मिशन 2019: देवबंद रैली से दिया सियासी पैगाम, मुस्लिम रहेंगे साथ तभी बदलेगा निजाम
पश्चिमी यूपी के देवबंद से गठबंधन की पहली चुनावी रैली का आगाज करते हुए यह साफ नजर आया कि गठबंधन की बड़ी चिंता मुस्लिम हैं। डर है कि कहीं मुस्लिमों में कांग्रेस सेंध न लगा ले। नतीजा, तीनों दिग्गजों ने दो टूक कहा कि दलित मुस्लिम और जाटों को एकजुट रहना है, तभी निजाम बदला जा सकता है। कांग्रेस को मुस्लिम विरोधी बताया गया और खास तौर पर मुस्लिमों से अपील की गई कि किसी के झांसे में आने का मतलब है भाजपा की वापसी।
मुस्लिमों की दारुल उलूम जैसी संस्था के जरिए देश भर में अपनी पहचान बनाने वाले देबवंद में पहली चुनावी रैली करने की पीछे गठबंधन के अहम सियासी मायने सामने आए। सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में रखी गई इस रैली में मुजफ्फरनगर और आसपास के लोग भी मौजूद रहे। चूंकि रैली को बड़ी करने की कोशिश की गई और यह आगाज भी था तो इस नाते से सहारनपुर के अलावा कैराना, बिजनौर के प्रत्याशियों को मंच पर जगह दी गई। मुजफ्फरनगर प्रत्याशी रालोद सुप्रीमो अजित सिंह और बागपत प्रत्याशी जयंत चौधरी तो मंच पर थे ही।
दरअसल इस रैली का पैगाम साफ था। मायावती ने अपने भाषण में काफी समय मुस्लिमों पर फोकस किया। उन्होंने सीधे कहा। सावधान रहें। पर्दे के पीछे के उम्मीदवारों को वोट नहीं करना है। मेरठ, मुरादाबाद, बरेली मंडल में मुस्लिम ज्यादा हैं। कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं है। भाजपा की तरह ही वह चाहती है कि मुस्लिम वोटों में बंटवारा हो जाए। बस बंटवारा ही नहीं करना है। उन्होंने सीधा सहारनपुर पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि सबको पता है कि सहारनपुर में बसपा पहले ही अपनी तरफ से मुस्लिम उम्मीदवार घोषित कर चुकी थी। जानबूझकर कांग्रेस ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार उतारा। किसी भावना में नहीं बहना है और योगी मोदी को सत्ता से बाहर करना है। मायावती ने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट तक का जिक्र किया।
दरअसल सहारनपुर की बात करें तो यहां बसपा के फजलुर्रहमान मैदान में हैं तो कांग्रेस से इमरान मसूद। बसपा को डर है कि दोनों के बीच यदि मुस्लिम वोट ज्यादा बंट गए तो कहीं गठबंधन की राह मुश्किल न हो जाए।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दलित मुस्लिम जाटों को एकजुट करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने समाज को इतना नहीं बांटा होगा जितना भाजपा बांटने का काम कर रही है। इन धर्म के ठेकेदारों की मंशा पर ध्यान रखना है। उन्होंने भी यही आह्वान किया कि एक भी वोट घटने न पाए, कटने न पाए। कांग्रेस की यही मंशा है जो पूरी न हो। रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह ने किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा भाजपा केवल दंगों के सहारे सत्ता में आई। इसे ध्यान रखना।
दरअसल केवल सहारनपुर क्षेत्र की बात करें तो इस सहारनपुर में 17 लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें दलित तीन लाख से ज्यादा हैं तो मुस्लिम लगभग छह लाख। जाट भी तीस हजार से ज्यादा हैं। कांग्रेस से मुस्लिम उम्मीदवार इमरान मसूद मैदान में है। ऐसे में यदि मुस्लिम वोटों में ज्यादा बंटवारा हुआ तो गठबंधन की राह मुश्किल सकती है। योगी और मोदी ने अपने भाषणों में खास तौर पर कैराना का जिक्र किया और मोदी ने तो बोटी बोटी से बेटी बेटी तक की बात कहकर इमरान पर निशाना साधा। कैराना में गठबंधन से तबस्सुम हसन, कांग्रेस से हरेन्द्र तथा भाजपा से प्रदीप चौधरी मैदान में हैं।
उधर, मुजफ्फरनगर में चौधरी अजित सिंह खुद गठबंधन से चुनावी मैदान में हैं। भाजपा से संजीव बालियान और कांग्रेस से यहां कोई उम्मीदवार नहीं है। बागपत में भी गठबंधन से जयंत चौधरी और भाजपा से सत्यपाल सिंह मैदान में हैं। यहां भी कांग्रेस उम्मीदवार नहीं है। इन दो सीटों पर तो गठबंधन मुस्लिमों को लेकर आश्वस्त दिख रहा है सहारनपुर में चिंता है। बिजनौर से कांग्रेस से नसीमुद्दीन सिद्दीकी के आने से चिंता है। वहां गठबंधन से मलूक नागर हैं, जबकि भाजपा से कुंवर भारतेन्द्र चुनाव लड़ रहे हैं। पश्चिम की कई सीटों पर इसी तरह से चिंता है। ऐसे में इस रैली के जरिए मायावती, अखिलेश और अजित सिंह ने पूरा जोर इस पर लगाया कि पश्चिम यूपी के संदेश दिया जाए।
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