोई अता-पता नहीं है।

बताया जा रहा है कि कंपनी से एमआरआई प्रदेश का कोई दूसरा मेडिकल कालेज झटक कर ले गया है और कंपनी आश्वासन दे रही है कि जल्दी ही दूसरी मशीन आने वाली है, जो मेरठ मेडिकल कालेज को मुहैया करा दी जाएगी। ऐसे में एमआरआई हाल-फिलहाल तो लगती दिखाई नहीं दे रही है।

‘एयरपोर्ट से नहीं मिल रही मशीन उठाने की परमीशन’
कालेज
प्रशासन पूरे मामले में कुछ और ही कह रहा है। उसका दावा है कि मेरठ मेडिकल कालेज को मिलने वाली एमआरआई दिल्ली एयरपोर्ट पर रखी हुई है।

रोड परमिट तैयार न हो पाने की वजह से मशीन आ नहीं पाई है। पहले जो परमिट तैयार किया गया था, उसमें मेडिकल कालेज का पता गलता था। इस वजह से एयर पोर्ट से मशीन उठाने की परमिशन नहीं दी गई। सेेल्स टैक्स विभाग के माध्यम से दोबारा रोड परमिट तैयार होता है, जिसके लिए ट्रेजरी में फीस जमा की जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है।

एमआरआई पर भारी कमीशन
मेडिकल
कालेज में एमआरआई और सीटी स्कैन लगाने के लिए सरकार साल 2013 में ही नौ करोड़ रुपये की निर्धारित रकम में से साढ़े चार करोड़ रुपया एडवांस दे चुकी है। पहले ढाई साल तक टेंडर नहीं हो सका और अब टेंडर हुआ तो आठ महीने से मशीन का कुछ अता-पता नहीं है।

उधर, सीटी स्कैन कब तक लगेगी, यह भी किसी को नहीं पता। इस लेटलतीफी के पीछे आरोप लगते रहे हैं कि हर रोज मेडिकल कालेज में बड़ी संख्या में प्राइवेट से सीटी स्कैन और एमआरआई होते हैं, जिनका कमीशन कुछ चिकित्सकों को जाता है। इसी कमीशन के चलते बड़ी लॉबी चाहती है कि जितनी देरी से मशीन लगे, उतना अच्छा है।


वर्जन
हमारी
मशीन दिल्ली एयरपोर्ट पर है। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए हम लोगों ने फिलिप्स कंपनी से रिक्वेस्ट की थी कि वो पहले हमें मशीन दे दे। जिसके बाद कंपनी ने आगरा मेडिकल कालेज को दी जाने वाली मशीन हमें दी है। अब परमिट तैयार होने के बाद मशीन आ जाएगी। मशीन आते ही उसे चालूू कर दिया जाएगा।
-डॉ. केके गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कालेज
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