लोकसभा चुनाव: अगर-मगर के बीच फंस रहे हार-जीत के दावे, विधायक शाहिद मंजूर का दावा, जीत रही सपा
मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर इस बार बेहद नजदीकी मुकाबले के आसार हैं। यहां भाजपा अपनी जीत का पक्की मान रहे हैं तो समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा की जीत का दावा कर रही है।
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मेरठ-हापुड़ और बागपत लोकसभा सीट पर हार और जीत के बीच अगर-मगर का सवाल बना है। लड़ाई तो सपा और भाजपा के बीच दिख रही है, लेकिन दावे बसपा के लोग भी कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों का दावा है कि अगर दलितों ने सपा को वोट किया तो सुनीता वर्मा जीत सकती हैं। मगर 2019 में तो सपा-बसपा साथ थीं और उसे मुस्लिम व दलित दोनों के वोट मिले थे। उसके बाद भी याकूब कुरैशी हार गए।
इसी तरह भाजपाइयों के दावों के बीच भी अगर और मगर है। अगर कैंट की सीट पर पिछले चुनावों जैसी बढ़त मिलती है तो अरुण गोविल की जीत आसान हो जाएगी, लेकिन सुनीता वर्मा जब 2017 में मेयर चुनी गईं थीं, उस समय कैंट के कंकरखेड़ा और सिविल लाइन क्षेत्र से उन्हें बढ़त मिली थी।
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दावे सिर्फ मेरठ कैंट को लेकर नहीं हैं, बल्कि शहर व दक्षिण में भी दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी बढ़त बता रहे हैं। भाजपा के लोग 2014 का हवाला दे रहे हैं कि अगर 2014 में पांचों विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल हो सकती है तो 2024 में क्यों नहीं? मगर यह भी कहा जा रहा है कि न तो 2014 वाला माहौल है और न ही 2014 वाली स्थिति।
शहर विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनावों में भाजपा व सपा के वोटों के बीच 20 से 30 हजार के बीच का अंतर रहा है। इस बार यह अंतर कितना रहता है यह देखना दिलचस्प होगा। इसी तरह किठौर में 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने लगभग तीन हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। ऐसे में इस बार किस दल को कितनी बड़ी लीड मिलती है, यह वक्त बताएगा।
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इस बार चुनाव में न तो कोई ऐसा मुद्दा हावी दिखा जिससे विपक्ष की हवा मजबूत मानी जाए और न ही ऐसा कोई मामला सामने आया कि जमीन पर ध्रुवीकरण हुआ हो और चीजें भाजपा के पक्ष में जाती दिखाई दी हों। चुनाव से पहले तक जातीय समीकरण जरूर कुछ हद तक हावी दिखे, लेकिन चुनाव के जातीय आधार पर वोटिंग होती कम नजर आई।
वोट डालने वालों के अपने-अपने मुद्दे थे और अपने उम्मीदवार को वोट देने के लिए उनके अपने-अपने तर्क थे। पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही अपने-अपने मुद्दों पर चुनाव लड़ा। कहीं संविधान खत्म होने का डर दिखाया गया तो कहीं अपराधियों का खौफ दिखाया गया कि अगर विपक्ष की सत्ता आई तो माफिया राज फिर से हावी हो जाएगा
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विधायक शाहिद मंजूर का दावा, जीत रही सपा
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री किठौर से मौजूदा विधायक शाहिद मंजूर का दावा है कि उनकी पार्टी इस चुनाव को जीत रही है। तर्क यह है कि उनकी पार्टी ने सामान्य सीट से दलित उम्मीदवार को उतारा, इसका लाभ उनके दल को मिला। दलित समाज के लोगों ने बढ़ चढ़ कर चुनाव में हिस्सा लिया और दलित वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा उनकी तरफ आया।
पिछले चुनाव का जिक्र करते हुए वह कहते हैं कि सपा-बसपा गठबंधन ने 2019 में पांच में से चार विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई थी, केवल कैंट में ही बड़ा अंतर आया था। लेकिन इस बार उसे कवर करने की पूरी कोशिश की गई है। सुनीता वर्मा पूर्व में मेयर रह चुकी हैं और लोगों का काम किया हुआ है, इस लिए कैंट से भी बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
शाहिद मंजूर के मुताबिक यह चुनाव पिछले चार चुनावों से अलग है। इस बार कई ऐेसे मुद्दे हैं जिसकी वजह से केंद्र सरकार कठघरे में है। इन मुद्दों का जवाब केंद्र के लोगों के पास नहीं है। उनका कहना है कि किठौर से वह बड़ी लीड के साथ सुनीता वर्मा को भेजेंगे।