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Meerut News: क्रांति के असली सूत्रधार थे मातादीन, इतिहास में मिले उचित सम्मान
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दौराला----दौराला के चौधरी धर्म कांटा पर शहीद मातादीन वाल्मीकि के बारे में जानकारी देते हुए वक्त
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। दौराला स्थित लावड़ रोड स्थित चौधरी धर्म कांटा पर परिवर्तन संस्था भारत की मेरठ टीम द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी और संचालन जिलाध्यक्ष पंकज दास ने किया।
मुख्य अतिथि संस्था प्रमुख चौधरी विनोद आंबेडकर ने कहा कि भारत का इतिहास अधूरा और तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति का श्रेय केवल मंगल पांडे को दिया जाता है, जबकि क्रांति की चिंगारी देने वाले अमर शहीद मातादीन थे। उन्होंने दावा किया कि मातादीन और मंगल पांडे आपस में मित्र थे। एक घटना के बाद अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की भावना भड़की जिसने आगे चलकर 1857 की क्रांति का रूप लिया।
विनोद आंबेडकर ने कहा कि इतिहास में मातादीन के योगदान को दबाया गया है। अब उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वालों को जातिगत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इतिहास की गलतियों को सुधारने का हरसंभव प्रयास होना चाहिए। सभा ने मांग उठाई कि 1857 की क्रांति के सूत्रधार अमर शहीद मातादीन की प्रतिमा दौराला चौराहे पर राष्ट्रीय ध्वज के नीचे स्थापित की जाए। इस दौरान बिजेंद्र सागर, बिट्टू मेहरा, प्रेमवीर सिंह विद्यार्थी, मुन्नू हडाला, मंगू पारचा, तीरथ ठेकेदार, बुलंद वाल्मीकि, सुनहरा सिंह आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। दौराला स्थित लावड़ रोड स्थित चौधरी धर्म कांटा पर परिवर्तन संस्था भारत की मेरठ टीम द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। अध्यक्षता संस्था के केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी और संचालन जिलाध्यक्ष पंकज दास ने किया।
मुख्य अतिथि संस्था प्रमुख चौधरी विनोद आंबेडकर ने कहा कि भारत का इतिहास अधूरा और तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति का श्रेय केवल मंगल पांडे को दिया जाता है, जबकि क्रांति की चिंगारी देने वाले अमर शहीद मातादीन थे। उन्होंने दावा किया कि मातादीन और मंगल पांडे आपस में मित्र थे। एक घटना के बाद अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की भावना भड़की जिसने आगे चलकर 1857 की क्रांति का रूप लिया।
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विनोद आंबेडकर ने कहा कि इतिहास में मातादीन के योगदान को दबाया गया है। अब उन्हें उचित सम्मान मिलना चाहिए। केंद्रीय अध्यक्ष वेदवीर सिंह आदिवासी ने कहा कि देश के लिए बलिदान देने वालों को जातिगत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इतिहास की गलतियों को सुधारने का हरसंभव प्रयास होना चाहिए। सभा ने मांग उठाई कि 1857 की क्रांति के सूत्रधार अमर शहीद मातादीन की प्रतिमा दौराला चौराहे पर राष्ट्रीय ध्वज के नीचे स्थापित की जाए। इस दौरान बिजेंद्र सागर, बिट्टू मेहरा, प्रेमवीर सिंह विद्यार्थी, मुन्नू हडाला, मंगू पारचा, तीरथ ठेकेदार, बुलंद वाल्मीकि, सुनहरा सिंह आदि मौजूद रहे।
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