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मनुष्य अपने दुख से नहीं, दूसरों के सुख से दुखी : ज्ञान भूषण
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर पर चल रहे दशलक्षण पर्व के नौवें दिन मुख्य वेदी पर श्रद्धालुओं ने अभिषेक कर पुण्य का संचय किया। समोशरण जिनालय में इंद्रध्वज महामंडल विधान की मांगलिक क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री व आयुष शास्त्री द्वारा मंगलाष्टक प्रारंभ करके कराई गई। मल्लिनाथ भगवान की शांतिधारा मनीष जैन, अनुपम जैन, रेखा जैन, वंश जैन, अपेक्षा जैन, विराज जैन, आयुषी, मुकेश जैन, अपूर्व जैन, अनुष्का, शुभी जैन ने की।
आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने श्रावक श्राविकाओं के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा कि संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं है, जितना कि दूसरों के सुख को देख कर दुखी है। यह आत्मा तो निश्चय की अपेक्षा से शुद्ध है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति अगर अपने किए कराए पर संतोष रखें तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी। अगर वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथाह संपदा भी प्राप्त हो जाए तो भी वह सुखी नहीं हो सकता। क्योंकि वह मोह, राग, द्वेष और लालच के मद में चूर होकर असहज और अशांति का अनुभव करता है।
नित्य नियम पूजन करते हुए सभी भक्तों ने सोलह कारण पूजा एवं दशलक्षण पूजा, रत्नात्रय पूजन की एवं इंद्रध्वज महामंडल विधान में आराधना कर पुण्य का संचय किया। सायंकालीन बेला में संगीतमय आरती भक्ति विधान में शामिल पुरुषों एवं महिलाओं ने विधान स्थल पर संगीत की लहरियों पर जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के पुरस्कार राजेंद्र जैन, सुमन जैन, सम्यक जैन, सावी जैन, राजुल जैन ने प्रदान किए। इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, सुनील जैन, विजय जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन ने सहयोग किया।
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आचार्य ज्ञान भूषण महाराज ने श्रावक श्राविकाओं के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा कि संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नहीं है, जितना कि दूसरों के सुख को देख कर दुखी है। यह आत्मा तो निश्चय की अपेक्षा से शुद्ध है। संसार में रमने के कारण इसके साथ विकारी परिणमन लग गया है। व्यक्ति अगर अपने किए कराए पर संतोष रखें तो निश्चित रूप से उसे शांति मिलेगी। अगर वह संतोषी नहीं है तो तीन लोक की अथाह संपदा भी प्राप्त हो जाए तो भी वह सुखी नहीं हो सकता। क्योंकि वह मोह, राग, द्वेष और लालच के मद में चूर होकर असहज और अशांति का अनुभव करता है।
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नित्य नियम पूजन करते हुए सभी भक्तों ने सोलह कारण पूजा एवं दशलक्षण पूजा, रत्नात्रय पूजन की एवं इंद्रध्वज महामंडल विधान में आराधना कर पुण्य का संचय किया। सायंकालीन बेला में संगीतमय आरती भक्ति विधान में शामिल पुरुषों एवं महिलाओं ने विधान स्थल पर संगीत की लहरियों पर जनसमुदाय को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के पुरस्कार राजेंद्र जैन, सुमन जैन, सम्यक जैन, सावी जैन, राजुल जैन ने प्रदान किए। इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, सुनील जैन, विजय जैन, महाप्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन ने सहयोग किया।
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