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समझौते के बाद भी अटकी हैं एमडीए की तीन योजनाएं

Tue, 10 Nov 2020 01:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Nov 2020 01:50 AM IST
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MDA's three plans are stuck even after the agreement
समझौते के बाद भी अटकी हैं एमडीए की तीन योजनाएं
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शहर के चौतरफा विकास से पहले किसानों से विवादों का समाधान तीन साल बाद भी नहीं हो पाया है। वेदव्यासपुरी, गंगानगर और लोहियानगर के किसानों से बढ़े प्रतिकर, प्लॉट और धनराशि देने के समझौते पर हस्ताक्षर तो हुए। लेकिन अभी कुछ फाइनल नहीं हुआ है। किसान 1-2 दिन में फिर एमडीए अधिकारियों से मिलेंगे। अगर समाधान नहीं हुआ तो किसानों की दिवाली फीकी ही रहेगी।
कई दौर की बैठक भी बेकार
किसानों के साथ एमडीए अधिकारी और विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर की कई दौर की बैठक भी बेकार साबित हो रही है। आश्वासनों के बावजूद एक भी किसान को प्लॉट तक नहीं मिला है। ऐसे में सवाल है कि क्या सिर्फ किसान ही विकास में बाधक हैं। इसमें अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। वह भी गंभीर नहीं है।
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आवंटी भर रहे शताब्दीनगर का खामियाजा
ऐसा ही हाल शताब्दीनगर का है। कोर्ट में केस जाने के बाद भी प्रशासन किसानों से कब्जा नहीं ले सका है, जिसका खामियाजा आवंटी भुगत रहे हैं। कई साल पहले गाजियाबाद, दिल्ली के आवंटियों ने शताब्दीनगर में प्लॉट बुक कराए थे। आज तक भी कब्जा तो छोड़िए, ब्याज सहित पैसा देने से भी एमडीए ने मना कर दिया हे।
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गंगा एक्सप्रेसवे का भी एलाइनमेंट अटका
मेरठ। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किमी लंबे गंग एक्सप्रेसवे का प्रदेश सरकार अभी तक फाइनल एलाइनमेंट ही नहीं जारी कर पाई है। किसानों में बेचैनी है क्योंकि पहले दिवाली पर इसके शिलान्यास की सुगबुगाहट थी। लेकिन अभी तक ऐसी कोई भी तैयारी प्रशासनिक स्तर पर नहीं लग रही है। दो माह पूर्व इसके एलाइनमेंट में मेरठ से 16 किमी आगे से बनाने का अपडेट दिया गया। शासन स्तर से प्रोजेक्ट की निगरानी को एडीएम प्रशासन मदन सिंह को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया। लेकिन काम तेजी नहीं पकड़ रहा है। किसानों का भी मानना है कि अगर एक्सप्रेसवे का निर्माण जनवरी 2021 में भी शुरू होता है तो एक्सप्रेसवे वर्ष-2022 तक नहीं बन पाएगा।
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