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हर परिस्थिति में बनाएं रखें ईश्वर पर विश्वास : अनंतानंद
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- महिला शक्ति संस्थान की ओर से मंगल पांडेय नगर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। महिला शक्ति संस्थान की ओर से मंगल पांडेय नगर के कम्युनिटी हॉल में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके पांचवें दिन महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शास्त्रों और शास्त्र के ज्ञाताओं की शरण में जाकर संशय का समाधान करना चाहिए। ईश्वर को जानने के लिए प्रबल श्रद्धा और निष्ठा आवश्यक है। हमें हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए।
अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि किसी भी भाव से भगवान से संबंध जोड़ने पर वे कल्याण करते हैं। गोपियों ने काम भाव, शिशुपाल ने द्वेष भाव और कंस ने भय से भगवान से संबंध जोड़ा। भक्तों ने भक्ति भाव से और यदुवंशियों ने स्नेह से भगवान का स्मरण किया। अनुकूल और प्रतिकूल दोनों परिस्थितियों में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि निर्गुण ईश्वर को जानना आसान है लेकिन पर सगुण ईश्वर को पहचानना कठिन है।
महामंडलेश्वर ने कहा कि ईश्वर के आश्रित होने के नौ उपाय नवधा भक्ति में बताए गए हैं। इनमें श्रवण, कीर्तन, स्मरण, अर्चन, वंदन, दास्य सहित अन्य शामिल है। कथा में नरसिंह भगवान, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन के प्रसंग भी सुनाए।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। महिला शक्ति संस्थान की ओर से मंगल पांडेय नगर के कम्युनिटी हॉल में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसके पांचवें दिन महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शास्त्रों और शास्त्र के ज्ञाताओं की शरण में जाकर संशय का समाधान करना चाहिए। ईश्वर को जानने के लिए प्रबल श्रद्धा और निष्ठा आवश्यक है। हमें हर परिस्थिति में ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए।
अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि किसी भी भाव से भगवान से संबंध जोड़ने पर वे कल्याण करते हैं। गोपियों ने काम भाव, शिशुपाल ने द्वेष भाव और कंस ने भय से भगवान से संबंध जोड़ा। भक्तों ने भक्ति भाव से और यदुवंशियों ने स्नेह से भगवान का स्मरण किया। अनुकूल और प्रतिकूल दोनों परिस्थितियों में ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। इस दौरान उन्होंने श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि निर्गुण ईश्वर को जानना आसान है लेकिन पर सगुण ईश्वर को पहचानना कठिन है।
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महामंडलेश्वर ने कहा कि ईश्वर के आश्रित होने के नौ उपाय नवधा भक्ति में बताए गए हैं। इनमें श्रवण, कीर्तन, स्मरण, अर्चन, वंदन, दास्य सहित अन्य शामिल है। कथा में नरसिंह भगवान, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन के प्रसंग भी सुनाए।
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