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भगवान महावीर ने दुनिया को पढ़ाया अहिंसा का पाठ
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शांतिनाथ विधान पाठ में शामिल श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य शिखर चंद जैन, अश्वनी जैन, अनुराग जैन, अभिषेक जैन, सागर जैन, अचिंत्य जैन आदि को प्राप्त हुआ।
महामंडल विधान में भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि जैन धर्म अनादि निधन धर्म है। इसके प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हुए हैं उन्होंने षटकर्म का उपदेश देकर प्राणियों को जीवन निर्वाह करने की शिक्षा दी। जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी है। जिन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय का पाठ पढाया। शांतिनाथ से सदाप्रवाहित जैन धर्म संचार हुआ। शुभ शांतिधारा भक्ति भाव से करते हैं। हस्तिनापुर में जब शांतिनाथ भगवान का जन्म हुआ, अवतरण हुआ। तो तीनों लोकों में शांति छा गई और शांतिनाथ भगवान के प्रभाव से वृक्षों में फल आ गए। पुष्पों में सुगंधता आ गई जिससे सारा वातावरण सुगंधित हो गया। सर्वत्र दुर्भिक्ष का अभाव हो गया। शांतिनाथ भगवान का प्रभाव ऐसे पड़ा कि वर्तमान में आज भगवान महावीर का शासनकाल चल रहा है। शांतिनाथ से महावीर के तीर्थ काल में लाखों वर्ष हो गए। जैन धर्म विलुप्त नहीं हुआ। अभी भी साढे अठारह हजार वर्ष तक जैन धर्म की गंगा प्रवाहमान होती रहेगी। ऐसे शांतिनाथ भगवान की 12 सदी की भू-गर्भ से प्राप्त जिन प्रतिमा प्रकट हुई थी। जिनका अतिशय दूर-दूर तक फैला हुआ है। श्री शांतिनाथ विधान को बाल ब्र. सुनीता दीदी ने विधि विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई गई।
शाम के समय संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के भजनों पर भक्ति नृत्य किया। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक प्रश्नमंच आयोजित हुआ जिसका संचालन बाल ब्र. सुनीता दीदी ने किया। आज के पुरस्कार अमित जैन, आदित्य जैन, अदिति जैन, मुन्नी रानी जैन सपरिवार वितरित किए गए। अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, शशांक जैन, जेके जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, अभय कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद
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महामंडल विधान में भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि जैन धर्म अनादि निधन धर्म है। इसके प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ हुए हैं उन्होंने षटकर्म का उपदेश देकर प्राणियों को जीवन निर्वाह करने की शिक्षा दी। जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी है। जिन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय का पाठ पढाया। शांतिनाथ से सदाप्रवाहित जैन धर्म संचार हुआ। शुभ शांतिधारा भक्ति भाव से करते हैं। हस्तिनापुर में जब शांतिनाथ भगवान का जन्म हुआ, अवतरण हुआ। तो तीनों लोकों में शांति छा गई और शांतिनाथ भगवान के प्रभाव से वृक्षों में फल आ गए। पुष्पों में सुगंधता आ गई जिससे सारा वातावरण सुगंधित हो गया। सर्वत्र दुर्भिक्ष का अभाव हो गया। शांतिनाथ भगवान का प्रभाव ऐसे पड़ा कि वर्तमान में आज भगवान महावीर का शासनकाल चल रहा है। शांतिनाथ से महावीर के तीर्थ काल में लाखों वर्ष हो गए। जैन धर्म विलुप्त नहीं हुआ। अभी भी साढे अठारह हजार वर्ष तक जैन धर्म की गंगा प्रवाहमान होती रहेगी। ऐसे शांतिनाथ भगवान की 12 सदी की भू-गर्भ से प्राप्त जिन प्रतिमा प्रकट हुई थी। जिनका अतिशय दूर-दूर तक फैला हुआ है। श्री शांतिनाथ विधान को बाल ब्र. सुनीता दीदी ने विधि विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई गई।
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शाम के समय संगीतमय महाआरती में श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के भजनों पर भक्ति नृत्य किया। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम में धार्मिक प्रश्नमंच आयोजित हुआ जिसका संचालन बाल ब्र. सुनीता दीदी ने किया। आज के पुरस्कार अमित जैन, आदित्य जैन, अदिति जैन, मुन्नी रानी जैन सपरिवार वितरित किए गए। अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, शशांक जैन, जेके जैन, अनिल जैन, राजीव जैन, अभय कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद
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