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मेडिकल में एक साथ होंगे मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य विभाग

Sun, 20 Jul 2025 02:12 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 02:12 AM IST
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Maternity and child health departments will be together in medical
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य विभाग (मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ डिपार्टमेंट) एक साथ होंगे। यानी इससे जच्चा-बच्चा वार्ड एक जगह हो जाएंगे, अभी तक ये दोनों वार्ड अलग-अलग हैं। इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल गई है। इसमें 33.39 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए अलग से 150 बेड की बिल्डिंग तैयार कराई जाएगी।
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यह जानकारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने शनिवार को नई लेक्चर थियेटर बिल्डिंग में प्रेस कांफ्रेंस में दी। प्राचार्य ने बताया कि इस बिल्डिंग को धर्मशाला के सामने बनवाया जाएगा। इसका निर्माण इसी साल दिसंबर माह में शुरू होगा और इसके बाद करीब डेढ़ साल में यह बनकर तैयार कराई जाएगी। इस बिल्डिंग में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, लेबर रूम होगा, वहीं बच्चों का पीडियाट्रिक्स विभाग और नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) होगा। ऐसा होने से गर्भवती महिलाओं का इलाज, डिलिवरी होना, बच्चों को एनआईसीयू में भर्ती करना, सब एक साथ ही बिल्डिंग में हो जाएंगे। इससे जच्चा-बच्चा और चिकित्सकों को भी आसानी होगी। अभी ये दोनों अलग-अलग हैं। मेडिकल कॉलेज में हर साल करीब तीन हजार डिलिवरी होती हैं। इनमें से करीब एक हजार बच्चों को एनआईसीयू की जरूरत पड़ती है। प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. ज्ञानेश्वर टांक, डॉ. अरविंद और डॉ. राहुल आदि मौजूद रहे।
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मेडिकल में लगेंगे 150 सीसीटीवी कैमरे, 96 गार्ड बढ़ेंगे
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की जाएगी। यहां 150 सीसीटीवी कैमरे और लगाए जाएंगे, साथ ही 96 गार्ड और बढ़ेंगे। वार्डों में तीमारदारों की एंट्री पास के जरिए होगी।
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प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने शनिवार को मेडिकल की सुरक्षा व्यवस्था की रूट प्लान भी साझा किया। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज में फिलहाल 250 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, इनमें से 180 सीसीटीवी कैमरे कंट्रोल रूम से कनेक्ट हैं, जबकि 70 कैमरे कंट्रोल रूम से जुड़े नहीं हैं। उनकी निगरानी हॉस्टल और विभागों से ही हो रही है। इन्हें भी कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 150 सीसीटीवी कैमरे और लगाएं जाएंगे, जिससे सारे मेडिकल कॉलेज की निगरानी हो सके। वहीं, 96 सुरक्षा गार्ड और रखे जाएंगे। अभी 101 सुरक्षा गार्ड हैं। इससे मेडिकल की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। पिछले दिनों एक नाबालिग लड़की के साथ बाथरूम में दुष्कर्म किया गया था। एक महिला का बाथरूम में नाहते हुए अश्लील वीडियो बनाई थी और उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई थी। इससे पहले वार्डों से कई नवजात भी चोरी किए जा चुके हैं।
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यूरोलॉजी, ट्रांसफ्यूजन और प्लास्टिक सर्जरी में शुरू होंगे डीएनबी कोर्स
प्राचार्य ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी, ट्रांसफ्यूजन और प्लास्टिक सर्जरी में डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड (डीएनबी) कोर्स शुरू किए जाएंगे। यह तीन-तीन साल के होंगे। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस करने के बाद विशेषज्ञ बनने के लिए डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) और मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) करना पड़ता है। इसके अलावा जिन विद्यार्थियों का चयन एमडी या एमस के लिए नहीं हो पाता है, उनमें से कुछ का चयन डीएनबी के लिए हो जाता है। वह डीएनबी कोर्स करके भी विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। इन कोर्सों में कितनी सीटें होंगी, इसके लिए जल्द ही नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) की टीम आकर निरीक्षण करेगी। यूरोलॉजी, चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो पुरुष और महिला मूत्र प्रणाली एवं पुरुष प्रजनन प्रणाली से संबंधित बीमारियों व विकारों का अध्ययन, निदान व उपचार करती है। ट्रांसफ्यूजन, रक्त, रक्त उत्पादों के संग्रह, परीक्षण, भंडारण और उनकी जांच से संबंधित क्षेत्र है। प्लास्टिक सर्जरी, जिसे कॉस्मेटिक सर्जरी भी कहते हैं। एक शल्य चिकित्सा विशेषज्ञता है जो शरीर के अंगों को बेहतर बनाने के लिए की जाती है।

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छह करोड़ रुपये की लागत से बदली जाएंगी पाइप लाइनें
प्राचार्य ने बताया कि मेडिकल में पानी और सीवर की समस्या बढ़ रही है। पाइपलाइन पिछले 40 साल से नहीं बदली गई है। इसकी वजह से पाइप लाइनें, थोड़ा भी दबाव बढ़ने पर फट जाती हैं। इससे पानी की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके लिए लगभग छह करोड़ की लागत से पाइप लाइनें बदली जाएंगी। इसके अलावा 2 करोड़ 35 लाख के बजट में स्ट्रीट लाइटें भी लगाई जाएंगी।
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