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मां तुझे प्रणाम: शहीद स्मारक का हुआ सौंदर्यीकरण, क्रांति पथ का निर्माण पूरा, एक नजर में जानें 1857 की क्रांति

Sun, 07 May 2023 12:00 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 07 May 2023 12:00 PM IST
सार

भारत के इतिहास में 10 मई 1857 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन मेरठ से आजादी के पहले आंदोलन की शुरुआत हुई थी। लगभग तीन करोड़ की लागत से विभिन्न स्थानों पर सौंदर्यीकरण का कार्य पूर्ण हो गया है।

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Maa Tujhe Pranam: Beautification of martyr memorial, construction of Kranti Path completed
शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

10 मई 1857 की क्रांति को याद दिलाने वाले शहर के 21 स्थलों पर शिलापट लगा दिए गए हैं। ये शिलापट क्रांतिवीरों के शौर्य की गाथा गा रहे हैं। इससे युवा पीढ़ी प्रेरित होगी। यह पूरी तैयारी 10 मई के मद्देनजर की जा रही है। अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम का आगाज भी दस मई से होगा। औघड़नाथ मंदिर में सुबह 10 बजे पुष्पांजलि कार्यक्रम में शहीदों को नमन किया जाएगा। 15 अगस्त तक विभिन्न कार्यक्रमों से आजादी के मतवालों की अमर गाथा का गुणगान किया जाएगा।

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लगभग 3 करोड़ की लागत से विभिन्न स्थानों पर सौंदर्यीकरण का कार्य पूर्ण हो गया है। इसी क्रम में छावनी परिषद के द्वारा भी क्रांति के उद्गम स्थलों पर सफाई आदि कार्य किया गया है।  -अंजू चौधरी, रीजनल टूरिज्म अधिकारी  
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1857 की क्रांति एक नजर में जाने 
भारत के इतिहास में 10 मई 1857 का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन मेरठ से आजादी के पहले आंदोलन की शुरुआत हुई थी। 85 सैनिकों के विद्रोह से जो चिंगारी निकली वह धीरे-धीरे ज्वाला बन गई और हर भारतीय के दिन में आजादी की चिंगारी ज्वलंत हो उठी। इससे पूर्व भी क्रांति की तैयारी की जा रही थी जिसमें नाना साहब, अजीमुल्ला, रानी झांसी, कुंवर जगजीत सिंह, मौलावी अहमद उल्ला शाह और बहादुर शाह जफर जैसे नाम सामने आते हैं।

इतिहासकार केडी शर्मा ने बताया कि मेरठ से शुरू हुई क्रांति का असर विश्व पटल पर दिखा। गाय और चर्बी युक्त  लगा कारतूस चलाने से मना करने पर 85 सैनिकों ने विद्रोह कर दिया। 85 सैनिकों के कोर्ट मार्शल के बाद क्रांतिकारियों ने उग्र रूप अख्तियार करते हुए 50 से अधिक अंग्रेजों की हत्या कर दी। 

85 सैनिकों को जेल से मुक्त कराया 
9 मई के वे 36 घंटे क्रांति की चिंगारी के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहे। सैनिकों की बगावत के बाद बहादुर शाह जफर को हिंदुस्तान का बगावत के बाद बहादुर शाह जफर को हिंदुस्तान का बादशाह घोषित कर पहली बार हिंदुस्तान की आजादी का आगाज हुआ।

9 मई को परेड ग्राउंड में अश्वारोही सेना के 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल कर अपमानित किया गया। तब तीसरी अश्व सेना के अलावा 20वीं पैदल सेना व 11 वीं पैदल सेना के सिपाही भी मौजूद रहे। 10 मई की शाम 6:30 बजे इन सिपाहियों ने 85 सैनिकों को विक्टोरिया पार्क जेल से मुक्त करा लिया। 

इन स्थलों पर लगे शिलापट 
काली पल्टन मंदिर, 20 वीं नेटिव रेजीमेंट, एमएच रोड पर बंगला, रेस्ट प्वाइंट, परेड ग्राउंड, सेना अस्पातल, तीसरी नेटिव रेजीमेंट, चारलोट डाउसन का निवास, बंगला नंबर 241, कैप्टन एचसी का निवास, साउट एंड रोड, बंगला बर्नेट डाउन, वेस्ट एंड रोड, ऑफिसर्स मैस, पुलिस स्ट्रीट, सदर कोतवाली, सदर बाजार, 195 दिल्ली रोड, कर्नल कर्नमाइकल स्मिथ निवास, क्रांति पथ, शहीद स्मारक पर शिलापट लगाए गए हैं।

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