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UP: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र पर नया नियम, दो साल पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी; फीस 10 गुना बढ़ी

Fri, 09 Oct 2026 10:33 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 09 Oct 2026 10:33 AM IST
सार

मेरठ में दो साल से पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदन एक अक्तूबर से सीधे स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। 500 से अधिक मामले लंबित होने से नगर निगम में आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है। नई व्यवस्था में पुराने मामलों के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी, जबकि प्रमाणपत्र की फीस भी बढ़ाई गई है।

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Magistrate Approval Mandatory for Birth and Death Certificates Older Than Two Years in Meerut
जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लगी भीड़ - फोटो : संवाद

विस्तार

मेरठ में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया में बदलाव के बाद आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। नई गाइडलाइन के तहत दो साल से पुराने प्रमाणपत्रों के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है। एसडीएम सदर राहुल द्विवेदी ने एक अक्तूबर 2026 से ऐसे आवेदनों का निस्तारण बंद कर दिया है। नगर निगम में 500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। बृहस्पतिवार को लंबित मामलों को लेकर आवेदकों ने नगर निगम परिसर में हंगामा किया।

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दो साल पुराने आवेदनों पर मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी
केंद्र सरकार के बाद प्रदेश सरकार ने भी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने को लेकर नई गाइडलाइन लागू की है। इसके तहत दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। एसडीएम सदर राहुल द्विवेदी के अनुसार, एक अक्तूबर से ऐसे आवेदन सीधे स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी प्रथम न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति करेंगे, जिसके बाद संबंधित आवेदन उनके पास भेजे जाएंगे।

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नगर निगम में 500 से ज्यादा मामले लंबित
नई व्यवस्था लागू होने के बाद नगर निगम में दो साल पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों के 500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। आवेदक प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं। लंबित मामलों का निस्तारण नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे पर बृहस्पतिवार को नगर निगम परिसर में लोगों ने हंगामा किया।

समय के साथ बढ़ेगी प्रमाणपत्र की फीस
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र प्रभारी एवं अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार के अनुसार, नई नियमावली में प्रमाणपत्र जारी करने के लिए अलग-अलग समय सीमा के आधार पर शुल्क निर्धारित किया गया है। जन्म या मृत्यु के 21 दिन के भीतर प्रमाणपत्र निशुल्क जारी किया जाएगा। 21 से 30 दिन के भीतर आवेदन करने पर 20 रुपये शुल्क लगेगा, जबकि पहले यह दो रुपये था। 30 दिन से एक साल के भीतर प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 50 रुपये देने होंगे, जो पहले पांच रुपये थे। एक साल से दो साल तक के मामलों में 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। दो साल से अधिक पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।

स्कूल में दाखिले से लेकर पेंशन तक जरूरी दस्तावेज
जन्म प्रमाणपत्र बच्चों के स्कूल में दाखिले के साथ आधार कार्ड और पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उपयोगी होता है। वहीं, मृत्यु प्रमाणपत्र बैंक खाते, बीमा, पेंशन और संपत्ति हस्तांतरण जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है। ऐसे में प्रमाणपत्र जारी होने में देरी से परिवारों के जरूरी काम अटक सकते हैं। लंबित आवेदनों के निस्तारण और नई प्रक्रिया को लेकर आवेदकों को अब मजिस्ट्रेट की नियुक्ति और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

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