पिता पढ़ाते हैं इतिहास, बेटा बना समाज का दुश्मन, निलंबित होने के बाद करने लगा हथियारों की तस्करी
- असली दिखाकर नकली जैकेट्स भी बेच देते थे गिरोह के सदस्य
- इनके तीन साथी 12 अक्तूबर को पांच पिस्टलों के साथ धरे गए थे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एसएएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि बुलेटप्रूफ जैकेट्स की तस्करी करने वाला श्याम किशन चेन्नई निवासी सुरेश नामक व्यक्ति से 50 से 55 हजार रुपये में जैकेट्स लाकर पश्चिमी यूपी में कई लोगों को दोगुने से भी अधिक कीमत 1.25 लाख से 1.35 लाख रुपये में सप्लाई कर चुका है। आरोपी श्याम किशन के पास से दो नकली बुलेटप्रूफ जैकेट्स भी बरामद की गईं हैं, उसका इरादा असली बुलेटप्रूफ जैकेट्स दिखाकर नकली बेच देने का भी था।
तभी से पुलिस सुनील चंद्रा को ट्रेस कर रही थी और इसी दौरान उसके बुलेटप्रूफ जैकेट्स बेचने वाले मुख्य आरोपी श्यामकिशन मेहरा से संपर्क होने की बात सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने योजना बनाकर सुनील चंद्रा व मानसिंह के साथ ही श्यामकिशन मेहरा को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से एक बुलेटप्रूफ जैकेट, दो नकली जैकेट, दो तमंचे-कारतूस बरामद किए गए।
बुलेटप्रूफ जैकेट्स के खरीदारों को तलाश रही पुलिस
एसएसपी ने बताया कि पश्चिमी यूपी में किन लोगों को बुलेटप्रूफ जैकेट्स बेची गईं हैं, उन्हें ट्रेस किया जा रहा है। इनमें अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के साथ ही कुछ रसूखदार भी बताए जा रहे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
पिता पढ़ाते हैं इतिहास, बेटा समाज का दुश्मन
हथियार तस्करी के धंधे से जुड़े सुनील चंद्रा के पिता चंद्रपाल मूल रूप से मंसूरपुर क्षेत्र के गांव हुसैनपुर बोपाड़ा के रहने वाले हैं। चंद्रपाल मीरापुर के एसडी इंटर कॉलेज में इतिहास के शिक्षक हैं और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पद पर हैं। चंद्रपाल की पत्नी संतोष देवी नगर पंचायत मीरापुर में वार्ड सभासद हैं। अच्छे-खासे परिवार से संबंध होने के बावजूद शिक्षक का बेटा सुनील चंद्रा अपराध जगत से जुड़कर समाज का दुश्मन बन बैठा।
अय्याशी के चलते गंवाई बीज निगम की नौकरी
पुलिस के अनुसार सुनील चंद्रा खुद भी बीज निगम के अकाउंट अफसर पद पर मेरठ में तैनात रहा है। सरकारी नौकरी लगने के बाद सुनील अय्याशी में लिप्त हो गया। पुलिस का कहना है कि प्रेम-विवाह करने के बावजूद उसके लगातार अन्य युवतियों से संबंध बने रहे, जिनके खर्च पूरे करने के लिए उसने विभागीय 53 लाख रुपयों का ही गबन कर लिया।
मामला खुलने के बाद करीब पांच साल पूर्व विभाग की ओर से उसके खिलाफ मेरठ के कंकरखेड़ा थाने में गबन का मुकदमा दर्ज किया गया, जिसके बाद वह अपराध जगत से जुड़कर पिस्टल तस्करी का धंधा करने लगा। इसके बाद वह बुलेटप्रूफ जैकेट्स के धंधे तक जा पहुंचा।