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आत्मा का परमात्मा से अद्भुत मिलन है महारास : गोपाल कृष्ण
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नमामि राधे ट्रस्ट मोदीनगर की ओर से बाबा औघड़नाथ मंदिर परिसर में चल रही कथा में कथा व्यास गोपाल श्रीकृष्ण भारद्वाज ने श्रीकृष्ण की महारास लीला का अनुपम वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास मात्र नृत्य नहीं, आत्मा का परमात्मा से अद्भुत मिलन है।
उन्होंने बताया कि जब पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा संपूर्ण कलाओं से युक्त था और वृंदावन का वातावरण अत्यंत रमणीय था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बंसी बजाई। उस दिव्य नाद को सुनकर ब्रज की गोपियां सब कुछ त्यागकर उनके पास पहुंच गईं। श्रीकृष्ण ने पहले उनकी परीक्षा लेते हुए उन्हें घर लौट जाने का उपदेश दिया। गोपियों ने कहा कि उनका मन, प्राण और चित्त सब कुछ श्रीकृष्ण में ही स्थित है।
श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास का आरंभ किया। प्रत्येक गोपी के साथ एक-एक कृष्ण उपस्थित हो गए और प्रत्येक गोपी को अनुभव हुआ कि श्रीकृष्ण केवल उसी के साथ हैं। यह संकेत है कि परमात्मा प्रत्येक जीव के हृदय में पूर्ण रूप से विद्यमान हो सकता है।
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कथा व्यास ने महारास के आध्यात्मिक स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि गोपियां जीवात्माओं का, श्रीकृष्ण परमात्मा का, बंसी का स्वर परमात्मा के आह्वान का और घर छोड़कर आना संसार के बंधनों से ऊपर उठने का प्रतीक है। रास आत्मा और परमात्मा के प्रेमपूर्ण तादात्म्य का दिव्य उत्सव है। रास के मध्य गोपियों के मन में सूक्ष्म अहंकार उत्पन्न हुआ कि श्रीकृष्ण उन पर विशेष कृपा कर रहे हैं। उसी क्षण भगवान अंतर्धान हो गए। इससे शिक्षा मिलती है कि जहां अहंकार आता है, वहां ईश्वर का अनुभव ओझल हो जाता है।
सत्यव्रत की कथा के माध्यम से समझाया गया कि जहां सत्य होता है, वहां लक्ष्मी, यश और धर्म निवास करते हैं। इस अवसर पर भाजपा नेता विवेक बाजपेयी, पंडित राजू, देवयानी, वाणी, अर्जुन, नीरज शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।
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मेरठ। नमामि राधे ट्रस्ट मोदीनगर की ओर से बाबा औघड़नाथ मंदिर परिसर में चल रही कथा में कथा व्यास गोपाल श्रीकृष्ण भारद्वाज ने श्रीकृष्ण की महारास लीला का अनुपम वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास मात्र नृत्य नहीं, आत्मा का परमात्मा से अद्भुत मिलन है।
उन्होंने बताया कि जब पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा संपूर्ण कलाओं से युक्त था और वृंदावन का वातावरण अत्यंत रमणीय था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बंसी बजाई। उस दिव्य नाद को सुनकर ब्रज की गोपियां सब कुछ त्यागकर उनके पास पहुंच गईं। श्रीकृष्ण ने पहले उनकी परीक्षा लेते हुए उन्हें घर लौट जाने का उपदेश दिया। गोपियों ने कहा कि उनका मन, प्राण और चित्त सब कुछ श्रीकृष्ण में ही स्थित है।
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श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास का आरंभ किया। प्रत्येक गोपी के साथ एक-एक कृष्ण उपस्थित हो गए और प्रत्येक गोपी को अनुभव हुआ कि श्रीकृष्ण केवल उसी के साथ हैं। यह संकेत है कि परमात्मा प्रत्येक जीव के हृदय में पूर्ण रूप से विद्यमान हो सकता है।
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कथा व्यास ने महारास के आध्यात्मिक स्वरूप की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि गोपियां जीवात्माओं का, श्रीकृष्ण परमात्मा का, बंसी का स्वर परमात्मा के आह्वान का और घर छोड़कर आना संसार के बंधनों से ऊपर उठने का प्रतीक है। रास आत्मा और परमात्मा के प्रेमपूर्ण तादात्म्य का दिव्य उत्सव है। रास के मध्य गोपियों के मन में सूक्ष्म अहंकार उत्पन्न हुआ कि श्रीकृष्ण उन पर विशेष कृपा कर रहे हैं। उसी क्षण भगवान अंतर्धान हो गए। इससे शिक्षा मिलती है कि जहां अहंकार आता है, वहां ईश्वर का अनुभव ओझल हो जाता है।
सत्यव्रत की कथा के माध्यम से समझाया गया कि जहां सत्य होता है, वहां लक्ष्मी, यश और धर्म निवास करते हैं। इस अवसर पर भाजपा नेता विवेक बाजपेयी, पंडित राजू, देवयानी, वाणी, अर्जुन, नीरज शर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।