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Meerut News: लॉन्य हुआ ऑफलाइन एआई असिस्टेंट मेधा एआई
Sun, 19 Jul 2026 07:39 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sun, 19 Jul 2026 07:39 PM IST
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क्लासरूम टीचिंग को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने की पहल, विज्ञान घर में हुआ प्रस्तुतीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। भारतीय क्लासरूम टीचिंग को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने और शिक्षकों के कार्यभार को कम करने के उद्देश्य से अच्छी पहल की गई है। दो साल के शोध और अथक प्रयास के बाद विज्ञान क्लब के राज्य समन्वयक दीपक शर्मा के निर्देशन में कोग्राड टीम ने ऑफलाइन एआई असिस्टेंट मेधा आई तैयार किया है। रविवार को विज्ञान घर में इसका प्रस्तुतीकरण किया गया।
एनएएस इंटर कॉलेज के विज्ञान शिक्षक दीपक शर्मा ने बताया कि इस एआई टूल को भारतीय शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप बनाने के लिए कोग्राड टीम में सौरभ और हिमांशु शामिल रहे। यह टूल बिना इंटरनेट के शत-प्रतिशत काम करने में सक्षम है। इसके आने से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के उन स्कूलों में भी डिजिटल शिक्षा का लाभ पहुंच सकेगा जहां नेटवर्क की भारी समस्या रहती है। इसकी मदद से शिक्षक पूरी क्लास के बच्चों का लाइव मूल्यांकन मात्र कुछ सेकंडों में कर सकेंगे। इससे हर छात्र की समझ और उसके लर्निंग गैप्स का तुरंत पता चल जाएगा। दीपक शर्मा ने बताया कि एआई एक उपकरण है, शिक्षक का विकल्प नहीं। एआई सिर्फ एक टूल हो सकता है, वह कभी एक जीवित शिक्षक की जगह नहीं ले सकता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। भारतीय क्लासरूम टीचिंग को डिजिटल युग के अनुकूल बनाने और शिक्षकों के कार्यभार को कम करने के उद्देश्य से अच्छी पहल की गई है। दो साल के शोध और अथक प्रयास के बाद विज्ञान क्लब के राज्य समन्वयक दीपक शर्मा के निर्देशन में कोग्राड टीम ने ऑफलाइन एआई असिस्टेंट मेधा आई तैयार किया है। रविवार को विज्ञान घर में इसका प्रस्तुतीकरण किया गया।
एनएएस इंटर कॉलेज के विज्ञान शिक्षक दीपक शर्मा ने बताया कि इस एआई टूल को भारतीय शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप बनाने के लिए कोग्राड टीम में सौरभ और हिमांशु शामिल रहे। यह टूल बिना इंटरनेट के शत-प्रतिशत काम करने में सक्षम है। इसके आने से ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के उन स्कूलों में भी डिजिटल शिक्षा का लाभ पहुंच सकेगा जहां नेटवर्क की भारी समस्या रहती है। इसकी मदद से शिक्षक पूरी क्लास के बच्चों का लाइव मूल्यांकन मात्र कुछ सेकंडों में कर सकेंगे। इससे हर छात्र की समझ और उसके लर्निंग गैप्स का तुरंत पता चल जाएगा। दीपक शर्मा ने बताया कि एआई एक उपकरण है, शिक्षक का विकल्प नहीं। एआई सिर्फ एक टूल हो सकता है, वह कभी एक जीवित शिक्षक की जगह नहीं ले सकता।
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