देश की रक्षा के दौरान गलवां घाटी में प्राण न्योछावर करने वाले हवलदार बिपुल रॉय का मेरठ की क्रांतिकारी धरती से नाता जुड़ गया है। उनका परिवार मेरठ में ही रहता है। परिवार में पत्नी और पांच साल की बेटी है।
चिंता में बीती रात, सुबह मिली शहादत की खबर, गलवां घाटी में मेरठ के बिपुल रॉय ने दिखाया था अदम्य साहस
- - मूल रूप से पश्चिम बंगाल निवासी थे सेना के हवलदार बिपुल रॉय
- - मेरठ में कंकरखेड़ा स्थित कुंदन कुंज कॉलोनी में रहता था परिवार
- - चिंताओं में बीती रात, शहादत के बारे में बुधवार सुबह पता लगा
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भारत-चीन के बीच हुई झड़प में मेरठ निवासी हवलदार बिपुल रॉय भी देश के लिए कुर्बान हो गए। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार निवासी बिपुल मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित कुंदन कुंज कॉलोनी में किराए के मकान में रहते थे। करीब नौ महीने से उनका परिवार इसी मकान में रह रहा था। बिपुल रॉय की शहादत की खबर के बाद पत्नी रुम्पा रॉय का रो-रोकर बुरा हाल था।
बुधवार को सेना के अधिकारियों के साथ पहुंचे जिलाधिकारी अनिल ढींगरा और एसएसपी अजय साहनी ने शहीद की पत्नी को ढांढस बंधाया। इसके बाद पत्नी और बेटी को सेना अपने साथ लेकर हेडक्वार्टर लेकर चली गयी।
मंगलवार की रात करीब 11:30 बजे फोन की घंटी बजी। उधर से आवाज आई कि मैं लद्दाख से सीओ बोल रहा हूं। इतना सुनते ही हवलदार बिपिन रॉय की पत्नी रुम्पा रॉय डर गईं। सीओ ने कहा कि घर में किसी बड़े से बात करवा दीजिए। पत्नी ने मकान मालिक निखिल से सीओ की बात कराई।
सीओ ने मकान मालिक से पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते हुए बिपुल रॉय की शहादत की खबर दी। लेकिन मकान मालिक ने शहादत की खबर रुम्पा रॉय को नहीं बताई। लेकिन फोन आने के बाद से रुम्पा रॉय अनजाने डर से चिंता में रहीं। पूरी रात उन्होंने चिंता में ही काटी।
बुधवार सुबह जब उनके घर पर मीडियाकर्मियों और लोगों का आना-जाना शुरू हुआ। इस बीच रुम्पा रॉय को पति की शहादत का पता चला तो बेसुध हो गईं। मकान मालिक की पत्नी रेनू अरोड़ा और अन्य महिलाओं ने उन्हें संभाला और ढांढस बंधाती रहीं। लेकिन रुम्पा रॉय बार-बार यही कहती रहीं कि पति को एक बार तो देखने दो और मुझे अब घर जाना है।
9 माह पहले ही आए थे यहां
मकान मालकिन ने बताया कि करीब नौ माह महीने पहले ही बिपुल रॉय परिवार के साथ हमारे मकान में शिफ्ट हुए थे। इसके बाद बिपुल दिल्ली से लद्दाख चले गए थे। लेकिन बर्फ अधिक पड़ने के कारण वह वापस लौट आए थे। करीब तीन महीने पहले ही वह फिर से लद्दाख गए थे। भारत-चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के दौरान बिपुल राॅय अदम्य साहस दिखाते हुए शहादत को प्राप्त हुए।
दिल्ली से जलपाईगुड़ी जाएंगी पत्नी-बेटी
सेना शहीद बिपुल रॉय की पत्नी और बेटी को जब उनके घर से लेकर निकली तो सेना की गाड़ी के पीछे 'शहीद बिपुल रॉय अमर रहें' के नारे लगे। स्थानीय निवासियों ने कहा कि जब तक सूरज चांद रहेगा बिपुल तुम्हारा नाम रहेगा। बताया गया कि शहीद की पत्नी और बेटी को शुक्रवार को दिल्ली से हवाई जहाज से जलपाईगुड़ी के लिए भेजा जाएगा।