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हिंदी हैं हम: ‘हिंदी को मजबूरी नहीं अपनी मजबूती बनाएं’, आईएएस अधिकारी निशांत जैन ने हिंदी को बताया श्रेष्ठ भाषा

Sat, 28 Aug 2021 04:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 28 Aug 2021 04:56 PM IST
सार

2015 में निशांत जैन ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल की थी। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में मातृ भाषा और सहयोगी भाषाओं को मजबूत करने की जरूरत है।

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Make Hindi your strength not a compulsion' IAS officer Nishant Jain told Hindi as the best language
आईएएस निशांत जैन - फोटो : amar ujala

विस्तार

हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, यह हमारा प्रेम है। हिंदी ने सही और सार्थक दिशा दी है। हमें हिंदी को मजबूरी नहीं, अपनी मजबूती बनाना चाहिए। अंग्रेजी के बीच हिंदी ने लगातार अपनी जड़ों को मजबूत किया है। हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए हिंदी की पुस्तकों में विविधता की आवश्यकता है। 
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इतिहास, भूगोल, विज्ञान और चिकित्सा सहित रोचक जानकारियों की संग्रह हिंदी में होना जरूरी है। यह कहना है मेरठ निवासी राजस्थान के पर्यटन निदेशक निशांत जैन का। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में मातृ भाषा और सहयोगी भाषाओं को मजबूत करने की जरूरत है। 2015 में निशांत जैन ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 13वीं रैंक हासिल की थी।
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वह हिंदी भाषा के टॉपर रहे। इतिहास, राजनीति विज्ञान व अंग्रेजी साहित्य में स्नातक और हिंदी साहित्य में स्नाकोत्तर के बाद हिंदी साहित्य में एनईटी-जेआरएफ उत्तीर्ण कर दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमफिल की डिग्री प्राप्त की।
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हिंदी में रोजगार के साधन चाहिए
युवाओं को हिंदी के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए हिंदी में रोजगार के साधन बढ़ाने की आवश्यकता है। टर्की या अन्य देशों की तुलना में हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए अभी हमें लगातार प्रयास करने होंगे। पुस्तक पढ़ने का शौक कायम रखना जरूरी है। युवा सोशल साइट्स पर हिंदी के संदेश देवनागरी लिपी में लिखकर एक छोटी सी शुरुआत कर सकते हैं। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

15 वर्ष के लिए दिया था अंग्रेजी को स्थान
आईएएस एवं लेखक निशांत जैन ने बताया कि उनकी प्रिय पुस्तक ‘रुक जाना नहीं’ रही। यह पुस्तक युवाओं और विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर लिखी। पुस्तक ‘राजभाषा के रूप में हिंदी’ नेशनल बुक ट्रस्ट के द्वारा प्रकाशित की गई। उन्होंने बताया कि संविधान में हिंदी के साथ सहायक भाषा के रूप में अंग्रेजी को 15 वर्ष के लिए स्थान दिया गया। संविधान में हिंदी को तीन हिस्सों में बांटा गया। पहला जिन प्रदेशों में पूर्ण रूप से हिंदी बोली जाती है। दूसरा जहां हिंदी लिखते व बोलने वालों की संख्या थोड़ी कम है और तीसरा जहां हिंदी का प्रयोग नहीं होता। 

कविताएं और किताब लिखी 
निशांत जैन ने सरस्वती शिशु मंदिर से शिक्षा ग्रहण की। बचपन से ही लिखने का शौक था। ऐसे में बाल कविताएं लिखीं। पहली कविता 'चुन्नू-मुन्नू देखो आई मौसम की पहली बरसात' अमर उजाला में प्रकाशित हुई। हिंदी की शीर्ष पर पहुंचाने के लिए निशांत ने सिविल परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ‘मुझे बनना है यूपीएससी टॉपर’ पुस्तक लिखी।

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