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मिशन 2019: मुजफ्फरनगर सीट का यह कैसा इतिहास, चौधरी अजित सिंह के सामने होगी बड़ी चुनौती

Wed, 13 Mar 2019 06:52 PM IST
कपिल kapil रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 13 Mar 2019 06:52 PM IST
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Lok Sabha Elections, Ajit Singh will a new history after winning Muzaffarnagar Lok Sabha seat
रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह - फोटो : गूगल

मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर एक अजब मिथक भी जुड़ा है। यहां भाजपा से लड़े जाट प्रत्याशी तो चुनाव जीतते रहे हैं। लेकिन गैर भाजपा दलों के टिकट पर लड़े जाट प्रत्याशी जीत नहीं पाए है। महागठबंधन के मजबूत गणित से चुनाव लड़ रहे रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह के सामने इस मिथक को तोड़ने की चुनौती है।

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बता दें कि जाट समाज की बड़ी हस्तियों में शुमार पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह, पूर्व मंत्री अनुराधा चौधरी, हरेंद्र मलिक, मेजर जयपाल सिंह, वरुण सिंह को यहां हार का मुंह देखना पड़ा।
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मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट का अपना इतिहास है। यह लोकसभा सीट गैर भाजपाई जाट के लिए अब तक फायदे का सौदा साबित नहीं हुई है। पिछले 68 साल से यह मिथक जुड़ा है। 1971 में इस लोकसभा सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह उस समय चुनाव हार गए थे, जब जिले की सभी आठ विधानसभा सीटों पर उनकी पार्टी बीकेडी के विधायक थे। उन्हें सीपीआई और कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी ठाकुर विजयपाल सिंह ने हराया था। तब पहली बार इस सीट पर जाट प्रत्याशी के रूप में उन्होंने चुनाव लड़ा था। 1962 में सीपीआई के मेजर जयपाल सिंह कांग्रेस के सुमित प्रसाद जैन के खिलाफ चुनाव लड़े थे और हार गए।

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1977 में उस समय के प्रमुख जाट नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष रहे वरुण सिंह कांग्रेस के टिकट पर लड़े। इस चुनाव में में वह लोकदल के सईद मुर्तजा से चुनाव हार गए। 1998 में जिले के बड़े जाट नेता हरेंद्र मलिक ने सपा से चुनाव लड़ा और वह भाजपा के सोहनवीर सिंह से चुनाव हार गए। 2009 के लोकसभा चुनाव में उस समय जिले की राजनीति में वर्चस्व स्थापित करने वालीं अनुराधा चौधरी रालोद से चुनाव लड़ीं। उन्हें बसपा के कादिर राना से हार का मुंह देखना पड़ा। 2019 में इस बार रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह की मैदान में उतरने की तैयारी है। इस सीट पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बार इतिहास दोहराया जाएगा या नया इतिहास बनेगा, यह तो रिजल्ट से ही तय होगा।

भाजपा के जाट प्रत्याशी चार बार जीते
लोकसभा की राजनीति में जाट प्रत्याशी के रूप पहली बार 1991 में भाजपा के नरेश बालियान चुनाव जीते थे। उन्होंने तब जनता दल के मुफ्ती मोहम्मद सईद को चुनाव में हराया था। 1996 में भाजपा के ही सोहनवीर सिंह ने सपा के संजय सिंह को पराजित किया। 1998 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर सोहनवीर सिंह सपा के हरेंद्र मलिक को पराजित कर विजयी हुए। 2014 में भाजपा के डॉ. संजीव बालियान ने फतह हासिल की। इस सीट पर जीतने वाले चारों जाट प्रत्याशी भाजपा के ही रहे हैं।

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