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प्रेम हमारी दिशा बदलता है और भक्ति हमारी दशा : सुधा खटीक
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श्रीमद् भागवत कथा में मौजूद स्रोत संवाद
श्रीमद्भागवत कथा में पूजा-अर्चना के बाद बोली चेयरपर्सन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी की न्यू ब्लॉक कॉलोनी के शांति चौराहे पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें दिन कथावाचक ने कहा कि जब मनुष्य का हृदय प्रेम, करुणा और भक्ति से भर जाता है, तब उसके जीवन में कोई दुख नहीं रहता। भगवान हमेशा अपने भक्तों के पास रहते हैं। वह उनकी रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं लेकिन मनुष्य मोह-माया में उलझकर परमात्मा को भूल जाता है।
श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य अतिथि नगर पंचायत की चेयरपर्सन सुधा खटीक शामिल हुई। श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। सुधा खटीक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलकर ही जीवन सार्थक बनता है। प्रेम हमारी दिशा बदलता है और भक्ति हमारी दशा। क्रोध पर नियंत्रण पाने वाला व्यक्ति कभी पराजित नहीं होता।
कथावाचक नीलांशु दास महाराज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही पावन भूमि है जिसमें कौरव-पांडव खेला करते थे। भगवान श्रीकृष्ण यहां समय-समय पर आते थे। इसलिए इस पावन भूमि को भगवान श्रीकृष्ण की कर्म भूमि भी कहा जाता है। उन्होंने यज्ञ, दान और तप को आध्यात्मिक उन्नति का प्रमुख साधन बताया। उनका कहना था कि जो हम दूसरों को देते हैं वहीं हमें मिलता है। प्रेम का बदला प्रेम और सहयोग का बदला सहयोग में मिलता है। अगर किसी को कष्ट देंगे तो खुद भी कष्ट भोगना पड़ेगा।
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भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते थे। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इंद्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। जिसे देखकर ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा देख भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। जिससे हारकर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा को बंद कर देते हैं। इसके बाद ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
इस मौके पर नारायण नियोगी, डा. स्वदेश शर्मा, निकांत बाला, बबलू विश्वास, विकास गोलदार, रतन विश्वास, प्रतीश शर्मा, सुभाष मालाकार, कृष्ण कीर्तनीय, अमित सरकार, तरुण सरकार आदि का सहयोग रहा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी की न्यू ब्लॉक कॉलोनी के शांति चौराहे पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पांचवें दिन कथावाचक ने कहा कि जब मनुष्य का हृदय प्रेम, करुणा और भक्ति से भर जाता है, तब उसके जीवन में कोई दुख नहीं रहता। भगवान हमेशा अपने भक्तों के पास रहते हैं। वह उनकी रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं लेकिन मनुष्य मोह-माया में उलझकर परमात्मा को भूल जाता है।
श्रीमद्भागवत कथा में मुख्य अतिथि नगर पंचायत की चेयरपर्सन सुधा खटीक शामिल हुई। श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। सुधा खटीक ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलकर ही जीवन सार्थक बनता है। प्रेम हमारी दिशा बदलता है और भक्ति हमारी दशा। क्रोध पर नियंत्रण पाने वाला व्यक्ति कभी पराजित नहीं होता।
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कथावाचक नीलांशु दास महाराज ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही पावन भूमि है जिसमें कौरव-पांडव खेला करते थे। भगवान श्रीकृष्ण यहां समय-समय पर आते थे। इसलिए इस पावन भूमि को भगवान श्रीकृष्ण की कर्म भूमि भी कहा जाता है। उन्होंने यज्ञ, दान और तप को आध्यात्मिक उन्नति का प्रमुख साधन बताया। उनका कहना था कि जो हम दूसरों को देते हैं वहीं हमें मिलता है। प्रेम का बदला प्रेम और सहयोग का बदला सहयोग में मिलता है। अगर किसी को कष्ट देंगे तो खुद भी कष्ट भोगना पड़ेगा।
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भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन का कार्यक्रम करने की तैयारी करते थे। भगवान कृष्ण द्वारा उनको भगवान इंद्र की पूजन करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज की पूजन करने की बात कहते हैं। इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं। जिसे देखकर ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा देख भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर पूरे नगरवासियों को पर्वत के नीचे बुला लेते हैं। जिससे हारकर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा को बंद कर देते हैं। इसके बाद ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
इस मौके पर नारायण नियोगी, डा. स्वदेश शर्मा, निकांत बाला, बबलू विश्वास, विकास गोलदार, रतन विश्वास, प्रतीश शर्मा, सुभाष मालाकार, कृष्ण कीर्तनीय, अमित सरकार, तरुण सरकार आदि का सहयोग रहा।

श्रीमद् भागवत कथा में मौजूद स्रोत संवाद

श्रीमद् भागवत कथा में मौजूद स्रोत संवाद